बिना सब्सिडी के शून्य ब्याज दर की मौद्रिक नीति के साथ एमएसएमई क्षेत्र के आधुनिकीकरण हेतु नीडोनॉमिक्स को अपनाएं

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 सेकेंड हैंड तकनीक का आयात न करें : एम.एम. गोयल

गुरुग्राम, 26 जून: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड कल्चर बेंगलुरु में डॉ. के वेंकटगिरी गौड़ा मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित के.वी.जी मेमोरियल वेबिनार में ‘भारतीय अर्थव्यवस्था हेतु नीडोनॉमिक्स विद नीडो-फाइनेंस’ विषय पर ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमे गुरुग्राम स्थित स्टारेक्स यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के संस्थापक प्रोफेसर एम.एम. गोयल प्रमुख रूप से शामिल हुए।

वेबिनार में कुलपति ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में हितधारकों (उपभोक्ताओं, उत्पादकों, वितरकों और व्यापारियों) द्वारा काम  करने में आसानी के साथ स्थायी जीवन सुनिश्चित करने  हेतु  हमें बदले हुए रूप, कार्यों और शब्दों के साथ ऑनलाइन वातावरण को नए सामान्य के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता है।

प्रो. गोयल ने कहा कि लालच  के कारण होने वाली अधिकांश सामाजिक-आर्थिक समस्याओं को समाप्त करने हेतु जिस में ऋण के कोबरा प्रभाव, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, शोषण और भेदभाव सहित  समाज के लिए परोपकारिता, बुनियादी जरूरतें और प्रतिबद्धता नीडो-उपभोग  के साथ नीडोनॉमिक्स के निहितार्थ हैं ।

कुलपति  गोयल ने कहा कि बिना किसी सब्सिडी के शून्य ब्याज दर की मौद्रिक नीति के साथ एमएसएमई क्षेत्र के आधुनिकीकरण  हेतु  नीडोनॉमिक्स को अपनाएं और सेकेंड हैंड तकनीक का आयात न करें । उन्होंने कहा कि  उपभोक्ता के अनुकूल बनने के लिए विपणन के एनएडब्ल्यू (आवश्यकता, सामर्थ्य और मूल्य) दृष्टिकोण की आवश्यकता है ।

वेबिनार में कोरोना महामारी पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा हमें महामारी के प्रभावों के कम करने के लिये  विवेक के साथ सतर्क व जागरूक रहना होगा, जीवन शैली को बदलना होगा और लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करना होगा।

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