डीसी निशांत यादव का गाँव धनवापुर दौरा, ट्रीटेड सीवेज वाटर योजना का लिया जायजा

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गुरुग्राम, 04 जनवरी। गुरुग्राम के उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि गुरुग्राम जिला प्रशासन ने जल संरक्षण की दृष्टि से गुरुग्राम और पड़ोसी जिलों के सूखे गांवों में सिंचाई के लिए ट्रीटेड सीवेज वाटर का पुन: उपयोग करने की योजना बनाई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत
30 गांवों में 51,000 एकड़ से अधिक भूमि की सिंचाई के लिए धनवापुर और बहरामपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकले 550 एमएलडी ट्रीटेड सीवेज वाटर का उपयोग किया जाएगा। डीसी श्री यादव ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत गुरुग्राम और झज्जर जिला में आने वाले गांव वर्तमान में सिंचाई के लिए भूजल और मीठे पानी के चैनलों पर निर्भर हैं।


बुधवार को योजना की प्रगति की समीक्षा करने गांव धनवापुर पहुँचे डीसी श्री यादव को सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता अजयेंद्र सुहाग ने बताया कि संबंधित एजेंसी द्वारा उपरोक्त परियोजना का करीब 50 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। बाकी बचा हुआ कार्य इस वर्ष परियोजना के पूर्ण होने की निर्धारित तिथि 20 मई से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार, दो एसटीपी चैनल झज्जर ड्रेन से जोड़े जाएंगे।

इसमें लगभग 128 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 10,700 एकड़ में सूक्ष्म सिंचाई प्रदान करने की भी योजना है। योजना में धनकोट, गोपालपुर, चंदू, गढ़ी हरसरू जैसे गांवों में 1,700 एकड़ में सूक्ष्म सिंचाई भी शामिल है। इसके लिए 21.77 करोड़ रुपये का करार किया गया है।वहीं झज्जर जिला के गांव बाढ़सा व गुरुग्राम जिला के गांव सुल्तानपुर और झांझरोला जैसे गांवों में 1,400 एकड़ में सूक्ष्म सिंचाई की भी योजना है, जिसके लिए 21.42 करोड़ रुपये की राशि का समझौता किया गया है। इसी प्रकार बहरामपुर एसटीपी से छोड़े जाने वाले ट्रीटेड सीवेज वाटर से लाभान्वित होने वाले गुरुग्राम व झज्जर जिला के अन्य गाँवों में हरिनगर डूमा, खेड़ा खुरमपुर, कुतानी, जड़ाऊ, सिवाड़ी और मुशेदपुर शामिल हैं।

डीसी श्री यादव ने बताया कि एसटीपी बहरामपुर और धनवापुर के ट्रीटेड सीवरेज वाटर को झज्जर जिला के झाड़ली में स्थित बिजली संयंत्रों (यानी एनटीपीसी और सीएलपी) में उपयोग करने की योजना है। योजना का उद्देश्य ताजा नहर के पानी को बचाना है, जिसे रेवाड़ी, नारनौल और दादरी जैसे जिलों में आपूर्ति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस योजना के सिरे चढ़ने से ऐसे जिलों में पेयजल की कमी की समस्या का समाधान होने की संभावना है।

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