लाल किला परिसर में उपद्रव के लिए कथित किसान नेता और जत्थेबंदियाँ सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं : प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान

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करनाल  । देश की राजधानी दिल्ली और लाल किला परिसर में हुए हुडदंग के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार वे कथित किसान नेता और जत्थेबंदियाँ हैं जिन्होंने पुलिस और प्रशासन को ट्रेक्टर मार्च को शांतिपूर्ण बनाये रखने का जिम्मा उठाया था।  देश का हर सभ्य और देशभक्त नागरिक गणतंत्र दिवस पर हुए इस घृणित काण्ड को ले कर आहत है और आक्रोशित भी। कथित  किसान आन्दोलन की सच्चाई सारे देश के सामने आ गई है । हरियाणा ग्रन्थ अकादमी उपाध्यक्ष और भाजपा नेता प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने दिल्ली में किसानों के नाम पर हुई हिंसक और भड़काऊ गतिविधियों की भर्त्सना करते हुए यहाँ जारी एक वक्तव्य में कहा कि किसानों के कथित नेताओं को समूचे राष्ट्र से माफ़ी मांगनी चाहिए।

वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने आंदोलनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन की अनुमति जिन किसान नेताओं के भरोसे पर दी थी, आज की हिंसा के दौरान वह योजनाबद्ध तरीके से अदृश्य हो गए। किसान नेताओं को इस घटना के बाद खुद को किसान नेता कहना बंद कर देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि वे जिनकी अगुवाई थी उनकी जिम्मेदारी अनुशासन बनाए रखना भी थी । जिन्होंने शांति भंग नहीं होने देने का वचन दिया था और जिन्होंने निर्धारित रूट पर मार्च निकालने का वायदा कर जो अनुमति प्राप्त की थी, वे नदारद हैं । अब जो हुडदंग कर रहे हैं वे तथाकथित किसान या तो किसान है ही नहीं और अगर है भी तो अपने नेताओं को फर्जी साबित करने पर तुले हुए हैं।

भाजपा नेता डॉ. चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय महापर्व गणतंत्र दिवस पर रोष मार्च निकालना ही अपने आप में अनुचित कार्य था मगर प्रजातंत्र के नाम पर मिली मंजूरी का इतनी बेहयाई के साथ दुरुपयोग करना प्रमाणित करता है किसानी आंदोलन में खालिस्तानी व दूसरे अराजक तत्व न केवल घुस आए हैं बल्कि यहीं लोग अब कथित आंदोलन पर हावी हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उनकी शंकाओं के निवारण का लगातार वचन दे रही है मगर विपक्षी लोग खासकर कांग्रेसी और वामपंथी किसानों के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं और इन्हीं में कुछ लोगों ने आज तक बातचीत सिरे नहीं चढ़ने दी।

डॉ. चौहान ने दोहराया कि तीनों खेती संबंधी कानून किसानों के लिए लाभकारी हैं। देर सवेर आंदोलनकारी किसानों को भी इनके फायदे समझ आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की भावनाओं को भड़का कर उसकी आग पर अपना पतीला चढ़ा रहे विपक्षी भूल रहे हैं देश की राजधानी को अराजकता की भट्ठी में झोंक कर बहुत खतरनाक खेल खेल रहे हैं।

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