9 श्रमिकों की हत्या के मामले में बिहार के संजय कुमार यादव को मौत की सजा

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हैदराबाद : तेलंगाना के जिला वारंगल में जिला अदालत ने 9 श्रमिकों की हत्या करने के मामले में बिहार के एक व्यक्ति संजय कुमार यादव को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। संजय पर प्रवासी श्रमिकों को भोजन में अत्यधिक नींद की गोलियां मिलाकर हत्या करने का आरोप था. हत्या के बाद उसने सभी नौ व्यक्तियों के शवों को कुएं में डाल दिया था. यह सनसनीखेज घटना 5 माह पूर्व की है।

यह मामला जिला वारंगल के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में विचाराधीन था और 5 माह बाद इसका फैसला आया जिसमें आरोपी को मौत की सजा सुनाई गई।

बताया जाता है कि स्थानीय पुलिस ने जांच में इस बात का खुलासा किया था कि अभियुक्त संजय यादव एक युवती के साथ लिव इन रिलेशनशिप में था और उसने उसकी हत्या कर दी थी। उसकी हत्या को छिपाने के लिए ही आरोपी ने गत 20 मई को वारंगल के पास गोरे कोटा गांव में 9 श्रमिकों की भी हत्या कर दी और उनके शवों को एक कुएं में डाल दिया।

वारंगल पुलिस ने गत 25 मई को आरोपी संजय यादव को गिरफ्तार किया था जिसने पुलिस पूछताछ में इस बात का खुलासा किया था कि उसने श्रमिकों के खाने में ही नींद की गोलियां मिलाकर उनकी हत्या की थी. इनमें 6 सदस्य एक परिवार के थे।

मृतकों में मकसूद आलम, उनकी पत्नी निशा, उनके बेटे शाहबाज आलम, सोहेल आलम, बेटी बुशरा खातून, बुशरा के 3 साल के बेटे, पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे जबकि बिहार के रहने वाले राम कुमार साह, श्याम कुमार साह और त्रिपुरा के रहने वाले मोहम्मद थे।

जानकारी के अनुसार आरोपी संजय यादव एक फैक्ट्री में काम करता था जिसका संबंध निशा की भतीजी रफी का के साथ था जो अपने पति से अलग होने के बाद पश्चिम बंगाल से तीन बच्चों के साथ वारंगल आई थी और वह भी उसी कारखाने में काम करती थी।

वह एक किराए के मकान में रहता था। उसने एक दिन रफीक की बेटी से यौन सम्बंध बनाने की कुत्सित कोशिश की जिसका उसने विरोध किया। इसकी रंजिश में उसने रफीका को ही रास्ते से हटाने का मन बना लिया। संजय ने उसे मारने की योजना के तहत उसे पश्चिम बंगाल ले जाने की बात कह कर ट्रेन से विशाखापट्टनम के लिए रवाना हो गया गत 6 मार्च को गरीब रथ ट्रेन से वह दोनों यात्रा कर रहे थे इसी बीच उसने योजना के तहत पीने के लिए छात्र खरीदा और उसमें ही नींद की गोलियां मिलाकर रफी का को भी बेहोश कर दिया।

रफीक आजम बेहोशी की अवस्था में पहुंच गई तो संजय यादव ने ट्रेन में ही उसका गला घोट दिया और उसके सब को आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी स्थित निदादावोल ट्रेन से बाहर फेंक दिया।

अपनी कुत्सित योजना को कामयाब करने के बाद वह राजामुंदरी में ट्रेन से उतर गया और वापस वारंगल आ गया। वारंगल पहुंचने के बाद निशा और उसके पति ने रफी का के बारे में पूछा तो उसने उसे झूठी सूचना दी और झांसी में रखा कि वह अपने गांव पहुंच गई जो बाद में वापस आएगी।

इस बीच मकसूद को उसके व्यवहार पर संदेह हुआ और उसने पुलिस में शिकायत करने की ठानी। मकसूद के मंसूबे पर पानी फेरने के लिए ही संजय यादव ने उसके पूरे परिवार को और उसके साथ रहने वाले दूसरे अन्य व्यक्तियों को भी रास्ते से हटाने का मन बना लिया।

बताया जाता है कि गत 20 मई को मकसूद का परिवार शाहबाज का जन्मदिन मना रहा था। यह मौका देख कर संजय यादव भी वहां पहुंचा और उसने चुपके से उन परिवारों के भोजन में नींद की गोलियां मिला दी। उसके घर में आने की जानकारी वहीं पास में रह रहे दो बिहार के युवकों को भी थी उसे भी आरोपी संजय यादव ने दुनिया से विदा करने की ठान ली और उसके कमरे में गया और उसके खाने में भी किसी तरह नींद की गोलियां मिला दी।

इस बीच त्रिपुरा का रहने वाला शकील जो मकसूद के घर जन्मदिन के समारोह में शामिल होने को आया था वह भी संजय यादव की इस खौफनाक साजिश का शिकार बन गया।

यह दिल दहला देने वाली घटना वारंगल पुलिस के लिए भी एक बड़ी चुनौती थी। पुलिस ने सक्रिय भूमिका अदा करते हुए मामले से पर्दा उठाने में कामयाबी हासिल की और हत्यारे संजय यादव को कानून के शिकंजे में लाने में सफल हुई।

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