अमेरिकी व्यावसायियों से भारत में निवेश का आह्वान

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नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी व्यवसायियों को प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का हिस्सा बनने और भारत को उनके अगले निवेश गंतव्य के रूप में देखने के लिए आमंत्रित किया है। ग्लोबल फाइनेंशियल एंड इन्वेस्टमेंट लीडरशिप पर इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स यूएसए के शिखर सम्मेलन को बुधवार को वर्चुअली संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार सशक्त, खुले और परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध है। “आइए हम एकता की भावना के साथ मिलकर काम करें। आइए हम एक-दूसरे के साथ जुड़ें और मुझे यकीन है कि हमारे पास अमेरिका और भारत के लोगों की साझा समृद्धि के लिए एक उज्ज्वल भविष्य है।

यह बताते हुए कि आने वाले वर्षों में अमेरिका-भारत संबंध और भी अधिक मजबूत होंगे, श्री गोयल ने कहा कि हमारे सुदृढ़ संबंध बहुत स्थायी एवं ठोस आधार पर हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत अमेरिका को साथ मिलकर व्यापक सुधार के उपायों पर काम करते हुए काफी आगे बढ़ना होगा, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के तहत शुरू किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच असीम क्षमता है। “हम ऐसे मित्र हैं जो एक दूसरे पर भरोसा करते हैं और हम अमेरिकी व्यवसायों को एक ऐसे देश के साथ काम करने, एक विश्वसनीय स्रोत प्रदान करने के लिए तेजी से प्रगति कर सकते हैं, जो पारदर्शी हो, जहां नियम-आधारित व्यापार और संवाद हो। अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2017 में  126 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2019 में 145 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया था। अगले 5 वर्षों में हमारे पास  500 बिलियन अमेरिकी डॉलर का जो लक्ष्य है, वह महत्वपूर्ण है।”

श्री गोयल ने कहा कि भारत आज अतीत से बाहर निकलकर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मानसिकता, अधिक वैश्विक जुड़ाव और विश्व व्यापार में अधिक हिस्सेदारी में शामिल हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह रूढ़िवादी दृष्टिकोण का समय नहीं है, यह साहसिक निर्णय और साहसिक निवेश का समय है। श्री गोयल ने कहा कि मोदी सरकार का बहुत समग्र दृष्टिकोण है। “हम रेड-टेप से रेड-कार्पेट की ओर बढ़ रहे हैं। हम अतीत के बंधनों से निकलकर एक अधिक खुले और उदार विदेशी निवेश गंतव्य की ओर जा रहे हैं। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है, “हमें भारतीय अर्थव्यवस्था को निर्देश और नियंत्रण से बाहर निकालकर प्लग एंड प्ले की ओर ले जाना है।”

देश में किए जा रहे सुधारों के बारे में श्री गोयल ने कहा, “भारत खनन, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रक्षा, बैंकिंग, वित्तीय क्षेत्रों, श्रम और कृषि सुधारों के आसपास की शासन प्रणालियों, नीतियों और कानूनों में सुधार के लिए प्रयास कर रहा है। हमने एक नई यात्रा शुरू की है, जो भारत को उन स्तरों पर ले जाएगा, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया था। हम उपस्कर सुधार की ओर देख रहे हैं ताकि उपस्कर की लागत में कमी आए। हम करों में कई प्रकार के सुधार कर रहे हैं। हमने दिवालिया कानून लागू किया है। भारत का कॉर्पोरेट टैक्स दुनिया में सबसे कम है। मेरा अपना मंत्रालय ‘प्लग एंड प्ले’ और क्लस्टर विकास पर काम कर रहा है। हम एक वास्तविक सिंगल-विंडो सिस्टम पर जोर दे रहे हैं, जो भारत में कंपनियों और व्यवसायों के लिए काम करना आसान बनाता है। हम बेहतर बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम तेजी से पंजीकरण, बुनियादी ढांचे की आसान उपलब्धता का वादा करते हैं।”

श्री गोयल ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि चाहे वह परमाणु आपूर्तिकर्ता समूहों में या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता का मामला हो या कोविड महामारी के चरम पर जरूरी दवाओं के लिए अमेरिका की आवश्यकता  का मामला हो, भारत और अमेरिका ने पिछले दो दशकों में एक-दूसरे की हर संभव मदद की है। उन्होंने कहा कि टोक्यो में क्वैड के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री एम. पोम्पियो और भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीच द्विपक्षीय वार्ता और इस महीने के अंत में 26 और 27 अक्टूबर को तीसरा भारत-अमेरिका के बीच संभावित संवाद जैसे तथ्यों से भारत-अमेरिका के बीच संबंधों का स्पष्ट तौर पर पता चलता है।

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