हरियाणा में 12 वीं की परीक्षा रद्द : इटरनल एसेसमेंट के आधार पर परिणाम घोषित किया जाएगा, दसवीं परीक्षा का परिणाम 15 जून तक

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चण्डीगढ़, 02 जून – हरियाणा के शिक्षा तथा वन मंत्री कंवरपाल ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी की 12वीं कक्षा की परीक्षा लेने सम्बन्धी तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि इस बारे में राज्य सरकार केन्द्र सरकार के निर्देशों का पालन करेगी और इटरनल एसेसमेंट के आधार पर परिणाम शीघ्र घोषित किया जाएगा। साथ ही, दसवीं परीक्षा का परिणाम भी 15 जून तक घोषित कर दिया जाएगा।


शिक्षा मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते अभी हालात परीक्षा करवाने के अनुकूल नहीं हैं। लेकिन यदि कोई बच्चा परीक्षा देना चाहता है तो परिस्थितियां सामान्य होने पर ऐसे विद्यार्थियों के लिए परीक्षा आयोजित की जा सकती है।


श्री कंवरपाल ने कहा कि वन विभाग के पास 100 किस्म के पेड़ों की नर्सरी है। इस साल प्रदेश में 3.20 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह किसानों को क्लोन सफेदा के 90 लाख पौधे मुहैया करवाए जाएंगे ताकि उनकी आमदनी बढ़े। उन्होंने कहा कि गत वर्ष 1100 गांवों में खाली जमीनों पर पौधे लगाए गए थे। इस साल 2200 गांवों में पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए पंचायतों और ग्रामीणों का सहयोग अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि सरस्वती वन पेहवा और जिला नूंह के सिसोला में काफी जमीन उपलब्ध है। इनके समेत प्रदेश में 4-5 विभिन्न किस्म के पौधे लगाकर जैव विविधता को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे पशु-पक्षियों को भी लाभ होगा।
वन मंत्री ने कहा कि पौधे लगाते समय फलदार पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। ये पौधे किसान की साइड में लगाए जाएंगे। एक योजना के तहत शुरू में अम्बाला, यमुनानगर और पंचकूला जिलों में किसान की साइड में आम के पौधे लगाए जाएंगे। इस पर लगने वाला फल किसान का होगा जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 40 साल से ज्यादा के सफेदे के पेड़ काटकर उनके स्थान पर नई किस्म के पौधे लगाए जाएंगे।


उन्होंने कहा कि रेलवे के साथ काफी जमीन खाली पड़ी है। ऐसी जमीन पर पेड़ लगाने के लिए रेलवे के साथ बातचीत लगभग पक्की हो गई है। जल्द ही इस योजना पर काम शुरू किया जाएगा और पटरी की तरफ छोटे पौधे लगाए जाएंगे ताकि रेलवे को कोई नुकसान न हो। उन्होंने खुलासा किया कि किसान के खेतों में लगे 80-90 साल पुराने पेड़ों के संरक्षण को बढ़ावा देने के मकसद से किसानों को सालाना पेंशन देने की भी सरकार की योजना है ।

वन मंत्री ने कहा कि किसानों के खेतों के साथ लगती सरकारी जमीन पर लगे पेड़ काटने पर 50 प्रतिशत हिस्सेदारी किसान की होती है। इस बारे में शिकायतें आती रहती थी कि विभाग बड़े पेड़ खुद काट लेता है और छोटे किसानों के लिए छोड़ देता है। इसलिए विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अब जो भी पेड़ कटेगा, उसकी छांट में किसान को प्राथमिकता दी जाएगी। बड़ा हिस्सा किसान को ही देने का प्रयास रहेगा ताकि वह अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित हो।

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