पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग जरूरी : लोकसभा अध्यक्ष

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-पर्यटन राज्य मंत्री  श्रीपद येसो नाइक भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए

-पर्यटन मंत्रालयसंयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपीऔर  रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म सोसाइटी ऑफ इंडिया (आरटीएसओआईने पर्यटन क्षेत्र में ‘स्थिरता पहल‘ को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने और सहयोग करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

 नई दिल्ली : लोकसभा अध्यक्ष, ओम बिड़ला ने आज विश्व पर्यटन दिवस, 2021 को मनाने के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम “समावेशी विकास के लिए पर्यटन” में मुख्य भाषण दिया। केंद्रीय पर्यटन, संस्कृति और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी और पर्यटन राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस अवसर पर विश्व व्यापार संगठन के महासचिव, श्री जोराब पोलोलिकशविली का एक वीडियो संदेश प्रदर्शित किया गया। पर्यटन सचिव श्री अरविंद सिंह, पर्यटन महानिदेशक, श्री कमला वर्धन राव, यूएनईपी के प्रमुख, अतुल बगई, पर्यटन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और यात्रा एवं आतिथ्य उद्योग के प्रतिनिधियों ने संबोधित भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।

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इस अवसर पर अपने सम्बोधन में श्री बिरला ने कहा कि कोविड के बाद भारत में पर्यटन क्षेत्र तेजी से अपने पुराने रूप में वापस लौट रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिबद्ध और सामूहिक प्रयास से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारत दुनिया में सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थल के रूप में उभरे। श्री बिरला ने कहा, “जिस तरह से हमने सामूहिक रूप से कोविड-19 को हराया, हमारी सामूहिक शक्ति और समन्वित प्रयास हमारी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।” उन्होंने कहा कि पर्यटन, अर्थव्यवस्था और रोजगार के विकास इंजनों में से एक है, इसलिए, इस क्षेत्र के और विकास के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

भारत में पर्यटन की विशाल संभावनाओं पर श्री बिरला ने कहा कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भौगोलिक विविधता दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। भारत में पर्यावरण, अध्यात्म, शिक्षा और चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। भारत की घरेलू और विदेश नीति ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक सक्षम वातावरण प्रदान किया है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हमारा लक्ष्य, भारत को पर्यटन स्थल के रुप में पहले स्थान पर लाना होना चाहिए।

इस संबंध में, पर्यटन के अनुकूल स्थलों को विकसित करने के लिए अधिक से अधिक प्रयास किए जाने चाहिए। श्री बिरला ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों के उपयोग पर जोर दिया।

पर्यटन को बढ़ावा देने की कार्य योजना पर बोलते हुए, श्री बिरला ने सुझाव दिया कि ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वाकांक्षी और सतत प्रयासों की आवश्यकता है। यह हस्तशिल्प और अन्य ग्रामीण उत्पादों की मांग पैदा करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि देश में जो पर्यटन स्थल अब भी रहस्य हैं, उन्हें भारत के पर्यटन मानचित्र पर शामिल किया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोग इन पर्यटन स्थलों के बारे में जान सकें।

इस अवसर पर, श्री बिरला ने निधि 2.0 (आतिथ्य उद्योग का राष्ट्रीय एकीकृत डेटाबेस) का शुभारंभ किया और “भारत पर्यटन सांख्यिकी: 2021- एक नज़र में” जारी किया। श्री बिरला ने आशा व्यक्त की कि निधि 2.0 डेटा बेस, इस प्रयास में एक मील का पत्थर साबित होगा। पर्यटन मंत्रालय, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और द रिस्पांसिबल टूरिज्म सोसाइटी ऑफ इंडिया (आरटीएसओआई) ने पर्यटन क्षेत्र में ‘स्थिरता पहल’ को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने और सहयोग करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस अवसर पर समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया गया ।

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केंद्रीय पर्यटन मंत्री,  जी. किशन रेड्डी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “पर्यटन क्षेत्र उन कुछ क्षेत्रों में से एक है, जिन्हें इस महामारी के कारण बहुत नुकसान हुआ है और पर्यटन की जल्द बहाली इस क्षेत्र के फायदे और विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, “भारत में नागरिकों को पहले ही 85 करोड़ से अधिक कोविड टीके लगाए जा चुके हैं। तेज़ी से जारी टीकाकरण रणनीति के साथ, हम अब नए साल की शुरुआत में देश को पर्यटन के लिए फिर से खोलने के काफी करीब पहुंच गए हैं।श्री रेड्डी ने कहा कि टीकाकरण पर लगातार ध्यान देने के लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभारी हूं।

मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए श्री रेड्डी ने कहा, “आतिथ्य उद्योग के लिए राष्ट्रीय एकीकृत डेटाबेस (निधि) देश में आवास इकाइयों को पंजीकृत करने के लिए मंत्रालय का पोर्टल है और अब तक 44,024 इकाइयों को पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है। यह पोर्टल 08.06.2020 को शुरू किया गया था।”

श्री रेड्डी ने कहा, “प्रधानमंत्री का विजन रोजगार सृजन और समावेशी विकास के लिए पर्यटन को एक उपकरण के रूप में उपयोग करने का रहा है”। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक क्षेत्रों में रोजगार सृजन की सबसे अधिक संभावना है। इससे पहले दिन में, उन्होंने एक प्रमुख समाचार दैनिक में एक लेख लिखा था जिसमें रोजगार सृजन और समावेशी विकास के लिए पर्यटन क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला गया था। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए उन्होंने यह ट्वीट किया:

केंद्रीय मंत्री ने अपने लेख में लिखा, “विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि 10 लाख रुपये के निवेश के लिए पर्यटन उद्योग 78 नौकरियां पैदा कर सकता है”। लेख में पर्यटन के केवडिया मॉडल पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने लिखा में बताया कि कैसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण ने केवडिया को दुनिया के नक्शे पर लाकर सीधे तौर पर 100 वर्ग किलोमीटर के दायरे में स्थानीय समुदायों को लाभान्वित करने और क्षेत्र में समावेशी सतत विकास प्रदान करने में प्रमुख भूमिका अदा की थी।

चूंकि भारत में यूनेस्को की विश्व विरासत शिलालेखों की अधिकता है, कई प्रतिष्ठित गंतव्य – भारत के पश्चिमी तटों में सोमनाथ से लेकर पूर्वी भाग में काजीरंगा तक, 10 पर्यावरण के अनुकूल ब्ल्यू फ्लैग वाले समुद्र तट, विशाल प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीव अभयारण्य, त्योहारों और प्रदर्शनी कलाओं के रूप में असंख्य अमूर्त सांस्कृतिक विरासतें मौजूद हैं। इनमें से प्रत्येक ऐसे गंतव्य हैं जहां दुनिया भर के लोग खुशी-खुशी घूमने और जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक होंगे। इसलिए, हमारे पास इन गंतव्यों के आसपास पर्यटन क्लस्टर बनाने का अवसर है, जैसा कि केवडिया में हासिल किया गया था, ताकि स्थानीय समुदाय लाभान्वित हो सकें।

पर्यटन राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यटन का पुनरुद्धार वैश्विक अर्थव्यवस्था की पुनर्प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सामाजिक- स्कृतिक पहलुओं पर इसके प्रभावों के लिए दोनों, विकसित और विकासशील देशों के लिए पर्यटन उद्योग की स्थिरता प्रासंगिक है।

श्री नाइक ने कहा कि जिम्मेदार पर्यटन प्रथाओं को अपनाने से, पर्यटन उद्योग, सरकारी विभागों के साथ स्थानीय समुदाय के उत्थान और भागीदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बनाए रखते हुए क्षेत्र में लोगों का सशक्तिकरण और विकास होता है। उन्होंने यह भी बताया कि मंत्रालय ने महामारी से हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए प्रौद्योगिकी का पूर्ण उपयोग करने के लिए एक विस्तृत रणनीति की योजना बनाई है।

यूएनडब्ल्यूटीओ के महासचिव जोराब पोलोलिकाश्विली ने अपने वीडियो संदेश में इस बात पर प्रकाश डाला कि पर्यटन हमारे समाज को महामारी के प्रभाव से उबरने में मदद कर सकता है और यह उन लोगों को आशा की उम्मीद प्रदान करता है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

दुनिया के कई हिस्सों में, पर्यटन धीरे-रे शुरू हो गया है और पर्यटन के विकास से बड़ी एयरलाइंस से लेकर छोटे पारिवारिक व्यवसाय तक और सबसे बड़े शहरों से लेकर गरीब समुदायों तक हर क्षेत्र को लाभ होना चाहिए। इसका यही मतलब है कि हम किसी को पीछे नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि “भविष्य में आगे बढ़ने के लिए, समावेशी निर्णय हमारे क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण होंगे”।

पर्यटन सचिव, श्री अरविन्द सिंह ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय कोविड महामारी के कारण अत्यधिक प्रभावित पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से घरेलू पर्यटन की मांग को पुनर्जीवित करके पर्यटन क्षेत्र को तेजी से पुनर्जीवित करना संभव है। पर्यटन सचिव ने कहा कि मंत्रालय पर्यटन को पुनर्जीवित करने और सहयोग देने के लिए समाधान निकालने के लिए राज्यों और पर्यटन उद्योग के हितधारकों के साथ नियमित बातचीत कर रहा है।

फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी की प्रतिनिधि श्रीमती ज्योति मयाल, आरटीएसओआई के संस्थापक सदस्य और मानद अध्यक्ष श्री राकेश माथुर और यूएनईपी इंडिया प्रमुख श्री अतुल बगई ने भी इस मौके पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की कैसे कोविड के बाद के परिदृश्य में पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित किया जाए और साथ ही जिम्मेदार और सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए जो देश के हर व्यक्ति को लाभान्वित करता है।

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