न्यायालय ने ‘भविष्योतेर भूत’ फिल्म को प्रतिबंधित करने पर ममता सरकार पर लगाया 20 लाख का जुर्माना

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नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बांग्‍ला फिल्‍म ‘भविष्‍योतेर भूत’ पर एक तरह से प्रतिबध लगाने के मामले में बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल सरकार पर 20 लाख रूपये का जुर्माना लगाया।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि 20 लाख रूपये की जुर्माना राशि का भुगतान अभिव्यक्ति और बोलने की स्वतंत्रता के अधिकार के हनन के लिये मुआवजे के रूप में फिल्म निर्माताओं तथा सिनेमाघर के मालिकों को किया जाना चाहिए।

न्यायालय इंडिबिली क्रिएटिव प्रा लि और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस याचिका में राज्य सरकार और गृह विभाग सहित विभिन्न विभागों तथा पुलिस आयुक्त को इस फिल्म के प्रदर्शन में किसी प्रकार की बाधा पड़ने से रोके जाने का निर्देश दिए जाने की मांग की गई थी।

शीर्ष अदालत ने 15 मार्च को ममता बनर्जी सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया था कि फिल्म का प्रदर्शन किसी भी तरह से बाधित नहीं होना चाहिए और न ही इसकी स्क्रीनिंग पर किसी प्रकार की बंदिश लगायी जानी चाहिए।

इसके अलावा, न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि फिल्म के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त किये जायें।

न्यायालय ने राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि दर्शकों और वहां आने वालों को किसी प्रकार का खतरा नहीं हो और जिन सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन चल रहा है उनकी संपत्ति को किसी प्रकार के नुकसान का खतरा नहीं होना चाहिए।

सेन्सर बोर्ड ने 19 नवंबर, 2018 को इस फिल्म को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिये यू/ए प्रमाण पत्र दिया है।

पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष शाखा की ओर से एक निर्माता को यह संदेश मिला था कि फिल्म में जो कुछ दिखाया गया है उससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं जिससे कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है।

याचिका के अनुसार इस फिल्म को अधिकांश सिनेमाघरों ने हटा दिया गया है और इस समय 48 सिनेमाघरों में से सिर्फ दो में ही यह फिल्म दिखाई जा रही है। यह फिल्म प्रदर्शन के एक दिन बाद ही 16 फरवरी को एक पर्दे वाले सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स से उतार ली गयी थी।

अनिक दत्ता के निर्देशन में बनी यह फिल्म 15 फरवरी को रिलीज हुई थी। इस फिल्‍म में भूतों का एक समूह एक शरणार्थी शिविर में इकट्ठा होता है और वर्तमान समय में प्रासंगिक होने का प्रयास करता है। इन भूतों में राजनेता भी शामिल हैं।

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