अतीत को वर्तमान से जोड़ता प्रतीक चिह्न

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 स्वर्ण जयंती उत्सव का प्रतीक चिह्न जारी

पहला कार्यक्रम एक नवम्बर को

गुडग़ांव, 17 सितम्बर :  हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को गुडग़ांव में हरियाणा स्वर्ण जयंती उत्सव के प्रतीक चिह्न को जारी किया। एक साल तक चलने वाले स्वर्ण जयंती उत्सव कार्यक्रम की शुरूआत 1 नवम्बर, 2016 को एक भव्य समारोह के माध्यमswarn-jayanti-3-a से किया जायेगा. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होंगे.

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हरियाणा स्वर्ण जयंती उत्सव प्रतीक चिन्ह की पुस्तिका का विमोचन भी किया. इसमें  प्रतीक चिन्ह की विशेषताओं का वर्णन किया गया है। इस प्रतीक चिन्ह की परिकल्पना स्वयं हरियाणा के मुख्यमंत्री ने की थी जबकि परिवर्धन उनके प्रधान सचिव राजेश खुल्लर द्वारा किया गया था। इस प्रतीक चिन्ह का डिजाइन खेल एवं युवा मामले विभाग हरियाणा के डिजाइनर सुनील कुमार द्वारा तैयार किया गया है।.

हरियाणा स्वर्ण जयंती उत्सव के प्रतीक चिन्ह को जारी करते समय लोक निर्माण मंत्री राव नरवीर सिंह, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, उद्योग मंत्री विपुल गोयल, मुख्य ससंदीय सचिव सीमा त्रिखा, मुख्य सचिव डी.एस. ढेसी, हरियाणा आवास बोर्ड के चेयरमैन जवाहर यादव, गौसेवा आयोग के चेयरमैन भानीराम मंगला, हरियाणा डेयरी विकास प्रसंघ के चेयरमैन जी एल शर्मा, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल, खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. के.के. खंडेलवाल, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक समीरपाल सरो, ओलम्पिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त तथा महिला पहलवान साक्षी मलिक सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

कार्यक्रम में हरियाणवी संस्कृति से जुड़े कई आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर उद्योग से जुड़ी़ विभिन्न हस्तियों ने अपने-अपने  अनुभव भी सांझे किए।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा 1 नवम्बर, 2016 को भारत गणराज्य के संघीय नक्शे पर एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व आया था.  प्रदेश के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राज्य सरकार ने कई समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है. ये सभी कार्यक्रम वेद, गीता और उपनिषद के गौरवशाली अतीत को प्रदर्शित करेंगे. साथ ही प्रदेश के लोगों के सपनों को भी परिलक्षित करेंगे। इनमें पहला समारोह पहली नवम्बर को गुडग़ांव में होगा.

इसमें एक कृषि प्रधान राज्य से सबसे विकसित राज्य बनने तक के सफ़र को रेखांकित कोय जायेगा. स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणवियों के योगदान को भी यद् किया जायेगा . प्रदेश कि जीवन शैली व परम्पराओं को भी लोगों के सामने लाया जायेगा. राज्य के जवान, किसान, खिलाडी इसके मुख्या किरदार होंगें. यह प्रतीक विभिन्न तत्वों के एकीकरण को दर्शाता है.

क्या कहता है स्वर्ण जयन्ती प्रतीक चिह्न  ?

हरियाणा स्वर्ण जयन्ती प्रतीक चिह्न में सुनहरी पृष्ठ भूमि के साथ गीता संदेश की प्रतिकृति श्वेत शंख का चित्र, प्रदेश के गठन के 50 वर्ष का चित्रण, हरियाणा का मानचित्र, ‘हरियाणा स्वर्ण उत्सव’ 1 नवम्बर, 2016 – 31 अक्तूबर, 2017 के नीचे एक तीर शामिल हैं।

प्रतीक चिह्न के डिजाइन में रंग एक मुख्य तत्व है. यह पहचान स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस संदर्भ में रंग का महत्व मानव दृश्य धारणा यांत्रिकी के कारण है. इसमें रंग और इसकी विषमता दृश्य विस्तार का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सुनहरी पृष्ठïभूमि एक तरफ स्वर्ण जयन्ती अर्थात् हरियाणा प्रदेश के गठन के 50 वर्ष पूरे होने और दूसरी तरफ ज्ञान एवं विद्वत्ता का प्रतीक है। सफलता, उपलब्धि और विजय सुनहरे रंग से प्रदर्शित की जाती है। यह रंग विपुलता, स्मृद्घि और खुशहाली से भी जुड़ा है। यह सम्पन्नता, प्रतिष्ठा, विन्रमता और लालित्य से भी जुड़ा है। सुनहरा रंग वीरता, बहादुरी, साहस, प्रबलता, शौर्य, शिष्टïता, धैर्य, पराक्रम, निर्भयता, हिम्मत और निडरता का भी प्रतीक है। यह सूर्य का रंग है। इसे अत्यंत उत्थान करने वाला और सकारात्मक रंग भी माना जाता है। यह व्यक्ति को आशावादी, प्रबुद्घ और आध्यात्मिक बनाता है। सुनहरे रंग के अर्थ में उदारता, खुशी, परम्परा और प्रतिभा भी शामिल हैं, जो हरियाणा की धरा और यहां के लोगों की विशेषता है।

शंख को अंग्रेजी में ‘कोंच शैल’ कहा जाता है। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार शंख एक बहुत ही शुभ वस्तु है। किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले शंखनाद किया जाता है। जब शंखनांद होता है, तो इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। हरियाणा स्वर्ण जयंती समारोह के प्रतीक चिह्न में बना शंख स्वर्ण जयन्ती समारोह के भव्य शुभारंभ और सकारात्मक ऊर्जा तथा प्रदेशभर में आपसी भाइचारे की सद्भावना के वातावरण का प्रतीक है।

शंख जल धारण करने के लिए प्रयोग किया जाता है और शंख में धारण किए गए जल को गंगा जल के समान पवित्र माना जाता है। शंख समुद्र मंथन से प्राप्त हुई 14 वस्तुओं में से एक है।

Suvash Chandra Choudhary

Editor-in-Chief

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