केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का बड़ा आरोप : राशन माफिया के नियंत्रण में है अरविन्द केजरीवाल सरकार

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सुभाष चौधरी 

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी ने आज दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार पर राशन घर घर पहुंचाने की योजना को लेकर जोरदार हमला बोला. पार्टी कार्यालय में भाजपा के वरिष्ठ नेता व केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेसवार्ता के दौरान आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार राशन माफिया के कब्जे में है. राशन के बहाने बड़े घोटाले को अंजाम देने की कोशिश में है. कानून मंत्री ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए ऐसे तथ्य रखे जिनसे दिल्ली सरकार कटघरे में कड़ी दिकहाई देती है.  उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल हर घर अन्न की बात कर रहे हैं। दिल्ली के लोगों को ऑक्सीजन पहुंचा नहीं सके, मोहल्ला क्लीनिक में दवा तो पहुंचा नहीं सके अब राशन घर घर पहुँचाने की बात कर लोगों को भ्रमित करना चाहते हैं। उन्होंने दिल्ली सरकार को इस मामले में संसद से पारित खाद्य सुरक्षा बिला 2013 के प्रावधानों की या दिलाई.

पत्रकार वार्ता के दौरान केन्द्रीय कानून मंत्री ने अरविन्द केजरीवाल सरकार से पांच सवाल पूछे. उन्होंने कहा कि हर घर अन्न भी केजरीवाल का एक जुमला है। दिल्ली सरकार राशन माफिया के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि मेरा पहला सवाल है कि दिल्ली में अबतक वन नेशन-वन राशन कार्ड लागू क्यों नहीं हुआ ? उन्होंने पूछा कि क्या परेशानी और क्या दिक्कत है आपको वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना से? उनके अनुसार भारत के सिर्फ तीन प्रदेशों ने वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना को लागू नहीं किया है। इनमें एक असम है जहां नागरिकता को लेकर स्थानीय समस्याओं के कारण आधार कार्ड योजना देर से शुरू हुई थी और बाकी दो प्रदेश जिसमें बंगाल और दिल्ली है।

भाजपा के वरिष्ठ ने का दूसरा सवाल था कि दिल्ली की राशन की दुकानों में अप्रैल 2018 से अब तक पीओएस मशीन का authentication शुरु क्यों नहीं हुआ ? जबकि अरविंद केजरीवाल से उन्होंने तीसरा सवाल यह आरोप लगाते हुए पूछा कि दिल्ली सरकार एससी-एसटी वर्ग की चिंता नहीं करते हैं, प्रवासी मजदूरों की चिंता भी नहीं करते हैं, गरीबों की पात्रता की भी चिंता नहीं करते हैं।

उन्होंने खुलासा किया कि केंद्र सरकार से कई बार पीएम अनाज योजना के तहत अनाज लेने वाले एस सी/ एस टी लाभार्थियों की जानकारी मांगी गई. लेकिन दिल्ली सरकार की और से जानकारी यह कहते हुए नहीं दी गई कि यह आकंडा उपलब्ध नहीं है. उन्होंने इन तथ्यों के आधार पर आप सरकार की मंशा पर सवाल किया.

कानून मंत्री ने कहा कि भारत सरकार देश भर में 2 रुपये प्रति किलो गेहूं, 3 रुपये प्रति किलो चावल देती है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पिछले साल की तरह इस बार भी नवंबर तक गरीबों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है।

उनका कहना था कि चावल का खर्चा 37 रुपये प्रति किलो होता है और गेहूं का 27 रुपये प्रति किलो आता है। भारत सरकार सब्सिडी देकर प्रदेशों को राशन की दुकानों के माध्यम से बांटने के लिए अनाज देती है।

उनका कहना था कि भारत सरकार सालाना करीब 2 लाख करोड़ रुपये इसमें खर्च करती है। वन नेशन, वन राशन कार्ड भारत सरकार द्वारा बहुत महत्वपूर्ण योजना शुरू की गई है। देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना चल रही है। अभी तक इस पर 28 करोड़ पोर्टेबल ट्रांजेक्शन हुए हैं फिर दिल्ली में इसे 2018 से ही क्यों रोक दिया गया.

केंद्रीय कानून मंत्री ने बताया कि देश भर में अब लगभग 86% राशन कार्ड यू एस मशीन से जोड़ दिए गए हैं यूपी एमपी और बिहार जैसे राज्यों में 99% से अधिक राशन कार्ड सुविधा से जोड़े जा चुके हैं. मामले में अरविंद केजरीवाल सरकार की कार्यशैली सवालों के घेरे में है क्योंकि दिल्ली में जनवरी  2018 में राशन कार्ड को पोस मशीन से जोड़ने का काम शुरू हुआ जिसे केवल 4 महीने में ही इसे रोक दिया गया.  उन्होंने खुलासा किया कि इस दौरान ही यहां लगभग चार लाख राशन कार्ड फर्जी पकड़े गए.

उन्होंने आशंका जताई कि फर्जी राशन कार्ड के खुलासा होने के बाद राशन माफियाओं ने अरविंद केजरीवाल सरकार पर दबाव  बनाकर इस कम को रुकवा दिया जो आप तक रुका हुआ है. उन्होंने सवाल खड़ा किया कि आखिर 4 महीने में ही इस काम को क्यों रोक दिया गया ?  उन्होंने कहा कि तर्क यह दिया गया कि टेक्नोलॉजी काम नहीं कर रही है लेकिन जब 4 महीने मेंकी 79 प्रतिशत राशन कार्ड को इस योजना से कैसे जोड़ दिया ?  अगर तकनीकी दिक्कत थी तो आईटी मंत्रालय से बातचीत की जा सकती थी इसका हल 1 से 2 दिन के अंदर निकाला जा सकता था लेकिन अब तक रोके रखा.

उन्होंने कहा जब यह तकनीक मेघालय नागालैंड उत्तराखंड हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में  काम कर सकती है तो फिर दिल्ली तो देश की राजधानी है यहां क्या दिक्कत थी. अगर कोई तकनीकी परेशानी थी तो उसे हल किया जा सकता था. उन्होंने कहा कि इसको लेकर केजरीवाल सरकार की मंशा साफ नहीं थी.  उन पर राशन माफियाओं का दबाव है.

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