गुटखा और पान मसाले के उत्पादन व बिक्री पर रोक को लागू करें राज्य : एफएसएसएआई

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नई दिल्ली 13 अक्टूबर। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को निर्देश दिया है कि वे गुटखा और पान मसाले के उत्पादन और बिक्री पर लगी रोक को पूरी तरह लागू कराएं।
सभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और संबंधित विभागों को 9 अक्टूबर,2017 को लिखे पत्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव सीके मिश्रा ने कहा है कि भारत सहित विश्व में तम्बाकू सेवन मौतों और बीमारियां के उन कारणों में है जिन्हें बहुत हद तक रोका जा सकता है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 23 अक्टूबर ,2016 के निर्देश का हवाला देते हुए बिहार, कर्नाटक ,मिजोरम, मध्य प्रदेश और केरल के मुख्य सचिवों को छोड़कर सभी राज्य के मुख्य सचिवों से कहा है कि वे खाद्य एवं सुरक्षा मानक अधिनियम, 2011 के अंतर्गत बनाए गए खाद्य एवं सुरक्षा मानक (निषेध और प्रतिबंध) नियमन, 2011 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करें। इस विनियमन के नियम 2.2.4 में प्रावधान है कि तम्बाकू और निकोटिन को हमारे भोजन उत्पादों के घटकों के रूप में शामिल नहीं किया जा सकता। इसिलए, सभी गुटखा एवं पान मसाले जैसी खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई जाए जिसमें घटक के रूप में तम्बाकू और निकोटिन मौजूद हैं। यह महत्वपूर्ण है कि 23 अक्टूबर 2016 को एर्कानट मार्केटिंग कॉरपोरेशन एवं अन्य बनाम भारत सरकार (स्थानांतरण मामला (सी) 1ऑफ 2010 ) पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय ने राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के संबंधित वैधानिक अधिकारियों को तंबाकू या निकोटिन के साथ गुटखा और पान मसाला की बिक्री पर एफएसएसएआई द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के पूर्ण अनुपालन के निर्देश दिए थे।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव द्वारा जारी निर्देश में बताया गया है कि हालांकि, गुटखा की बिक्री पर प्रतिबंध को विफल करने और दंड से बचने के लिए, निर्माता अलग-अलग पाउचों में स्वादिष्ट चबाने वाले तम्बाकू के साथ पान मसाला (बिना तम्बाकू) बेच रहे हैं। अक्सर इन पाउचों को एक ही दुकान में एक ही दुकानदार द्वारा साथ में बेची जाती है, ताकि उपभोक्ता पान मसाला और स्वादिष्ट चबाने वाले तम्बाकू एक साथ खरीद सके और उन्हें आपस में मिला कर उनका सेवन कर सके। इस तरह, पहले से तैयार मिश्रण लेने के बजाय, तंबाकू कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए चबाने वाले तम्बाकू के गुटखे और पान मसाले को जुड़वां पैक में बेचा जा रहा है।

इस संदर्भ में, माननीय उच्चतम न्यायालय ने 23 अक्तूबर, 2016 को केन्द्रीय अर्कानट मार्केटिंग कॉरपोरेशन एवं अन्य बनाम भारत सरकार व अन्य (हस्तांतरण मामले (सी) 1 ऑफ 2013) के मामले पर सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि ” विद्वान न्याय मित्र (एमिकस क्यूरीई) ने इस अदालत को यह बताया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक के विनियम, 20111 के नियम 2.3.4 (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) और किसी तरह का स्थगन का आदेश नहीं दिया है और इसलिए संबंधित अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 92 के तहत धारा 26 के साथ पढ़ी जाने वाली, तैयार नियमों का पालन कराएं।”

पत्र में कहा गया है कि उपरोक्त के मद्देनजर, संबंधित वैधानिक प्राधिकरण को कानून के उपर्युक्त जनादेश का अनुपालन करने के लिए निर्देशित किया जाता है। हमने सचिवों, सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि वे गुटखा और पान मसाले की तंबाकू या निकोटीन के उत्पादन और बिक्री पर एफएसएसएआई द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के पूर्ण अनुपालन के मुद्दे पर सुनवाई की अगली तारीख से पहले अपने हलफनामे दर्ज करें।

गुटखा और पान मसाले (तम्बाकू और निकोटीन के साथ) पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में एफएसएसएआई के 9 अक्टूबर के हालिया आदेश, और एफएसएसएआई विनियमन द्वारा लगाए प्रतिबंध को उच्चतम न्यायालय का समर्थन स्वागत येाग्य कदम है। इससे पहले केवल राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों ने तंबाकूया निकोटीन के साथ गुटखा और पान मसाले की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए थे।

टाटा मेमोरियल अस्पताल के प्रोफेसर एंव कैंसर सर्जन डा.पकंज चतुर्वेदी ने बताया कि ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे 2016-17 2016-17 में खुलासा किया गया है कि 29.6 प्रतिशत पुरुष, 12.8 प्रतिशत महिला और 21.4 प्रतिशत सभी वयस्क वर्तमान में धुआं रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं। हालांकि सरकार द्वारा उठाए गए पहल की वजह से तम्बाकू उत्पादों, जैसे गुटखा, पान मसाला (तम्बाकू और निकोटिन सहित) जैसे तम्बाकू के धूम्र रहित कुछ रूपों पर प्रतिबंध, से तम्बाकू सेवन करने वालों की संख्या लगभग 81 लाख तक कम हो गई है।
भारत सहित विश्व में तम्बाकू सेवन मौतों और बीमारियां के उन कारणों में है जिन्हें बहुत हद तक रोका जा सकता है। भारत में धुआं रहित तंबाकू के सेवन के कारण मृत्यु दर और रोग का के बोझ का असर बहुत अधिक है। तंबाकू के कारण भारत में प्रति वर्ष लगभग 10 लाख लोगों की मौतें होती हैं। उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि विश्व में मौखिक कैंसर के सबसे अधिक मरीज भारत में हैं।

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Suvash Chandra Choudhary

Editor-in-Chief

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