“किसानों की आय दोगुणा करने के लिए ई- नैम बेहतर प्लेटफार्म”

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दो वर्ष में ई-नैम प्लेटफार्म पर 50 हजार करोड़ से ज्यादा का हुआ कारोबार
गुरूग्राम, 11 अक्टूबर। किसानों की आय दोगुणा करने के लिए उन्हे उनके फसल उत्पाद के बेहतर दाम मिलें, यह भारत सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत सरकार ने किसानों को लागत मूल्य से डेढ़ गुणा भाव देने, किसानों को अपनी बेहतर भाव लेने के लिए ई-नैशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नैम)प्लेट फार्म उपलब्ध करवाने जैसे ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। गुरूग्राम में आयोजित वल्र्ड यूनियन ऑफ होलसेल मार्केट कॉंफ्रेंस को संबोधित करते हुए सीईओ नेशनल रेनफैए एरिया अथोरिटी (एनआरएए) एवं किसानों की आय दोगुणा करने की कमेटी के चेयरमैन भारत सरकार डॉ अशोक दलवई ने यह बात कही।
डॉ दलवई ने कहा कि दो वर्ष पहले भारत में किसानों को अपना उत्पाद सीधा बेचने के लिए ई-नैम योजना शुरू की गई थी । दो वर्ष में ई-नैम योजना उम्मीद से अधिक सफल रही है। ई-नैम प्लेटफार्म पर अब 50 हजार करोड़ से अधिक का कारोबार हो चुका है। ई-नैम प्लेट फार्म पर देश के 20 राज्यों के एक करोड़ 19 लाख किसान, एक लाख 18 हजार टेड्रर्स, 66 हजार से ज्यादा कमीशन एजेंट और 383 फार्मर प्रोड्यूज ओरगेनाइजेशन (एफपीओ) जुड़ चुके है। डॉ दलवई ने कहा कि ई-नैम प्लेट फार्म पर 585 मंडी और 90 कोमोडिटिज पंजीकृत हो चुकी है।
डॉ दलवई ने हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ के प्रयासों की प्रंशसा करते हुए कहा कि हरियाणा की 54 मंडिया ई-नैम से जुड़ चुकी हैं। उन्होंने व्योम कांफे्रंस में विश्व भर से पंहुचे प्रतिनिधियों को बताया कि ई-नैम प्लेटफार्म के स्थापति होने से सिंगल प्वाइंट लेवी मार्केट फीस, ई-टृेडिंग और यूनिफाइड लाईसेंस प्रचलन में आया, जो सभी मंडियों में वैध है। डॉ दलवई ने कहा कि भारत सरकार का ई-नैम प्लेट फार्म व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ढ़ांचागत विकास पर विशेष फोकस है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में सीईओ डॉ पवनेक्ष कोहली ने विश्वस्तरीय कॉफें्रस को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नियमों का सरलीकरण करने के साथ साथ अनुदान देने की भी व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि फल, सब्जी, अनाज का वेस्टेज रोकने व विश्व मार्केट तक पंहुचने के लिए अच्छी कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था होना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज के साथ, पेकै जिंग, लेबलिंग व परिवहन व्यवस्था में भी सुधार किया जा रहा है।
डॉ पवनेक्ष ने कहा कि ई-नैम प्लेटफार्म का बेहतर उपयोग करते हुए हरियाणा के किसान अमेरिकन कपास, जौ, बाजरा, चावल, मूंग,गेंहू, आलू गुड़ जैसे उत्पाद मार्केट रेट से अधिक मूल्यों पर बेचने में सफल हुए हैं। सत्र के समापन पर लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविधालय हिसार के कुलपति डॉ गुरदयाल सिंह ने भारत सरकार के अधिकारियों को स्मृति चिहन देकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि विश्व स्तरीय व्योम कांफे्रस का शुभारंभ कें्रदीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री पुरूषोतम रूपाला ने किया जबकि हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओम धनखड़ ने काफ्रेंस की अध्यक्षता की।
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बाजार सुधार : पिछले अनुभव एवं भविष्य की चुनौतियों के विषय में विशेषज्ञों ने रखी राय
गुरूग्रामख्, 11 अक्टूबर सोशल मीडिया व ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में विश्व के लोगों की फूड हैबिट्स में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे में मांग के अनुरूप खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है कि पूरे विश्व को एक प्लेटफार्म पर लाया जाए। वल्र्ड यूनियन आफ होलसेल मार्केट (व्योम) इस जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। यह विचार नेशनल काऊंसिल आफ स्टेट एग्रीक्लचरल मार्किटिंग बोर्ड (सीओएसएएमबी इंडिया) के प्रबंध निदेशक डा.जे.एस.यादव ने गुरूवार को ÞÞ बाजार सुधार : पिछले अनुभव एवं भविष्य की चुनौतियोंंं Þ विषय पर आयोजित सांयकालीन सत्र में रखे। इस सत्र में मैक्सिको से सीईओ रमिरो कैवेजो, स्पेन से सीईओ जे.तेजेडो, इटली से सीईओ एफ.एम.पैलोटिनी व रूई पोलियो फिगरेडो ने भी इस विषय को लेकर अपने विचार रखे। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डा.गुरदयाल सिंह ने वक्ताओं का स्वागत किया।
डा.जे.एस.यादव ने पिछले एक दशक में विश्व में मार्केट के रूझान को देखते हुए कहा कि यह जरूरी है कि हम भी इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अभी से तैयार हो। उन्होंने कहा कि चीन और जापान की तरह बड़ी मंडियों, कोल्ड स्टोरेज व ढांचागत सुविधाएं तैयार करनी होंगी। ई-मार्केट व डिजिटल प्लेटफार्म पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है तभी हम बाजार सुधार की दिशा में चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पैकेजिंग व लैबलिंग में बहुत काम करने की आवश्यकता है और इस प्रकार के आयोजन सुधार की दिशा में निश्चित तौर पर सफलतम कदम है। उन्होंने कहा कि डिजीटल के युग में इंटरनेट व सर्कुलेशन का एक्शन प्लान बनाना होगा ताकि किसान व उपभोक्ताओं की दूरी मिटे।
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