इंडिया भी ‘वन स्टूडेंट, वन स्पोर्ट’ की नीति अपना सकता है :  प्रो. शनमुगनाथन

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एसजीटी यूनिवर्सिटी : वर्चुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का तीसरा दिन

आज यूएसए, मलेशिया, यूके, यूक्रेन, इंडोनेशिया, आयरलैंड तथा बांग्लादेश के वक्ताओं ने भी भाग लिया

 गुरुग्राम, 11 मई। एसजीटी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम और नेशनल कौंसिल ऑफ स्पोर्ट्स एंड फिजिकल एजुकेशन के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित वर्चुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस (वेबिनार) के तीसरे और अंतिम दिन अपने विचार व्यक्त करते हुए मलेशिया के वरिष्ठ खेल अध्यापक प्रो. शनमुगनाथन ने कहा कि मलेशिया में “वन स्टूडेंट, वन स्पोर्ट” की नीति लागू की गई है। इस कारण यहाँ खेल संस्कृति का बहुत अच्छा विकास है। उन्होंने कहा कि मलेशिया में स्वास्थ्य से संबंधित फिटनेस की तीन स्तरों पर जाँच होती है। प्रो. शनमुगनाथन ने कहा कि इंडिया भी “वन स्टूडेंट, वन स्पोर्ट” की नीति अपनाकर खेलों में और बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

उन्होंने कहा कि मलेशिया के विश्वविद्यालयों में खेल संकाय हैं जहाँ खेलों में डिप्लोमा, डिग्री के साथ ही खेल मनोविज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई होती है और इन सब कारणों से मलेशिया के लोग खेलों में बहुत आगे हैं।

प्रो. शनमुगनाथन कॉन्फ्रेंस के दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में “शारीरिक साक्षरता और खेल संस्कृति” विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस सत्र की अध्यक्षता का दायित्व निभाया एसजीटी विश्वविद्यालय की प्रो. आशा गाँधी ने।

 

आज “वर्चुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन क्रिएटिंग स्पोर्ट्स कल्चर इन यूनिवर्सिटिज” विषय पर आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए जिनमें से सात वक्ता यूएसए, मलेशिया, यूके, यूक्रेन, आयरलैंड, इंडोनेशिया तथा बांग्लादेश से थे। खेल गतिविधियों के प्रोत्साहन और इनसे जुड़े मुद्दों पर इस वेबिनार को आयोजित करने की संकल्पना दशमेश एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री मनमोहन सिंह चावला की थी जिसे एसजीटी विश्वविद्यालय प्रो वाइस चांसलर डॉ. जी. एल. खन्ना, सी. ई. ओ. डॉ. रिजवान मुसन्ना तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्राध्यापकों और अन्य स्टाफ ने कार्यरूप दिया।

 

तीन दिवसीय वर्चुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का आज अंतिम दिन था। समापन समारोह के मुख्य अतिथि थे पंडित बी.डी. शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, रोहतक के वाइस चांसलर डॉ. ओ. पी. कालरा। डॉ. कालरा ने खेल से जुड़े मुद्दों पर वर्चुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिए एसजीटी विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। अपने भाषण में डॉ. कालरा ने कहा कि मैं एसजीटी विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर डॉ. जी. एल. खन्ना को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद देना चाहता हूँ क्योंकि मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स में रहते हुए उन्होंने हरियाणा में पहला स्पोर्ट्स सेंटर खोलने में मेरी मदद की। उन्होंने कहा कि इस मेडिकल सेंटर से एक तरफ जहाँ स्पोर्ट्स मेडिसिन में नए-नए रिसर्च होंगे वहीं दूसरी तरफ खिलाड़ियों की प्रतिभा को अतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने में भी मदद मिलेगी।

 

इस अवसर पर एसजीटी विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर डॉ. जी. एल. खन्ना ने कॉन्फ्रेंस में भाग लेने वाले सभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं तथा श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कॉन्फ्रेंस के सफल संचालन के लिए उन्होंने ऑर्गनाइजिंग कमेटी के सभी सदस्यों को धन्यवाद कहा। तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में 35 से अधिक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए जिसमें 16 अंतरराष्ट्रीय स्तर के वक्ता थे। कॉन्फ्रेंस को प्रतिदिन करीब 2000 श्रोताओं ने सुना।

छह सत्रों में विभाजित कॉन्फ्रेंस में खेल से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। पहले सत्र की मुख्य वक्ता थी यूएसए की सुश्री सिंथिया बरसेलसन तथा सत्र की अध्यक्षता की जेएनयू, दिल्ली के डॉ विक्रम सिंह ने। इस सत्र में “शिक्षा में मानवतावादी संकटकाल और बाधाओं की पहचान” विषय पर चर्चा हुई। सुश्री सिंथिया ने कहा कि युद्ध, प्राकृतिक प्रकोप जैसे- इबोला, कोरोनावायरस जैसे हालातों में छात्र-छात्राओं के प्रति शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है क्योंकि ऐसे हालातों में शिक्षा के नुकसान की भरपाई करवाना चुनौतीपूर्ण होता है।

 

सुश्री सिंथिया ने विभिन्न देशों में छात्र-छात्राओं को लंच में दिए जाने वाले खाद्य पदार्थों की चर्चा की और कहा कि अच्छे लंच से छात्र-छात्राओं में कुछ नया सीखने का आत्मविश्वास आता है।

 

सुश्री सिंथिया ने अपने वक्तव्य में एसजीटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का भी उल्लेख किया और एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से कहा कि कोविड-19 के इस संकट काल में एसजीटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल रोगियों की सेवा में पूरी प्रतिबद्धता से लगा हुआ है। सुश्री सिंथिया ने इस अस्पताल के कार्यों की सराहना की।

 

तीसरे सत्र की वक्ता थीं बांग्लादेश की कोच ओलंपियन फौजिया हुदा और इस सत्र के अध्यक्ष थे इंडोनेशिया के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. इमाम वालूयो। इस सत्र में ओलंपियन यात्रा और उससे जुड़ी गतिविधियों पर चर्चा हुई। सुश्री फौजिया ने खेलों के माध्यम से एक बेहतर विश्व बनाने की अपील की। उन्होंने ओलंपिक गतिविधियों की विस्तार से चर्चा की और कहा कि तीन इकाइयों इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी, इंटरनेशनल स्पोर्टस फेडरेशन और नेशनल ओलंपिक कमेटी के माध्यम से यह संगठन कार्य करता है।

सुश्री फौजिया ने यह भी बताया कि किस तरह 1993 में एक गाँव के वार्षिक खेलों से उन्होंने अपनी खेल यात्रा शुरू कर सन् 2000 तक सीनियर नेशनल एथलेटिक्स मीट तक पहुँची और उसके आगे की खेल यात्रा पूरी की।

 

चौथे सत्र में यूक्रेन की प्रो. ओल्हा बोरिसोवा ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ यूक्रेन की शारीरिक शिक्षा और खेल गतिविधियों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इस सत्र की अध्यक्षता की एसजीटी विश्वविद्यालय के डॉ. संगीत ने। प्रो. ओल्हा ने अपने वक्तव्य में फिजिकल एजुकेशन और खेल के संदर्भ में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ यूक्रेन की गतिविधियों और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस यूनिवर्सिटी को 316 ओलंपिक मेडल मिल चुके हैं जिनमें 131 गोल्ड मेडल शामिल हैं।

 

पाँचवें सत्र के वक्ता थे यूके के डॉ. गोक कनडसामी और इस सत्र की अध्यक्षता की एसजीटी विश्वविद्यालय के डॉ. रघुवीर रघुमहंती ने। इस सत्र में खिलाड़ियों की रीढ़ से जुड़ी समस्याओं पर विचार-विमर्श हुआ। छठे और अंतिम सत्र की वक्ता थी यूनेस्को चेयर मैनेजर डॉ. कैथरिन कार्टी तथा अध्यक्षता की दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. राकेश गुप्ता ने। इस सत्र में विश्वविद्यालयों में फिजिकल शिक्षा और खेल गतिविधियों को प्रमुखता से शामिल करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया। कॉन्फ्रेंस का संचालन डॉ. संगीत ने किया।

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