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यूनुस अलवी
मेवात:भले ही जिला प्रशासन मेवात जिला को शौचमुक्त करने के लिये अभियान चला रहा है। यहां तक कि अब जिला प्रशासन ने बिना शौचालय बनाये गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को राशन ना देने का हुकम डीपू होल्डरों पर लागू कर दिया हो लेकिन आज मेवात में सौ से अधिक र्इंट भटटों पर रहने वाले हजारों लोग खुले में शौच के लिये जा रहे हैं। जिससे मेवात को शौचमुक्त होने का अभियान एक बेमानी साबित हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मेवात जिला के पुन्हाना, नूंह, तावडू, फिरोजपुर झिरका और नगीना खंडों में करीब 94 ईंट भट्टे हैं। इन भट्टों पर मेवात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, बिहार और असम आदि इलाकों से करीब 20 हजार से अधिक लोग ईंट थेपने, ईंट ढोने, निकासी करने पर काम करते हैं। मेवात में बने ईंट भट्टो पर काम करने वालों के लिये ईंट भट्टे मालिकों ने उनके कोई शौचालय नहीं बनाऐ हैं जिसकी वजह से मजदूरों को मजबूर होकर जंगल और खेतों में ही शौच के लिये जाना पडता है। शौचमुक्त अभियान से जुडे लोगों का कहना है कि जो लोग जंगल में शौच करते हैं, शौच पर बेठने वाली मक्खी आदि कीडों से फैलने वाली बिमारी को लोग अपने घरों तक लाते हैं जिसकी वजह से लोग बिमार होते हैं।
मकसूद अहमद शिकरावा और मुबीन अहमद तेडिया का कहना है कि भले ही प्रशासन पूरी मेवात को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) बना दे लेकिन जब तक भट्टों पर खुले में शौच करने वालों के लिये शौचालय नहीं बन जाते तब-तक मेवात किसी भी कीमत पर ओडीएफ नहीं बन सकता है। उनका कहना है कि मेवात जिला में करीब 94 र्इंट भट्टे हैं। इन र्इंट भट्टो पर करीब 20 हजार से ज्यादा लोग पर मजदूरी करते हैं। उनके पास शौचालय ना होने कि वजह से वे खुले मेें शौच करते हैं। उनका कहना है कि अपने खेतों में काम करने के लिये जाने वाले लोग उस गंदगी को ही गांव तक लाते हैं। जिसकी वजह से खुले में शौचमुक्त करने के अभियान का पलीता लग रहा है।
गांव लाहबास निवासी फतेह मोहम्मद, अनवर का कहना है कि उनके खेतों के पास दो ईंट भट्टे हैं यहां मजदूरी करने वाले लोग हर रोज उनके खेतों में शौच करते हैं। जिससे उनको खेतों कि सिंचाई करने और हरा चारा लेने में भारी परेशानी होती है। उनका कहना है कि प्रशासन तो गावों को शौचमुक्त बनाने पर जोर दे रहा है लेकिन भट्टों पर मजदूरों कि गंदगी उनके गांव तक पहुंंच रही है।
ब्लोक समिति नगीना के पूर्व चैयरमेन इकबाल का कहना है कि मेवात के डीसी साहब फरमान जारी करते हैं कि जो लोग अपने घरों में शौचालय नहीं बनाते उनको बीपीएफ का राशन ना दिया जाये लेकिन प्रशासन मेवात के सैंकडों गावों में चल रहे भट्टों पर शौचालय बनाने के लिये कुछ नहीं कर रहे हैं जबकी सबसे ज्यादा गंदगी ईंट भटटों पर काम करने वाले मजदूरों से ही गांव तक पहुंचती है।

