कश्मीर घाटी से आतंकवादी अब जान बचा कर भाग रहे हैं : अरुण जेटली

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आतंकवादियों का कश्मीर घाटी से सफाया सरकार की प्राथमिकता

पत्थरबाजों की संख्या भी अब 20 से 50 के बीच 

नई दिल्ली: केन्द्रीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि कश्मीर घाटी से आतंकवादी अब जान बचा कर भाग रहे हैं और वे दशकों तक लोगों को आतंकित नहीं कर सकते. उन्होंने दोहराया कि हथियारबंद आतंकवादियों का कश्मीर घाटी से सफाया सरकार की प्राथमिकता है.

 

एक निजी न्यूज चैनल के एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद मुद्रा की कमी और एनआईए द्वारा अलगाववादी नेताओं के हवाला कारोबार पर कार्रवाई के बाद पहली बार यह देखने को मिला रहा है कि अब आतंकवादी घाटी में बैंक लूट रहे हैं. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि घाटी में हथियारबंद आतंकवादी अब काफी दबाव में हैं और अब वे वहां से भागने की फिराक में हैं. उनके अनुसार पहले हजारों की तादाद में नियंत्रण रेखा पार करने वालों की संख्या घट गई है और सुरक्षा बल पूरी तरह वहां पर हावी हैं.

 

रक्षा मंत्री ने कहा कि पहले,  आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान सैकड़ों या हजारों की संख्या में पत्थरबाज इकट्ठे होकर आतंकवादियों को भागने में मदद करते थे. अब यह संख्या घटकर 20, 30 या 50 रह गई है.

 

जेटली ने डोकलाम इलाके में भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि ‘मौजूदा हालात संवेदनशील हैं और मैं किसी भी तरह की टिप्पणी सार्वजनिक तौर पर नहीं करूंगा. हमें अपने सुरक्षा बलों पर पूरा भरोसा रखना चाहिए.

 

उन्होंने कहा कि आज कोई बड़ा आतंकवादी यह सपना नहीं देख सकता कि वो आतंकी गतिविधियों को अंजाम देकर घाटी को दशकों तक आतंक के साये में रख सके, क्योंकि आज उनकी जिंदगी घटकर कुछ महीनों की रह गई है. विशेष तौर पर जम्मू-कश्मीर पुलिस की मेहनत के लिए रक्षा मंत्री ने तारीफ की. आज नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा पर भारतीय सेना हावी है, खासतौर से हमारी सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद आतंकवादियों के लिए घुसपैठ करना बेहद मुश्किल हो गया है.’

  

 

घाटी में आतंकवादियों द्वारा आईएसआईएस का झंडा लहराने के सवाल पर जेटली ने इसे छिटपुट घटना बताया. उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर हमारा देश आईएसआईएस के खतरे से मुक्त है. हम भारत को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनाना चाहते हैं और इसके लिए हम निजी क्षेत्र को आगे लाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. हम लोग इसके साथ ही अपनी ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज और रक्षा से जुड़े सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत भी कर रहे हैं.

 

कार्यक्रम के दौरान एक सवाल के जवाब में जेटली ने आरोप लगाया कि देश के अंदर कुछ ताकतें हैं जो कि सुरक्षा बलों की आलोचना कर देश को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पिछले साल हुई घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने ऐसा कहा.

 

उन्होंने यह कहते हुए कटाक्ष किया कि मैं लेफ्ट के नेताओं के बारे में समझ सकता हूं जब वे इस तरह के राष्ट्रविरोधी तत्वों का समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि जब मुख्यधारा की पार्टी और उसके नेता ऐसे लोगों का साथ देते हैं तो फिर यह परेशानी की बात हो जाती है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह कल्पना कर सकते हैं कि इंदिराजी, राजीव गांधी या नरसिम्हा राव कांग्रेस के किसी नेता के ऐसे कदम का समर्थन करते ?

 

अगले साल के बजट के बारे में केंद्रीय वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि अगले साल दो शीर्ष प्राथमिकताएं रहेंगी, राष्ट्रीय सुरक्षा और ग्रामीण भारत.

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