अधिकारियों की मनमानी के चलते व्यापारी वर्ग फार्म ‘सी’ के लिये तरसे

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गुरुग्राम, 08 अगस्त : आबकारी एवं कराधान विभाग के उच्च अधिकारियों की मनमानी के कारण हरियाणा के व्यापारी वर्ग के लिये डिक्लरेशन फार्म ‘सी’ परेशानी का सबब बन गया है। आबकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा रोज-रोज आॅनलाईन पोर्टल पर नए-नए बदलाव करने के कारण व्यापारी वर्ग को सीएसटी डिक्लरेशन फार्म जारी कराने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तथा किसी भी व्यापारी को नए नियमों के तहत् फार्म उपलब्ध नही हो पा रहा है।
प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए गुड़गांव जिला टैक्सेशन बार के प्रधान एडवोकेट नवीन गुप्ता और मानव आवाज संस्था के संयोजक एडवोकेट अभय जैन ने बताया कि विभाग के पोर्टल पर पिछले 5 महीने से सीएसटी फार्म जारी करने में दिक्कत पेश आ रही है। इस विषय पर 30 मई 2018 को चण्डीगढ़ एक्साईज एण्ड टैक्सेशन विभाग के अतिरिक्त मुख्यसचिव संजीव कौशल के साथ गुरुग्राम व फरीदाबाद बार ने मीटिंग करके उनको सीएसटी फार्म में आ रही दिक्कतों के बारे में अवगत कराया था। श्री कौशल ने मीटिंग में मौजूद ईटीसी आशिमा बरार, एई टी सी विजय सिंह, विद्या सागर, आर बी एस तेवतिया तथा विप्रो प्रमुख से बात करने के बाद टैक्सेशन बार को यह आश्वासन दिया था कि 15 जून 2018 तक आॅफलाईन फार्म वित्त वर्ष 2015-16 से पहले के तथा 30 जून तक आॅनलाईन फार्म के सभी पोर्टल को सुचारु रुप से खोल देगें परन्तु आज तक यह सुविधा प्रदान नही की गई है, जिसके कारण व्यापारी वर्ग के लिये ‘सी’ फार्म जारी करना मुसीबत बन गया है।
फरीदाबाद जिला टैक्सेशन बार के प्रधान एस के भारद्वाज ने कहा कि अधिकारी अनावश्यक डिमान्ड निकालकर व्यापारी और अधिवक्ताओं को अपने निजी स्वार्थ के लिये परेशान कर रहे है। व्यापारियों की जायज डिमान्ड्स को अधिकारियों द्वारा रिजेक्ट किया जा रहा है और बैंक खाते फ्रीज किये जा रहे है। उन्होनें आगे कहा कि सरकार को चाहिये कि आनलाईन फार्म के साथ मेन्युल फार्म भी जारी करे ताकि व्यापारियों को आसानी हो सके।
वरिष्ठ एडवाकेट ज्ञान प्रकाश ने बताया कि सरकार ने व्यापारियों का ख्याल रखे बिना सेक्शन 8 में संशोधन करके व्यापारियों के लिये समस्या खड¬ी कर दी है। सरकार के आॅनलाईन पोर्टल की कमियों के कारण तथा अधिकारियों की मनमानी के चलते हरियाणा वैट एक्ट के अन्तर्गत फाईल किये हुये वैट – आरटू जो कि वार्षिक रिर्टन के तौर पर जानी जाती है, उसको सरकार के अधिकारी आॅनलाईन जमा की गई रिर्टन के साथ मिलान नही कर रहे है। इसके कारण व्यापारियों की खरीद फरौत में भारी अन्तर आ रहा है और उनकी डिमान्डे निकल रही है।
इस अवसर पर गुरुग्राम इण्डस्ट्रियल एसोसिऐशन के महासचिव दीपक मैनी ने सरकार से डिमाण्ड की है कि सरकार पुराने ‘सी’ फार्म पर छूट देकर छोटे व्यापारियों को तंग करने की अपेक्षा सहूलियत प्रदान करे।
एडवोकेट नवीन गुप्ता ने बताया कि संजीव कौशल ने 8 जनवरी को ‘सी’ फार्म वेरिफिकेशन का जो विभागीय निर्देश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि कोई ‘सी’ फार्म बिना वेरिफिकेशन के मंजूर न किया जाये, वह निर्देश ही अवैध है। परन्तु विभाग के अधिकारियों ने वित्त वर्ष 2014-15 के केस जो कि 31 मार्च 2018 को खत्म हुये है, उन केसों में आये हुये फार्मो की वेरिफिकेशन आज तक नही भेजी है। उल्टा व्यापारियों से डिमांड की वसूली का नोटिस भेजा जा रहा है, जबकि ‘सी’ फार्म वेरिफिकेशन कराना आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी है न कि व्यापारियों की।
सरकार के आबकारी एवं कराधान विभाग के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु को गुड़गांव टैक्सेशन बार मिलने के लिये कई बार ई-मेल कर चुकी है लेकिन वित्तमंत्री बार को मिलने के लिये समय नही दे रहे है। इसके कारण सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगता है कि इतनी भारी दिक्कतों के बावजूद भी वित्तमंत्री व्यापारी वर्ग के लिये कुछ नही कर रहे है।
पंजाब एण्ड हरियाणा उच्च न्यायालय की बार कौंसिल के सदस्य परेश यादव ने कहा कि अगर हरियाणा सरकार ने तुरन्त प्राथमिकता पर ‘सी’ फार्म और वैट की समस्या को हल नही किया तो मजबूरीवश सरकार के खिलाफ उच्च न्यायालय में केस दर्ज किया जायेगा।
इस अवसर पर गुड़गांव जिला टैक्सेशन बार ऐसोसिएशन के उप-प्रधान वी के चैहान, सचिव अधिवक्ता जग भूषण गुप्ता, सहसचिव व कोषाध्यक्ष अधिवक्ता धर्मवीर वर्मा एवं अधिवक्ता के के बम्ब, बिजैन्द्र गर्ग, संजीव जैन, आर के जैन, राकेश जैन, पी सी सिंगल, संजीव शर्मा, दीपक कटारिया, रमेश बामल, नवीन सिंगला, दिनेश गुप्ता, नरेश डाबर और फरीदाबाद बार के महासचिव राजेन्द्र शर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान संदीप सेठी, सह-सचिव आर एस वर्मा, सुरेन्द्र शर्मा, गांव झाड़सा से मंजीत जेलदार, गुरुग्राम इण्डस्ट्रियल एसोसिऐशन कोषाध्यक्ष विनोद गुप्ता आदि वरिष्ठ गणमान्य सदस्य उपस्थित हुये।

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