क्या लॉक डाउन में हरियाणा से बिहार और यूपी गए हुए 1.09 लाख लोग अब वापस आना चाहते हैं ? रोजगार की चिंता उन्हें सताने लगी !

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सुभाष चंद्र चौधरी

गुरुग्राम। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए देशव्यापी लॉक डाउन में प्रवासी मजदूरों के पलायन  की खबरों के बीच हरियाणा के लिए सुखद खबर है कि बिहार और उत्तर प्रदेश चले गए बड़ी संख्या में श्रमिक या मजदूर वापस आना चाहते हैं । बिहार और उत्तर प्रदेश के 1.09 लाख लोगों ने हरियाणा के विभिन्न शहरों में वापस आने के लिए हरियाणा सरकार के वेब पोर्टल पर आवेदन किया है। हो सकता है यह विपक्षी राजनीति करने वाले दलों को नहीं भाए लेकिन यह सत्य है कि लॉक डाउन के आरंभ में हरियाणा के कई शहरों से अलग-अलग माध्यम से अपने गृह राज्य चले गए लोगों में अब अपने रोजगार पर वापस आने की बेसब्री दिखने लगी है। उन्हें हरियाणा में मारुति सुजुकी इंडिया से लेकर सभी बड़े एवं छोटे औद्योगिक इकाइयों के पुनः काम शुरू करने की खबर ने चिंतित कर दिया है। जिन राज्यों में वह लॉक डाउन के दौरान हरियाणा से निकलकर अलग-अलग माध्यम से चले गए वहां रोजगार के साधन नगण्य है जबकि पिछले लगभग 2 माह के दौरान उनकी आर्थिक स्थिति भी अब जवाब देने लगी है। ऐसे में उन्हें अपने जीविकोपार्जन के लिए पुनः अपने काम पर लौटने के अलावा कोई विकल्प सामने नहीं दिख रहा है। अगर बात की जाय बिहार की तो वहां उद्योग और व्यवसाय के नाम पर क्या है इसका अंदाजा वहां के श्रमिकों को भी है और वहां राजनीति करने वाले बड़बोले नेताओं को भी है।


ऐसा समझा जाता है कि हरियाणा से गए हुए अधिकतर श्रमिकों को तब इस बात की आशंका सता रही थी कि लॉक डाउन की अवधि कई माह तक बढ़ाई जा सकती है। इसलिए उन्होंने यहां से अपने गृह राज्य जाना ही ठीक समझा और कोई साइकिल से तो कोई अनैतिक तरीके से एंबुलेंस किराए पर लेकर तो कोई माल वाहक वाहनों ,ट्रकों से अपने-अपने जिले में पहुंच गए। कई ऐसे उदाहरण भी देखने को मिले जब हरियाणा के अलग-अलग शहरों से जिसमें गुरुग्राम भी शामिल है से लोगों ने अपने गृह जिले की ओर पैदल मार्च शुरू कर दिया था। अब जबकि हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार की गाइडलाइन के तहत अपने रेड जोन, ऑरेंज जोन और ग्रीन जोन के सभी शहरों में चरणबद्ध तरीके से औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पुनः काम शुरू करने की अनुमति देने का निर्णय लिया तो इस सूचना से यहां से गए हुए श्रमिकों एवं मजदूरों में वापस आने की खलबली मच गई है।

इस संबंध में शनिवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उद्योग जगत के लोगों के साथ बैठक में स्वीकार किया कि एक तरफ हरियाणा से अपने गृह प्रदेश जाने वाले श्रमिकों ने बड़ी संख्या में हरियाणा की वेबसाइट पर पंजीकरण कराया है तो दूसरी तरफ एक लाख से अधिक  लोगों ने केवल बिहार और यूपी से वापस हरियाणा के औद्योगिक शहरों में आने के लिए भी पंजीकरण कराया है। उनकी ओर से किया गया यह खुलासा वास्तव में उन  लाखों प्रवासी श्रमिकों की आंखें खोलने के लिए काफी है जो अब भी यहां से अपने गृह राज्य लौटने के लिए बेताब दिख रहे हैं। संभव है उन्हें इस बात का भान अभी नहीं है कि जब वह अपने गृह राज्य जाएंगे तो वहां व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियां नगण्य मिलेंगी। वहां रोजगार की संभावनाएं क्षीण देखकर उनके सामने एक बार फिर  वापस हरियाणा आने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा  लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी क्योंकि उनके वापस आने की प्रक्रिया भी फिर यहां की जाने की प्रक्रिया से ज्यादा जटिल होगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइड लाइन के अनुसार हरियाणा से बिहार या यूपी जाने के बाद उनके गृह जिले में उन्हें या तो सरकार द्वारा स्थापित क्वॉरेंटाइन सेंटर में या फिर होम क्वॉरेंटाइन में उन्हें 14 से 21 दिनों तक अपने परिवार से अलग ही रहना पड़ेगा। यानी 14 या 21 दिन बाद ही वह अपने राज्य में भी सामान्य जीवन जीने की अनुमति प्राप्त करेंगे। जबकि उन्हें पुनः हरियाणा वापस आने के लिए एक बार फिर बिहार सरकार और हरियाणा सरकार की साइट पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना पड़ेगा।

यही नहीं ऐसे लोगों को बिहार और यूपी से वापस पुनः हरियाणा के शहरों में आने के बाद 14 दिन के लिए फिर क्वॉरेंटाइन में रहना आवश्यक होगा। उसके बाद ही वह अपने रोजगार पर संबंधित कंपनियों या प्रतिष्ठानों में लौट पाएंगे। दूसरी तरफ उनके यहां से जाने और पुनः वापस आने की अवधि के दौरान  संबंधित कंपनियां या व्यावसायिक प्रतिष्ठान उनका इंतजार करने के बजाय  दूसरे अन्य प्रोफेशनल्स या श्रमिकों या फिर मजदूरों को अपने काम पर लगा लेंगे । इससे उनकी नौकरी जाने का खतरा तो है ही साथ ही उनके लिए नौकरी ढूंढने में भी  बड़ी कठिनाई होगी । औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लॉक डाउन की अवधि बढ़ाने के क्रम में  सीमित संख्या में ही श्रमिकों की आवश्यकता होगी । ऐसे समय में जो श्रमिक या प्रोफेशनल आसानी से शहर में उपलब्ध होंगे उनको ही संबंधित कंपनियां अवसर  देने का निर्णय लेगी। ऐसे प्रवासी मजदूरों को यह भी अच्छी तरह जान लेना चाहिए कि मारुति कंपनी सहित कई बड़ी कंपनियों ने अलग अलग तरीके से अपने श्रमिकों का लोकेशन और उनका डाटा संकलित किया है जिससे उन्हें इस बात का अंदाजा लग गया है कि कितने मजदूर आसानी से गुरुग्राम जैसे शहर में अब भी उनके लिए उपलब्ध है । उसके अनुरूप ही उन कंपनियों ने अपना काम संचालित करने की योजना बनाई है और जो श्रमिक शहर में या आसपास उपलब्ध हैं उन्हें तत्काल रोजगार पर लेने का संकेत भी दिया है। अब दो राज्यों में 28 दिन से अधिक समय तक अलग अलग क्वॉरेंटाइन में जाने से बचने और अपने जीविकोपार्जन के लिए रोजगार बचाए रखने की दृष्टि से बेहतर होगा कि हरियाणा के उन औद्योगिक शहरों में ही बने रहें ना कि बिहार और यूपी जाने के लिए उतावले हों। इन सारे तथ्यों से यह समझना बेहद आसान है कि हरियाणा से वापस जाने की बेताबी पर अंकुश लगाना ही भविष्य के लिए अच्छा होगा।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने  जिस बात का खुलासा किया है उससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में हरियाणा के शहरों में और तेज गति से औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने का वातावरण बनाया जाएगा। हरियाणा सरकार की ओर से जारी आंकड़े के अनुसार  1.9  लाख लोगों ने  बिहार एवं उत्तर प्रदेश से हरियाणा के अलग-अलग शहरों में वापस आने के लिए आवेदन किया है । वापस आने के लिए आवेदन करने वालों में 79.29 % लोगों ने गुड़गांव, फरीदाबाद, पानीपत, सोनीपत, झज्जर, यमुनानगर और रेवाड़ी आने की इच्छा जताई है। चौंकाने वाली बात यह है कि उनमें से 50,000 से अधिक लोग गुरुग्राम जिले में आना चाहते हैं। कारण स्पष्ट है कि गुरुग्राम राज्य में अधिकतम औद्योगिक गतिविधियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों वाला जिला है।

पलायन की इस आपाधापी में  सुखद बात यह है कि  हरियाणा सरकार ने निर्णय लिया है कि हरियाणा वापस आने वालों के लिए भी प्रदेश सरकार जल्द ही व्यवस्था करेगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी अपने संबोधन में स्पष्ट किया है यह कहते हुए कि “यदि प्रवासी श्रमिक हरियाणा आना चाहते हैं, तो हम उन्हें वापस लाने के लिए व्यवस्था बनाने की कोशिश करेंगे। उनका कहना है कि राज्य में औद्योगिक गतिविधियाँ शुरू हो चुकी हैं और लोग काम पर वापस आना चाहते हैं तो यह अच्छी बात है। क्योंकि हरियाणा में औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को पुनः पटरी पर लाने के लिए सभी इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों एवं प्रतिष्ठानों ने अपना काम करना शुरू कर दिया है।

हरियाणा के कई अधिकारियों का मानना है कि राज्य में कोरोनोवायरस संक्रमण अपेक्षाकृत अन्य राज्यों से कम होना भी श्रमिकों की वापसी का एक और कारन है।  उल्लेखनीय है कि शनिवार तक हरियाणा में कोरोनावायरस संक्रमित कुल 653 मामले थे, जिसमें 14 इतालवी नागरिक और आठ मौतें शामिल हैं। इसलिए भी यहां से गए हुए लोगों में हरियाणा के प्रति विश्वास जगने लगा है कि यहां उनके जीवन को अपेक्षाकृत उनके गृह राज्य के खतरा कम है जबकि यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था दूसरे राज्यों की तुलना में अधिक मजबूत है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि  हरियाणा आने के लिए आवेदन करने वाले लोगों में से अधिकतर ऐसे लोग हैं जो काम पर वापस आना चाहते हैं। कुछ प्रतिशत ऐसे लोगों की भी है जो हरियाणा के अलग-अलग शहरों में रह रहे अपने अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए भी यहाँ आने के लिए बेताब हैं।

संकेत यह भी मिले हैं कि मारुति सुजुकी इंडिया की ओर से आगामी 12 मई से गुड़गांव उद्योग विहार एवं मानेसर स्थित अपनी सभी इकाइयों में कार उत्पादन का काम पुनः शुरू करने की घोषणा से बड़ी संख्या में श्रमिकों ने शहर को अब नहीं छोड़ने का मन बनाया है। दूसरी तरफ चूंकि हरियाणा में दुकानों और उद्योगों में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं, इसलिए उनके मालिक उन्हें वापस बुला रहे हैं, जिसने उन्हें अपने आवेदन ऑनलाइन जमा करने के लिए प्रेरित किया है।

गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने सात दिन पहले उन लोगों के लिए वेब पोर्टल लॉन्च किया था जो हरियाणा से अपने घरेलू राज्य जाना चाहते हैं। 8 मई तक 1.46 लाख लोगों ने राज्य में लौटने के लिए आवेदन किया था, 7.95 लाख इस राज्य को छोड़ना चाहते हैं। आंकड़े बताते हैं कि तीन-चौथाई लोग जो वापस आना चाहते हैं (74.5%) बिहार और उत्तर प्रदेश से हैं।

अभी तक 23452 श्रमिकों को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और मध्य प्रदेश वापस भेज दिया गया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यह आश्वस्त किया है कि यहां से जाने वाले किसी भी श्रमिक से रेल किराया या बस किराया नहीं वसूला जाएगा। लेकिन आने वाले लोगों के आवेदन की संख्या को देखते हुए हरियाणा के उद्यमियों एवं व्यवसायियों में आशा की किरण जगी है कि अब माहौल आने वाले सप्ताह में तेजी से बदलेगा और जिन 8 लाख से अधिक लोगों ने यहां से जाने के लिए आवेदन किया है उनमें से भी बड़ी संख्या में श्रमिक या प्रोफेशनल अब पुनः यहीं टिके रहने का निर्णय ले सकते हैं।

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