सूर्य के किरीट से निकलने वाले पदार्थ अंतरिक्ष मौसम के पूर्वानुमानों को प्रभावित करते हैं

हाल के एक अध्ययन से पता चला है कि कैसे सौर वातावरण में सूर्य के किरीट (कोरोना) से उत्सर्जित होने वाले पदार्थ (कोरोनल मास इजेक्शन) जैसी स्थितियां और घटनाएं अंतरिक्ष के मौसम पूर्वानुमानों की उस सटीकता को प्रभावित करते हैं जो हमारे उपग्रहों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह समझ भारत के पहले सौर मिशन आगामी आदित्य-एल1 से प्राप्त होने वाले आंकड़ों (डेटा) की व्याख्या में सहायता करेगी।

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भारत में तीन नए हीटवेव हॉटस्पॉट के कारण बड़ी आबादी पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है

भारत के उत्तर- पश्चिमी, मध्य और उससे आगे दक्षिण-मध्य क्षेत्र पिछली आधी सदी में तीव्र हीटवेव घटनाओं के नए हॉटस्पॉट बन गए हैं। एक अध्ययन में कहा गया है कि हाल के वर्षों में गम्भीर भारतीय हीट वेव में वृद्धि हुई है। अध्ययन में निवासियों के लिए विभिन्न खतरों पर ध्यान देने के साथ तीन हीटवेव हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रभावी हीट एक्शन प्लान विकसित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है। हीटवेव एक घातक स्वास्थ्य खतरे के रूप में उभरा, जिसने हाल के दशकों में दुनिया भर में हजारों लोगों की जान ले ली, साथ ही भारत में भी पिछली आधी सदी में आवृत्ति, तीव्रता और अवधि में तीव्रता आई है।

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जैविक ई लिमिटेड की कोविड-19 वैक्सीन–कोर्बेवैक्स को दो ​​​​परीक्षणों के लिए डीजीसीआई की मंजूरी

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) और कोविड -19 टीकों के निर्माण में निवेश बढ़ाने के लिए असंख्य पहलें  की हैं ।  इनमें मिशन कोविड  सुरक्षा कार्यक्रम की स्थापना करना कोविड -19 वैक्सीन  के विकास के लिए एक ऐसा प्रयास है  जो टीकों (वैक्सीन) के त्वरित विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों को सुदृढ़ और सुव्यवस्थित करने के लिए किया गया है I इसका उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के साथ जितना जल्दी हो सके, देश के  नागरिकों के लिए एक सुरक्षित, प्रभावोत्पादक, सस्ती और सुलभ कोविड -19 टीका (वैक्सीन) उपलब्ध कराना  है  ।

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जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रों ने खगोलशाला क्षुद्रग्रह खोज अभियान 2021 के तहत क्षुद्रग्रहों का पता लगाया

जवाहर नवोदय विद्यालयों के सोलह छात्रों द्वारा खगोलशाला क्षुद्रग्रह खोज अभियान 2021 के तहत खोजे गए आठ क्षुद्रग्रहों को इंटरनेशनल ऐस्ट्रनॉमिकल सर्च कोलाबरेशन द्वारा “प्रोविजनल स्टेटस” प्रदान किया गया है।

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अब 15 मिनट में ही पानी और खाद्य नमूनों में आर्सेनिक का पता लगाना संभव

इंस्पायर फैकल्टी फेलो डॉ. वनीश कुमार ने 15 मिनट में ही पानी और खाद्य नमूनों में आर्सेनिक संदूषण का पता लगाने के लिए एक अति-संवेदनशील तथा उपयोग में आसान सेंसर विकसित किया है। यह सेंसर अत्यंत संवेदनशील, चयनात्मक तथा एक ही चरण की प्रक्रिया वाला है और यह विभिन्न तरह के पानी और खाद्य नमूनों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

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तारा टूटने से उत्पन्न गामा-किरण विस्फोट को देखने वाले खगोलविदों में भारतीय खगोलविद भी शामिल

खगोलविदों के एक समूह ने उच्च-ऊर्जा विकिरण के एक बहुत ही कम अवधि के ऐसे शक्तिशाली विस्फोट का पता लगाया है जो लगभग एक सेकंड तक हुआ और हमारे ब्रह्मांड की वर्तमान आयु की लगभग आधी दूरी से पृथ्वी की ओर दौड़ रहा था। सुदूर अंतरिक्ष में एक विशाल तारे की मृत्यु के कारण हुआ यह सबसे छोटा गामा-रे विस्फोट

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