हरेरा गुरूग्राम के गठन से रीयल एस्टेट में ग्रोथ : डॉ खंडेलवाल

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सुभाष चन्द्र चौधरी

गुरुग्राम 5 फरवरी।  हरियाणा रीयल अस्टेट रेगुलेटरी एथोरिटी (हरेरा) गुरूग्राम के चेयरमैन डा. के के खंडेलवाल ने कहा कि हरेरा गुरूग्राम के गठन से इस क्षेत्र में रीयल एस्टेट में ग्रोथ हुई है। रीयल एस्टेट में नए उपभोक्ताओं के रूझान बढे हैं. हरियाणा राज्य के इस वृहत व्यवसाय में पारदर्शिता आने से वर्ष 2019 में एनसीआर विशेषकर गुरूग्राम में रीयल एस्टेट में साकारात्मक बदलाव देखने को मिलने लगे हैं। उनके अनुसार रियल एस्टेट रेगुलेशन कानून के आने से दो साल में कई नए प्रोजैक्ट शुरू हुए और मार्केट में रेट भी स्थिर रहे जिसका फायदा उपभोक्ता और बिल्डर्स दोनों को मिला. उन्होंने कहा कि स्वतः संज्ञान लेते हुए 509 बिल्डरों को नोटिस जारि किये गए गए और कई पर भारी आर्थिक दंड भी लगाये गए . शिकायतकर्ताओं या आवेदकों के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाए जाने के ममाले पर उनका कहना था कि हमने अपनी समझ से जो ठीक समझा उसे पहचान के लिए अनिवार्य कर दिया अगर अदालत का फैसला आता है तो उसमें बदलाव कर दिया जायेगा.

हरेरा गुरुग्राम के दो वर्षों का कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्थानीय पी डब्ल्यू डी गेस्ट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में हरेरा की ओर से अब तक दिए गए निर्णयों और अथॉरिटी की उपलब्धियों की विस्तार से चर्चा करते हुए डा. के के खण्डेलवाल ने बताया कि हरियाणा रीयल अस्टेट रेगुलेटरी एथोरिटी, गुरूग्राम को पिछले दो वर्षो में 9496 शिकायतें प्राप्त हुई. इनमें से 6598 का निपटारा कर दिया गया। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें से काफी शिकायतें ऐसी भी हैं जो प्रोसेसिंग में आईं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई. ऐसे में सुनवाई के लिए 4598 शिकायतें स्वीकृत हुई जिनमें से 2096 शिकायतें अब तक निस्तारित की जा चुकी है. उन्होंने कहा कि अब तक आई कुल शिकायतों में से 70% कुल निस्तारण है जबकि वास्तविक शिकायतों में 47% मामले में निर्णय दिए जा चुके हैं.

डा. खण्डेलवाल ने कहा कि हरेरा गुरूग्राम के दायरे में लगभग एक लाख हैक्टेयर क्षेत्र आता है और अब तक इस एथोरिटी में 400 प्रोजेक्ट रजिस्टर हुए हैं. इनमें लगभग ढाई लाख आवासीय ईकाइयां हरेरा की निगरानी में हैं। इनमें से लगभग 60 हजार ईकाइयां अफोरडेबल हाउसिंग परियोजनाओं की हैं। उन्होंने कहा कि हरेरा के गठन के बाद बिल्डर की मनमानी का समय चला गया है। अब यदि बिल्डर को अपनी लेआउट प्लान में कुछ बदलाव भी करना है तो कम से कम दो तिहाई सदस्यों की सहमति होनी चाहिए तथा हरेरा गुरूग्राम की भी अप्रुवल ली जानी अति आवश्यक है। जाहिर है उपभोक्ता का हित अब सुरक्षित है.

एक सवाल के जवाब में डा. खण्डेलवाल ने बताया कि स्वतः संज्ञान लेते हुए बिल्डिंग निर्माण या उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी करने वाले या नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों को हरेरा द्वारा लगभग 400करोड़ रूप्ए की जुर्माना राशि के 509 नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे कोताही करने वाले बिल्डरों पर 40 करोड़ रूप्ए का जुर्माना किया गया है. अन्य 58 बिल्डरों को कारण बताओं नोटिस भी जारी किए गए हैं। यही नहीं, अथॉरिटी द्वारा अवैध कालोनी काटकर प्लाट तथा फलैट बेचने वाले 7 बिल्डरों की जांच भी करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जिन बिल्डरों पर जुर्माना लगाया जाता है उनकी फोटो हरेरा गुरूग्राम की वैबसाईट पर अपलोड की जाती है ताकि लोगों को इसके बारे में पता चल सके।

जब उनसे आवेदक या शिकायतकर्ता के लिए आधार कार्ड अनिवार्य करने सम्बन्धी सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हरियाणा में 99 प्रतिशत लोगों के आधार कार्ड बन गए हैं. पहचान के लिए हमने इसे अनिवार्य किया है. आधार कार्ड सम्बन्धी सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन पर उनका कहना था कि अगर किसी के पास आधार कार्ड नहीं  है तो उसे छोड़ भी देते हैं. पासपोर्ट भी पहचान के लिए दिए जा सकते हैं. लेकिन उनके द्वारा आधार कार्ड को वैकल्पिक नहीं अनिवार्य रखा गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने विवेक के आधार पर जो ठीक समझा वह किया. वे स्वयं को फाइनल अथोरिटी नहीं मानते और अगर इस सम्बन्ध में अदालत का कोई निर्णय आएगा तो उसे ठीक कर देंगे. उनका कहना था कि अदालतों में मामले आते हैं,निर्णय होते हैं और अपील भी होती है. अगर अंतिम निर्णय आयेगा तो उसमें सुधार कर दिया जायेगा .

एक अन्य सवाल के जवाब में डा. खण्डेलवाल ने कहा कि हरेरा गुरूग्राम ने देश में अपनी तरह के पहले फैसले में हरेरा गठन से 3 साल पहले भी पोजेशन देने वाले बिल्डरों को अपने दायरे में लेकर उन्हें नोटिस जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि इन दो वर्षो में हरेरा गुरूग्राम पहले से चल रहे तथा अधूरे पड़े लगभग 250 हाउसिंग प्रोजेक्टो को टैªक पर लाने में सफल रहा है। अब इन प्रोजेक्टों पर निर्माण कार्य पुनः शुरू हुआ है जो हरेरा की देखरेख में किया जा रहा है और उन्हें आशा है कि ये प्रोजेक्ट पूरे होंगे जिससे फलैट आवंटियों को बड़ी राहत मिलेगी।

संवाददाता सम्मेलन में डा. खण्डेलवाल ने यह भी कहा कि हरेरा गुरूग्राम के गठन से इस क्षेत्र में रीयल अस्टेट में ग्रोथ हुई है। उन्होंने रीयल अस्टेट के नए रूझानों का भी विस्तार से ब्यौरा दिया और बताया कि वर्ष 2019 में एनसीआर विशेषकर गुरूग्राम में रीयल अस्टेट में साकारात्मक बदलाव देखने को मिला। उन्होंने बताया कि इस दौरान रीयल अस्टेट के कई नए प्रोजैक्ट शुरू हुए और मार्केट में रेट भी स्थिर रहे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि 249 मामले ऐसे हैं जिनमें अभी तक हरेरा का फैसला लागू नहीं हुआ है और 1812 मामलों में हरेरा के आदेशों पर अमल हो चुका है। उन्होंने बताया कि एथोरिटी में अब भी 2422 मामलों पर सुनवाई चल रही है।

इस अवसर पर हरेरा गुरूग्राम के सदस्य समीर कुमार तथा एस सी कुश और सचिव प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

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