चण्डीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज किसी का नाम लिए बिना कहा कि सतलुज यमुना लिंक नहर को फावड़ा और बेलचे के साथ चालू नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय में हैं और केवल उसका निर्णय ही इस नहर को चालू करवाएगा।
मुख्यमंत्री, जो आज यहां चण्डीगढ़ प्रैस क्लब में मीट द प्रैस कार्यक्रम में पत्रकारों के प्रश्रों का जवाब दे रहे थे, से एसवाईएल के मुद्दे पर टिप्पणी करने को कहा गया था, क्योंकि उनका ध्यान सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व निर्णय की ओर आकर्षित किया गया था कि एसवाईएल नहर का निर्माण केन्द्रीय एजेंसी द्वारा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति संदर्भ का मुद्दा गत 12 वर्षों से लम्बित है, जोकि बहुत ही आश्चर्यजनक है। ऐसा प्रतीत होता है कि पूर्व सरकारों ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कुछ नहीं किया। इसकी तुलना में वर्तमान सरकार ने कार्यभार सम्भालते ही सर्वोच्च न्यायालय में मामले की पैरवी की और पंजाब समझौते निष्कासन अधिनियम, 2004 निरस्त हुआ। अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में है।
श्री मनोहर लाल ने कहा कि उनके नेतृत्व मेें सभी राजनैतिक पार्टियों का एक शिष्टमण्डल पहले ही भारत के राष्ट्रपति को एसवाईएल नहर को शीघ्रातिशीघ्र चालू करवाने का आग्रह कर चुका है। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री से मुलाकात करने के लिए उन्हें लिखित आग्रह भी भेजा गया है। उन्होंने कहा कि अब सर्वोच्च न्यायालय में मामले की 29 जनवरी को सुनवाई होगी और आशा है कि निर्णय उनके पक्ष में होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा चुनावों की घोषणा पहले ही हो चुकी है, इसलिए विपक्षी पार्टियां अपने निहित स्वार्थों के लिए इस मुद्दे को राजनैतिक रंग देने का प्रयास कर रही हैं, जबकि यह राजनीतिक मुद्दा नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही हरियाणा के पक्ष में अपना निर्णय दे चुका है। विपक्षी नेताओं द्वारा की जा रही ब्यानबाजी इस मुद्दे को जटिल बना देंगी। यह उचित समय है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा की जाए, जिसके हरियाणा के पक्ष में होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी कानून को अपने हाथों मेें नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो यह कह रहे हैं कि वे 23 फरवरी को नहर की खुदाई का काम शुरू कर देंगे, यह बहुत ही हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि एसवाईएल नहर को फावड़ा और बेलचे से चालू नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसी कार्यवाही केवल तनाव उत्पन्न करेगी।
उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून को अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए। पंजाब में नई सरकार 11 मार्च तक बन जाएगी और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को केवल नई सरकार द्वारा ही क्रियान्वित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसलिए हमें उत्तेजित नहीं होना चाहिए।
रेणुका, किशाऊ और लखवार ब्यासी बांध के निर्माण के बारे पूछे गये प्रश्र के जवाब में उन्होंने कहा कि वे लखवार ब्यासी बांध के स्थल पर गये हैं और राष्ट्रीय परियोजनाएं होने के कारण उन्होंने केन्द्र सरकार से इन्हें शीघ्रातिशीघ्र पूरा करवाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इन तीन बांधों के निर्माण केे फलस्वरूप हरियाणा को अपने हिस्से के पानी की आपूर्ति होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य को यमुना नहर से केवल 4000 से 5000 क्यूसिक पानी ही मिल रहा है, जबकि लगभग 20,000 क्यूसिक पानी हरियाणा के हिस्से का है।
हांसी बूटाना कैनाल के अन्य मुद्दे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में इसकी अंतिम सुनवाई अप्रैल मास में होगी।
पूर्व सरकारों ने एस वाई एल मुद्दे को लटकाया : मनोहर लाल
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