गुरुग्राम जिला में भूजलस्तर की बढ़ोतरी के लिए शोध करेगी अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी

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-गुरुजल सोसाइटी के सहयोग से पांच साल में 5 मीटर भूजलस्तर बढ़ाने का है लक्ष्य

गुरुग्राम, 26 सितंबर। गुरुग्राम जिला में भूजलस्तर को बढ़ाने व जल संचयन के लिए निरन्तर प्रयासरत गुरुजल सोसाइटी को अब अमेरिका स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी का सहयोग मिलने जा रहा है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी जिला प्रशासन के मार्गदर्शन व गुरुजल सोसाइटी की सहयोगी बनकर प्रमुख बिंदुओं पर शोध कर गुरुग्राम जिला में आगामी पांच वर्षों में जिला के भूजलस्तर को 5 मीटर तक कैसे बढ़ाया जाए इस पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

जिला उपायुक्त डॉ यश गर्ग ने बताया कि गुरुग्राम जिला का गिरता भूजलस्तर चिंता का विषय है। इसमें बढ़ोतरी के लिए गुरुजल सोसाइटी जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में निरंतर कार्य कर रही है। सोसाइटी द्वारा जिला के कुछ चिन्हित स्थानों पर जल संचयन के लिए किए गए कारगर उपायों में सफलता भी प्राप्त हुई है।

उन्होंने कहा कि इस कार्य को जिला में व्यापक स्तर पर करने व सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कार्य करने के लिए विभिन्न संस्थाओं का सहयोग भी लिया जा रहा है। इसी कड़ी में अमेरिका स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सहयोग से गुरुग्राम जिला में भूजलस्तर को पांच वर्षों में पांच मीटर तक बढ़ाने के लिए शोध किया जाएगा।

डॉ गर्ग ने कहा कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी में जल संचयन से संबंधित विषयों के लिए एक पूरा पाठ्यक्रम है। जिसके तहत इस कोर्स के विद्यार्थी विभिन्न देशों में चिन्हित स्थानों पर जल संचयन के लिए किए गए मौजूदा उपायों की समीक्षा कर, उनकी बेहतरी के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत करते हैं।

गुरुजल सोसाइटी के कार्यों का अध्ययन कर, शोध करेंगे विद्यार्थी :

गुरुजल सोसाइटी के सचिव व जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी नरेंद्र सारवान ने बताया कि गुरुजल सोसाइटी द्वारा जल संचयन के लिए जारी सभी परियोजनाओं का डाटा कोलंबिया यूनिवर्सिटी को उपलब्ध करा दिया गया है।

यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी सोसाइटी द्वारा उपलब्ध डाटा का अध्ययन कर जिला गुरुग्राम का दौरा करेंगे। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी जिला गुरुग्राम में सोसाइटी द्वारा जल संचयन के लिए कराए गए कार्यों की समीक्षा व विभिन्न बिंदुओं पर शोध कर उनमें सुधार की गुंजाइश के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत करेंगे।

श्री सारवान ने कहा कि इस दौरान यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी इस विषय पर भी शोध करेंगे कि हम अरावली की हरियाली को कैसे बरकरार रख सकते हैं।

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