दुष्यंत का ऐलान, दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतरेगी जेजेपी, भाजपा व आप के लिये चुनौती

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सुभाष चौधरी

नई दिल्ली। जननायक जनता पार्टी भी दिल्ली विधानसभा चुनाव के मैदान में कूदेगी। यह निर्णय पार्टी के प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने दिल्ली यूनिट के नेताओं के साथ बैठक के बाद लिया। इस निर्णय की औपचारिक घोषणा करते हुए श्री चौटाला ने कहा कि उनकी पार्टी दिल्ली विधानसभा के चुनाव में मजबूती से सामने आएगी और अपने उम्मीदवार खड़े करेगी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में जननायक जनता पार्टी की दिल्ली यूनिट के नेताओं के साथ उनकी बैठक हुई है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जननायक जनता पार्टी दिल्ली विधानसभा में अपना उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि दिल्ली विधानसभा की कितनी सीटों पर पार्टी प्रत्याशी उतारेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली उनके परदादा और देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की कर्मभूमि रही है और उनके आशीर्वाद से दिल्ली में कई नेता विधायक और सांसद बनते रहे हैं। इसलिए उनकी पार्टी ने यह निर्णय लिया है कि अपने राजनीतिक आधार को और मजबूत करने की दृष्टि से विधानसभा चुनाव लड़ना आवश्यक है।

जब उनसे पूछा गया कि आप का गठबंधन हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के साथ है क्या आप दिल्ली में भी भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ेंगे, तो इस पर उनका कहना था कि इस संबंध में पार्टी के सभी नेता और उनकी पार्टी के संस्थापक एवं उनके पिता अजय चौटाला से बातचीत करने के बाद निर्णय लिया जाएगा। जाहिर है जननायक जनता पार्टी की इस घोषणा से भाजपा और आम आदमी पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली के कई ऐसे इलाके हैं जो जाट बहुल क्षेत्र हैं और इससे पूर्व उनके दादा ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व में चलने वाली इंडियन नेशनल लोकदल की ओर से भी उम्मीदवार उतारे जाते रहे हैं। कई बार उन्हें यहां सफलता भी मिली है। ऐसे में ओमप्रकाश चौटाला के आधार को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश में दुष्यंत चौटाला ने विधानसभा चुनाव में उतरने का निर्णय लिया जाना यहां के राजनीतिक मायने बदलने वाले हैं।

उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने दिल्ली यूनिट गठित की है साथ ही साथ उनकी कोशिश है कि पार्टी की स्टूडेंट यूनिट गठित कर अधिक से अधिक युवाओं को आकर्षित किया जाए। बाहरी दिल्ली में इंडियन नेशनल लोकदल का आधार रहा है। उनकी पैठ होने के संकेत हमेशा मिलते रहे हैं। उसी दृष्टि से जननायक जनता पार्टी जो अभी हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में सरकार में शामिल है दिल्ली के लोगों को अपनी पार्टी से जोड़ने में और पार्टी का जनाधार बढ़ाने की कोशिश करेंगे। उन्हें ऐसा लगता है कि हरियाणा में लंबे अरसे बाद सत्ता में आने के बाद उनके पुराने समर्थकों में एक बार फिर उनके नेतृत्व में संभावना दिखने लगी है और इसका फायदा उन्हें दिल्ली विधानसभा की चुनाव में भी मिलना संभावित लगता है।

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी जो दिल्ली में हमेशा अकेले चुनाव लड़ती रही है जे जे पी के साथ गठबंधन के लिए तैयार होगी , इस बात की संभावना कम दिखती है। पार्टी के नेतृत्व को संभव है जे जे पी का यहां पनपना स्वीकार्य नहीं होगा । लेकिन जे जे पी के नेताओं को पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान दिल्ली में हुई भाजपा की बुरी हार की दृष्टि से गठबंधन की संभावना दिख रही है। उन्हें लगता है कि भाजपा किसी भी परिस्थिति में आम आदमी पार्टी यानी अरविंद केजरीवाल को सत्ता से बाहर करने को आमादा है। इस परिस्थिति में वह किसी से भी समझौता कर दिल्ली में सत्ता में वापस आने की छटपटाहट में है । इसलिए भाजपा नेतृत्व यह नहीं चाहेगा कि कुछ प्रतिशत मत के अभाव में एक बार फिर वह सत्ता से बाहर रहे।

बीजेपी नेतृत्व को लगता है कि बाहरी दिल्ली और कुछ अलग दूसरे इलाके में जहां जाट समुदाय के वोट अधिकतम हैं उनमें वह सेंध लगाने में कामयाब होंगे। इस बात का भान भाजपा नेतृत्व को बखूबी है। इसलिए भाजपा और जेजेपी गठबंधन कुछ सीटों पर संभव है।

उधर तरफ आम आदमी पार्टी इस बार फिर चुनाव घोषित होने के बाद तक किसी भी गठबंधन की चर्चा नहीं कर रही है और ना ही कांग्रेस की ओर से ऐसा कोई इशारा आया है। लेकिन यह जरूर है कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने अब तक जितनी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं उनमें उनका निशाना हमेशा भाजपा रहा है जबकि कांग्रेस की चर्चा नहीं के बराबर की गई है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय गोयल की ओर से यह कहा जाना कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने वाला है और दोनों मिलकर दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ेगी में कुछ दम तो लगता है। अगर ऐसा हुआ तब भी भारतीय जनता पार्टी के सामने जेजेपी से गठबंधन करना राजनीतिक मजबूरी बनेगी अन्यथा उन्हें आप और कांग्रेस के संभावित गठबंधन के सामने पराजय का मुंह देखना पड़ सकता है । इस लिहाज से आने वाला 1 सप्ताह बहुत महत्वपूर्ण होगा जिसमें स्थिति स्पष्ट होगी कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव इस बार फिर सभी पार्टियां अलग-अलग अपने दम पर लड़ेगी या फिर गठबंधन की राजनीति चलेगी ।

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