हरियाणा के साथ आएं और काम करें : ओमप्रकाश धनखड

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– सरकार और विभाग हर सहयोग को तैयार
– आस्टे्रलिया, फ्रांस व टयूनेशिया आदि के प्रतिनिधियों ने सांझा किए अनुभव

गुरूग्राम, 11 अक्टूबर। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को हरियाणा में आकर कृषि क्षेत्र में काम करने का न्यौता दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग कृषि क्षेत्र में निवेश के लिए हर तरह का सहयोग करेगा।
कृषि मंत्री वीरवार को गुरूग्राम के वेस्टिन होटल में आयोजित 32वीं वल्र्ड यूनियन ऑफ हॉलसेल मार्केट कांफ्रेंस में नई तकनीक, आधुनिकीकरण एवं मार्केट नेटवर्किंग विषय को लेकर आयोजित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के सेमीनार में बोल रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अब ग्लोबल विलेज कॉंसेप्ट आ गया है। ऐसे में सभी देशों को एक दूसरे के अनुभव सांझे करते हुए कृषि क्षेत्र को आगे बढने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पांच राष्ट्रीय राजमार्ग हरियाणा से निकलते हैं और इस दृष्टि से कृषि क्षेत्र में निवेश की दृष्टि से हरियाणा बेहतरीन जगह है। इसलिए सभी देश व्यापार की दृष्टि से भी हरियाणा को चुन रहे हैं। हरियाणा में निवेशकों और उत्पादकों को नई दिल्ली और चंडीगढ़ के दो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों का फायदा भी मिलता है। हरियाणा के किसान अब मार्डन हो चले हैं। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में हरियाणा में निवेश करने वाले देशों को प्रदेश सरकार और कृषि विभाग बेहतर सहयोग को तत्पर है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन विश्वविद्यालय हैं। करनाल में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय खोला जा रहा है। हिसार में एशिया का सबसे बड़ा कृषि विश्वविद्यालय और पशुपालन विश्वविद्यालय है। उन्होंने कहा कि हरियाणा अब कृषि क्षेत्र में आधुनिक विचार और तकनीक के साथ आगे बढ़ रहा है। ईज ऑफ डूईंग बिजनेस में हरियाणा देश में तीसरे और उत्तर भारत में पहले नंबर पर है। उन्होंने कहा कि आज का समय सभी देशों को एक साथ मिलकर अपने अनुभव सांझा करते हुए काम करने का है। उन्हें विश्वास है कि ऐस कार्यक्रमों से ना केवल कृषि क्षेत्र को बढावा मिलेगा, बल्कि दुनिया के देश एक दूसरे से सीखकर खाद्य सुरक्षा और ताजा उत्पादकों के मामले में भी आगे बढ़ेंगे।
सेमीनार में टयूनेशिया दूतावास के बौजडारिया जामेल ने कहा कि हरियाणा फल और सब्जी सहित कृषि क्षेत्र में जाना माना नाम है। कई ऐसे क्षेत्र और उत्पाद हैं, जिनकों लेकर टयूनिशिया और हरियाणा काम कर सकते हैं। उन्होंने चावल, गेंहू और चीनी का हरियाणा से आयात करने की ईच्छा जाहिर की। उन्होंने टयूनेशिया में ओगे्रनिक फार्मिंग के क्षेत्र में अपने गए तकनीकों सहित अन्य जानकारिया भी दी।
फ्रांस दूतावास की फ्रनकुश मोरीन ने अपने प्रजेंटेशन में बताया कि फल व सब्जी के क्षेत्र में फांस कैसे एक उत्पादक से लेकर उपभोक्ता तक ताजा उत्पाद पहुंचाया जाता है। उन्होंने बताया कि फांस में फलों के लगभग 27500 और सब्जी के लगभग 30800 फार्म हैं। इन फार्मों से खरीददार सीधे उत्पाद खरीदतें हैं। सेमीनार में आस्टे्रलिया दूतावास के एनीरबन डेब ने बताया कि उनके देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर किस प्रकार से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आस्ट्रेलिया और हरियाणा का मौसम लगभग एक जैसा ही है। आस्टे्रलिया में बहुत कम क्षेत्र में बागवानी होती है और चुनिंदा फल ही उगाए जाते हैं। ऐसे में आस्टे्रलिया जरूरत के हिसाब से फलों का आयात और निर्यात करता है।
सेमीनार में हरियाणा राज्य औधोगिक संरचना विकास निगम के मनोज कुमार ने प्रदेश में औधोगिक क्षेत्र को बढावा देने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और बताया कि प्रदेश में एकल सुविधा केन्द्र की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से निवेशक सिंगल विंडो पर औधोगिक विभाग से जुडी सारी सेवाएं उपलब्ध कर सकते हैं।
सेमीनार में हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज संधु, कृषि विभाग के निदेशक डी के बेहरा, कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक हरदीप सिंह व डॉक्टर आर एस ढिल्लो, मार्केटिंग बोर्ड की चेयरपर्सन कृष्णा गहलावत सहित इथोपिया, दक्षिध अफ्रिका, स्पेन व ईटली आदि देशों के प्रतिनिधी भी उपस्थित रहे।

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