आईपीएस बनना चाहती है असिस्टेंट कमाडेंट ऊषा

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” आंतकवाद को पनपने से पहले ही उखाड़ना होगा “

लिंगानुपात में भेदभाव दुखदायी : उषा

गुडगाँव: केंद्रीय रिर्जव पुलिस बल में असिस्टेंट कमाडेंट प्रशिक्षण प्राप्त (कंमाडों) ऊषा किरण का कहना है कि वे अब अपने दायित्व को संभालते हुए आंतकवाद को पनपने से पहले ही उखाडने का पहला लक्ष्य रखेंगी। साथ ही लिंगानुपात में जो भेदभाव समाज में देखने को मिल रहा है उसको भी वे अपने स्तर पर काफी हद तक बेटियों की हौसला अफजाई कर उन्हे आगे बढने में मदद करेंगी। ऊषाकिरण वीरवार को सीआरपीएफ अकादमी के भव्य दीक्षांत परेड समारोह व देश सेवा को समर्पित शपथ लेने के पश्चात बातचीत कर र
ही थी। उनका कहना है कि  यदि कोई भी बेटी दृड संकल्प व प्रेरणा पाकर लक्ष्य निर्धारित करती है तो अवश्य ही सपनों के करीब पहुंचती है। ऊषा का कहना है कि हालाकिं पैतृक गांव उनका बहुझौलरी है लेकिन वे शुरू से ही गुडगांव के अशोका विहार में  अपने माता-पिusha-2-aता के साथ रहती है। उनके पिता विजय कुमार भी सीआरपीएफ 154 बटालियन में उपनिरक्षक के पद पर हैं।  उनके अलावा दादा-ताऊ व चचेरे भाई भी सीआरपीएफ में अपनी सेवाएं दे चुकें है। वही उनकी माता रतन देवी ने गृहणी होने के बावजूद उन्हे यहां तक बढाने में एक मित्र की भूमिका की तरह साथ दिया है। गरीबी के दौर के बावजुद पिता ने उन्हे हर सुविधा उपब्लबध करवाई। ऊषाकिरण का कहना है कि हरियाणा प्रदेश में लिंगानुपात के बिगडे तालमेल से वह बेहद दुखी है। जब अशोका विहार से पढाई करने स्कूल व कॉलेज में जाती थी तो अनेकों ताने सुन-सुन कर वह बहरी होने की कगार पर पहुंच गई थी लेकिन निश्चय दृढ था। ऊषा का कहना है कि उनका लक्ष्य आईपीएस बनना है। यदि केंद्र सरकार पैरामिल्टरी ऑफिसर को यूपीएससी में परीक्षा देने पर स्वीकृति प्रदान करती है तो वह हर हाल में हिस्सा लेंगी। क्योंकि फिलहाल केंद्र सरकार के पास फाइल विचारधिन है। उन्होनें बताया कि राजस्थान प्रशासनिक सेवा कि प्री को भी पार कर चुकी थी लेकिन 2014 में सरकार के बदलते ही परिणाम को रद्द कर दिया था। वहीं वैज्ञानिक परीक्षा को भी उन्होनें पास किया था लेकिन इसमे खुद की रूची नहीं थी।

यूनिवर्सिटी टॉपर रही हैं ऊषा

बचपन से ऊषाकिरण एक नए जुनुन व जज्बे के साथ पलीबढी है। बीएससी प्रथम में यूनिवर्सिटी टॉपर, द्वितिय में कॉलेज टॉपर तक रहीं है। इसके अलावा स्कूल स्तर पर एथलेटिक्सि में नेशनल तक पहुंची और ब्रंाज भी हासिल किया।

Suvash Chandra Choudhary

Editor-in-Chief

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