नगर निगम के चीफ इंजीनियर ने पुलिस को भेजी शिकायत में क्या कहा ?

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सुभाष चौधरी /संपादक

गुरुग्राम : गुरुग्राम में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर शहरी निकाय मंत्री अनिल विज ने नगर निगम गुरुग्राम के एक एग्जिक्युटिव इंजीनियर सहित एक साथ सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित 8 संगीन धाराओं में मामला क्यों दर्ज करवाया ? उन्होंने इतना सख्त कदम अचानक क्यों उठाने का आदेश दिया ? इस प्रकरण की हकीकत इतना आश्चर्यचकित करने वाली है जिसका पारावार नहीं क्योंकि इन अधिकारियों व ठेकादारों ने सारे नियमों को ताक पर रख कर सरकारी खजाने पर करोड़ों का पलीता लगाया और अपनी जेबें गरम कीं . गुरुग्राम नगर निगम के लगभग दो दर्जन से अधिक वार्डों में काम कराने के नाम पर फर्जी बिल पास करवाए और पार्षदों के फर्जी हस्ताक्षर से काम की संतुष्टि का खुद ही प्रमाण पत्र भी बना लिया. जांच के अनुसार इसमें कथित तौर पर एग्जिक्यूटिव इंजीनियर गोपाल कलावत और ठेकेदार सहित अन्य अधिकारी ने अहम भूमिका अदा की.

जांच रिपोर्ट फाइलों में बंद थी :

करोड़ों रूपये के इस घोटाले की जांच की रिपोर्ट अब तक फाइलों में बंद पड़ी थी. इससे पहले के निगमायुक्त विनय प्रताप सिंह के कार्यकाल में इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई. जबकि इस घोटाले की जांच रिपोर्ट 23 नवम्बर 2020 को ही आ गई थी. नगर निगम गुरुग्राम के चीफ इंजीनियर ठाकुर लाल शर्मा ने भी तब ऍफ़ आई आर दर्ज करवाने की चिट्ठी पुलिस को भेजी जब प्रदेश के काबिना मंत्री अनिल विज ने सख्ती दिखाई. अंततः थाना सदर में आज इस हाई प्रोफाइल प्रकरण को लेकर मामला दर्ज किया गया.

चीफ इंजिनियर ने पुलिस से की शिकायत

चीफ इंजिनियर की ओर से 22 जुलाई गुरुवार को गुरुग्राम पुलिस को भेजी गई शिकायत में कहा गया कि विनोद कुमार जे ई, विक्की कुमार असिस्टेंट इंजीनिय,  पंकज सैनी तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, गोपाल कलावत वर्त्तमान एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एमसीजी ने दिलावर सिंह और राजकुमार एवं पवन बल्हारा नाम के कथित कांट्रेक्टर के साथ अनैतिक गठबंधन कर ऐसे कार्यों का बिल पास करने की संस्तुति की जो विकास कार्य कभी हुआ ही नहीं। चीफ इंजीनियर ने इन सभी नगर निगम के अधिकारियों व ठेकेदारों के काम कराये बिना ही बिला बना कर पैसे निकालने के कृत्य को आपराधिक षड्यंत्र की संज्ञा देते हुए इनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की.

विभागीय जांच की रिपोर्ट 23 नवम्बर 2020 को आई

चीफ इंजीनियर की शिकायत पर गुरुग्राम पुलिस ने सभी 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। बताया जाता है कि इस बड़े फर्जिबाड़े का खुलासा होने पर नगर निगम गुरुग्राम के तत्कालीन कमिश्नर ने अधिकारियों और कथित ठेकेदारों की अपराधिक भूमिका व जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए विभागीय जांच गठित की गई थी जिसकी रिपोर्ट 23 नवम्बर 2020 को आई.

 

किस वार्ड में कितने पैसे का घपला किया ?

 

पुलिस को दी शिकायत में चीफ इंजिनियर ने बताया है कि उक्त जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितता व भ्रष्टाचार एवं धोखाधड़ी के प्रमाण मिले. उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि वार्ड नंबर 10 में रोड रिपेयरिंग के नाम पर 8.19 लाख, वार्ड नंबर 6 और 17 में कवर और फ्रेम के नाम पर 9.04 लाख,  वार्ड नंबर 14 में फुटपाथ का काम कराने के नाम पर 8.33 लाख,  वार्ड नंबर 11 में सड़कों के स्पेशल रिपेयर और ट्रेन के नाम पर 9.48 लाख, वार्ड नंबर 35 में सड़कों की रिपेयर और कंस्ट्रक्शन के नाम पर 46.59 लाख,  वार्ड नंबर 23 में हीरो सीवर लाइन के नाम पर 20. 47 लाख,  वार्ड नंबर 24 में सीवर लाइन के नाम पर 32.99 लाख, वार्ड नंबर 10 में लोगों की शिकायतों का निपटारा करने व सडकों के मेंटेनेंस के नाम पर 7.15 लाख, वार्ड 12 में 9.47 लाख, वार्ड 29 में 47.33 लाख, वार्ड 27 में रोड रिपेयर के नाम पर 47.71 लाख रूपये के फर्जी बिल ही नहीं बनाये गए बल्कि इन वार्डों के पार्षदों के फर्जी हस्ताक्षर युक्त संतुष्टि पत्र भी फाइलों में लगा दिए. इनमें अधिकतर बिलों पर जे ई और ए ई के दस्तखत नहीं है. सभी में एक्शन गोपाल कलावत के हस्ताक्षर पाए गए हैं.

 

बिना टेंडर की ही कराये गये विकास कार्य

 

मामले में की गई शिकायत में आरोप लगाए गए थे कि विकास कार्यों से संबंधित कागजातों पर सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं है. अधिकतर बिलों में संबंधित इलाके के जे ई और ए ई व दूसरे अन्य अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे।

कुछ विकास कार्य बिना टेंडर की ही कराये गये बताये गए. पार्षदों द्वारा के फर्जी संतुष्टि प्रमाण पत्र दिखाकर बिल पास कराए गए. कोई भी विकास कार्य धरातल पर नहीं दिखा, सीवर से संबंधित विकास कार्य की फाइल आयुक्त नगर निगम तक जानी चाहिए थी लेकिन उसे नीचे से ही पास करा दिया. केवल तीन चार एजेंसियों को ही फायदा पहुंचाने के लिए यह सब किया गया. विकास कार्य की किसी भी फाइल में एमबी की स्कैन कॉपी नहीं लगाई गई थी.

 

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