सेक्टर 109 में एक साथ छह फ्लोर गिरने वाले चिंटल पैराडिसो के डी टावर फ्लैट्स को ढहाने के आदेश

Font Size

-मैजिस्ट्रेट जाँच की रिपोर्ट के आधार पर डीसी ने जारी किए डी टावर को पूर्णतः बंद कर गिराने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश

– आदेश जारी होने के 60 दिनों के भीतर डी-टावर अलाटियों, फ़्लैट मालिकों के क्लेम सेटल करने के बिल्डर को दिए निर्देश

– डीटीपी इंफोर्समेंट को बनाया गया नोडल अधिकारी

सुभाष चौधरी /The Public World 

गुरुग्राम 9 नवंबर। जिलाधीश एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के चेयरमैन निशांत कुमार यादव ने दंड प्रक्रिया अधिनियम 1973 की धारा 144 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 35 में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए मेसर्स चिंटल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को उसके सेक्टर 109 स्थित चिंटल पैराडिसो के डी -टावर को स्थाई तौर पर बंद करते हुए टावर को तुरंत प्रभाव से धराशाही करने की प्रक्रिया आरंभ करने के आदेश दिए हैं। उक्त बहुमंजिली इमारत को ध्वस्त करने का यह निर्णय आई आई टी दिल्ली एक्सपर्ट कमिटी की रिपोर्ट और मजिस्ट्रियल रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है. दोनों ही रिपोर्ट में इस बिल्डिंग को पुरी तरह असुरक्षित और सारे नियमों को दरकिनार कर बनाए जाने की पुष्टि की गई है. गत फ़रवरी माह में इसके एक साथ छह फ्लोर गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे. इस घटना की जांच हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विधानसभा में सीबी आई जांच करवाने का ऐलान किया था जबकि सम्बंधित बिल्डर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया गया था .

जिलाधीश द्वारा जारी आदेशों में मेसर्स चिंटल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली को सेक्टर-109 स्थित चिंटल पैराडिसो हाउसिंग कंपलेक्स के फ्लैट मालिको/ अलॉटियों को आदेशों के जारी होने के 60 दिनों के भीतर उनकी सारी देनदारी व लायबिलिटी आदि के मामलों का निपटारा करने के निर्देश भी दिए हुए है। इस कार्य को लेकर डीटीपी इंफोर्समेंट को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है जिनकी देखरेख में यह कार्य किया जाएगा। इन आदेशों की अवहेलना करने वालों को भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा -188 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 , 60 व अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत दंडित किया जाएगा। ये आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि गत 5 नंवबर को गुरूग्राम के उपायुक्त निशांत कुुमार यादव ने चिंटल पैराडिसो के टावर-डी में हुए हादसे की आईआईटी दिल्ली की टीम की रिपोर्ट का खुलासा करते हुए बताया था कि टीम ने इस टावर के निर्माण में ढांचागत कमियां पाई है. उन्होंने बताया था कि  इसकी मरम्मत तकनीकी और आर्थिक आधार पर संभव नहीं है. इसलिए एक्सपर्ट कमिटी ने इस टावर को पूर्ण रूप से बंद कर गिराने की अनुशंसा की है। उपायुक्त ने बताया यह भी कहा था कि जिला में अलग-अलग 16 सोसायटियों से स्ट्रक्चरल सेफ्टी संबंधी शिकायतों की रिपोर्ट भी 15 नवंबर तक आ जाएगी जिसके बाद ही उनके बारे में निर्णय लिया जाएगा। अब उपायुक्त की ओर से यह जानकारी दी गई है कि उनकी ओर से नियुक्त मजिस्ट्रेटी जांच की रिपोर्ट भी आ गई है और उक्त बहुमंजिली इमारत को अब द्व्स्त करने का निर्णय लिया गया है.

सेक्टर 109 में एक साथ छह फ्लोर गिरने वाले चिंटल पैराडिसो के डी टावर फ्लैट्स को ढहाने के आदेश 2– डी टावर में मिली ढांचागत कमियां जैसे-निम्न गुणवता की निर्माण सामग्री और पानी में क्लोरीन की वजह से जंग लगे सरियों को पेंट करके छुपाने का किया गया प्रयास
– टावर में फ़्लैट में रेट्रोफिटिंग कार्य में भी बरती गई लापरवाही, संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी होगी तय 

उपायुक्त ने शनिवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया था कि 10 फरवरी को चिंटल पैराडिसों के टावर डी में हुए हादसे में दो व्यक्तियों की जान चली गई थी उसके बाद आईआईटी दिल्ली की टीम को इस टावर की स्ट्रक्चरल सेफ्टी की जांच सौंपी गई थी। इसके अलावा, अतिरिक्त उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी।

डी सी ने खुलासा किया था कि आईआईटी दिल्ली की जांच रिपोर्ट आ चुकी है जिसमें पाया गया है कि चिंटल पैराडिसों के डी-टावर में स्ट्रक्चरल कमियां थी। बिल्डिंग के निर्माण में निम्न स्तर के कॉन्क्रीट का इस्तेमाल किया गया जिसकी तकनीकी और आर्थिक आधार पर मरम्मत की जानी संभव नहीं है। कमेटी ने पाया कि बिल्डिंग में स्टील वर्क तथा रिइंफोर्समेंट वर्क में जंग को छिपाने के लिए पेंट किया गया था। इसके अलावा पेंट की क्रियाविधि भी ठीक नहीं थी। इसके साथ ही बिल्डिंग के छठीं मंजिल पर एक फलैट में रेट्रोफिटिंग का कार्य भी बिना निगरानी और निर्धारित मानदंडो के अनुसार नहीं किया जा रहा था। उन्होंने पत्रकारों को यह भी बताया था कि इसके लिए चिंटल पैराडिसों कपंनी तथा मनीष स्विच गियर प्राइवेट लिमिटेड की जिम्मेदारी तय की गई है। आईआईटी दिल्ली की टीम ने यह भी सिफारिश की है कि डी- टावर को बंद कर इसे गिराने की प्रक्रिया शुरू की जाए।  उपायुक्त का कहना था कि अतिरिक्त उपायुक्त श्री मीणा की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक कमेटी की विस्तृत रिपोर्ट भी सोमवार तक आने की आशा है। उसके बाद जिला प्रशासन इस मामले में अगली कार्यवाही करेगा। अब उक्त रिपोर्ट भी आ गई है जिसके आधार पर उक्त टावर को गिराने का निर्णय लिया गया है.

– डैव्लपर को डी टावर के अलॉटियों के साथ फलैट के क्लेम करने होंगे सेटल , अलॉटियों के सामने होंगे तीन विकल्प : उपायुक्त

पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने बताया था कि आईआईटी दिल्ली की जांच रिपोर्ट के आधार पर डैव्लपर को डी-टावर के अलॉटियों के साथ क्लेम सेटल करने के लिए आदेश दिए जाएंगे। इसमें अलॉटियों के सामने तीन विकल्प होंगे। बिल्डर अथवा डैव्लपर अपने स्तर पर डी टावर के अलॉटियों के साथ तालमेल स्थापित करते हुए अपने स्तर पर निर्धारित समयावधि में क्लेम सेटल करेगा और इसकी जानकारी लिखित में जिला प्रशासन के पास देगा। एक अन्य विकल्प के तहत अलॉटियों की सुविधा के लिए दो स्वतंत्र आंकलनकर्ता अर्थात् इंडिपेंडेंट इवेलयुएटर लगाए जाएंगे जो फलैटों की मौजूदा कीमत आदि का आंकलन करेंगे और अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके बाद डैव्लपर के लिए इवेलुएटर द्वारा तय की गई कीमत को स्वीकार करना अनिवार्य होगा और वह राशि अलॉटी को दी जाएगी। यदि इसके बावजूद भी अलॉटी संतुष्ट नही होता है तो वह न्यायालय में जाकर राहत ले सकता है।

-चिंटल के टावर ई और एफ में भी चल रहा है स्ट्रक्चर संबंधी सर्वे का कार्य, जल्द आएगी रिपोर्ट

इसी प्रकार , इसी सोसायटी के टावर ‘ई‘ और ‘एफ‘ में भी स्ट्रक्चरल ऑडिट की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इसकी रिपोर्ट आएगी ।तब तक इन दोनो टावरों को खाली करवाकर बिल्डर से इनके फलैट मालिकों के साथ रेंट एग्रीमेंट करने के लिए कहा जाएगा। इन दोनो टावरों में निर्माण संबंधी नमूने एकत्रित किए जा चुके हैं। टावर ई में 28 तथा टावर एफ में 22 फलैट बने हुए हैं। फलैट मालिकों के शिफट करने से लेकर दूसरे स्थान पर दिए जाने वाले किराए का खर्चा बिल्डर द्वारा वहन किया जाएगा।

– जिला में 70 सोसाटियों से भी ढांचागत मिली शिकायते, चयनित 16 सोसायटियों की रिपोर्ट 15 नवंबर तक आएगी सामनेे : उपायुक्त

इसके अलावा, उपायुक्त ने बताया  था कि जिला में स्ट्रक्चरल ऑडिट संबंधी 70 अलग-2 सोसायटियों से शिकायतें प्राप्त हुई जिनमें से प्रथम चरण में 16 सोसायटियों को स्ट्रक्चरल ऑडिट के लिए चुना गया। इन सोसायटियों में स्ट्रक्चरल ऑडिट के लिए एजेंसी के अलावा, बिल्डर के प्रतिनिधि व आरडब्ल्यूए के सदस्यों को भी शामिल किया गया है ताकि निष्पक्षता से जांच की जा सके। इन 16 सोसायटियों की रिपोर्ट 15 नवंबर तक आ जाएगी। इन सोसायटियों में स्ट्रक्चरल ऑडिट के लिए अलग-2 एजेंसियों को सूचीबद्ध करते हुए जिम्मेदारी सौंपी गई जो अपनी रिपोर्ट में बताएंगी कि ये सोसायटी रहने के लिहाज से सुरक्षित है अथवा नही। इसके अलावा, इनमें से किस सोसायटी में मरम्मत आदि करवाते हुए इन्हें रहने के लिहाज से सुरक्षित बनाया जा सकता है।

 

Suvash Chandra Choudhary

Editor-in-Chief

You cannot copy content of this page

%d bloggers like this: