जाकिर के एनजीओ से राजीव गांधी फाउंडेशन को चंदा 

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कुछ माह पहले चंदा लौट दिया गया है : सिंघवी

नई दिल्ली : जाकिर नाईक का एनजीओ के बारे में धीरे धीरे चौकाने बाले खुलासे हो रहे हैं. अब इस संस्था के विवाद के दायरे में राजीव गांधी फाउंडेशन आ गया है. इस फाउंडेशन को विवादास्पद इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के एनजीओ से 50 लाख रुपये का चंदा मिलने की खबरों से राजनितिक गलोयरों में हलचल तेज है. हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार यह पैसा लौटा दिया गया है। उल्लेखनीय है कि नाइक पर युवाओं में कट्टरपंथी भावना भरने का आरोप है।

नाइक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को ‘प्राथमिकता सूची’ में रखने वाले केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार एनजीओ ने राजीव गांधी फाउंडेशन से संबद्ध संस्था राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट (आरजीसीटी) को 2011 में चंदा दिया था। यह संस्था बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में और जरूरतमंदों को अस्पताल खर्च उठाने के लिए धन प्रदान करने के क्षेत्रों में काम करती है।

इस बात की पुष्टि इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) के प्रवक्ता आरिफ मलिक ने भी की है।  ढाका के एक रेस्तरां में आतंकी हमले के बाद इस साल जुलाई में धन लौटा दिया गया। मलिक ने कहा कि ‘हमें इस साल जुलाई में पैसा वापस मिल गया जिसकी वजह एनजीओ को ही अच्छी तरह पता होगी। उन्होंने माना  कि हमने अन्य एनजीओ को भी पैसा दिया है.

हालाँकि मालिक ने सवाल किया कि क्या चंदा देने में कुछ गलत था ?’ आईआरएफ प्रवक्ता ने कहा कि नई सरकार के काबिज होने के बाद पूरी जांच की गयी लेकिन उन्हें संस्था के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिल सका।

इधर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने चंदा लिये जाने की बात स्वीकार की है लेकिन यह भी दावा किया कि यह मांगा नहीं गया था। सिंघवी ने कहा कि आईआरएफ पर आतंकवाद और जबरन धर्मांतरण के आरोपों में फंसने से पहले चंदा लिया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय नाइक का एनजीओ निगरानी सूची में नहीं था। सिंघवी के दावा किया है कि  ‘चंदे का पता अचानक से चला जब हालिया घटनाक्रम घटा। कुछ महीने पहले धन वापस कर दिया गया।’

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