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बैसाखी, भगवान परशुराम जयंती व अक्षय तृतीया पर्व का संयुक्त आयोजन
अपनी मिट्टी के संस्कारों को बचाने के लिए आपके पास केवल 8-10 वर्ष
जिनको पंजाबी कल्चर के बारे में पूरा ज्ञान है वह पीढ़ी अब वृद्धावस्था में है


गौरतलब है कि इस अवसर पर भगवान परशुराम जयंती व अक्षय तृतीया का पर्व भी साथ मनाया गया। हरियाणा सरकार की पंजाबी साहित्य अकेडमी ने पंजाबी संस्कृति के कार्यक्रम का शानदार आयोजन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। इस अवसर पर राष्ट्रहित सेवा संगठन द्वारा पुष्पित- पल्लवित बच्चो ने भी नृत्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष कन्हैयालाल आर्य ने कहा कि पंजाबी समाज ने अपनी मेहनत के बल पर सब कुछ प्राप्त किया है। परंतु कभी भीख नहीं मांगी।
प्रख्यात शिक्षाविद डॉक्टर अशोक दिवाकर द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि पंजाबी समाज अपनी संस्कृति के माध्यम से गुडगांव के विकास में कंधे से कंधा मिलाकर अपना सहयोग दें। उन्होंने इस अवसर पर पंजाबी समाज के दिवंगत गणमान्य लोगों का स्मरण भी किया।

कार्यक्रम का संचालन संस्कार भारती की साहित्य विधा संयोजिका गुरप्रीत कोर ने किया। कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्थाएं संस्कार भारती के जिला संयोजक यशवंत शेखावत, हिंदू क्रांति दल के राजीव मित्तल, चेतन शर्मा, भारतीय जनता पार्टी सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रमोद मंगला, समाज सेविका मीनाक्षी सक्सेना, सीमा शर्मा ने संभाली।

धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रहित सेवा संगठन के सचिव सोरभ सचदेवा ने दिया।इस अवसर पर भीम नगर कॉलोनी के पंजाबी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।उन्होंने मुक्त कंठ से इस कार्यक्रम की प्रशंसा की। उन्होंने आग्रह किया कि पंजाबी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के कार्यक्रम समय समय पर करते रहे।
