मुख्य सचिव ने सभी सिविल सर्जन को जिला कंट्रोल केंद्र स्थापित करने का दिया निर्देश

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चण्डीगढ़, 15 सितंबर : हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनन्द अरोड़ा ने कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हमें और मेहनत करने की आवश्यकता है। मुख्य सचिव ने आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 के नोडल अधिकारियों, मेडिकल कालेज के निदेशकों, सभी जिला सिविल सर्जनों एवं प्रधान मेडिकल आफिसरों को कोविड-19 के प्रबंधन पर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने जिलों में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति एवं इससे निपटने के लिए अपनाई जा रही व्यापक रणनीतियों की विस्तृत प्रस्तुति दी।


केशनी आनन्द अरोड़ा ने निर्देश दिया कि मरीजों को सही समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो सकें इसके लिए सिविल सर्जन एक सिस्टम यानी जिला कंट्रोल केंद्र स्थापित करें ताकि समय पर उपचार उपलब्ध हो और मरीजों को किसी भी प्रकार का इंतजार न करना पड़े। साथ ही सभी जिलों में उपलब्ध कमरों , मरीजों व होम आइसोलेशन में इलाज करवा रहे मरीजों की जानकारी मिल सके। इस केंद्र के लिए अधिकारी भी नामित करें। उन्होंने कहा कि मरीजों को समय पर आक्सीजन व दवाईयों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाये। मेडिकल कालेज एवं जिला अस्पताल एक टीम के रूप में कार्य करें ताकि सभी तृतीयक स्तरीय देखभाल संस्थानों में रेफरल मरीजों की देखभाल सुनिश्चित हो सके और कोविड से होने वाली मृत्युदर में और कमी लाई जा सके।


श्रीमती अरोड़ा ने कहा कि कोरोना वायरस से ठीक हो चुके लोगों का पोस्ट कोरोना फोलोअप भी सुनिश्चित करें। सैंपल कलैक्शन सेंटरों पर अनावश्यक भीड़ न हो, इसके लिए मरीजों, यात्रा करने वालों तथा नौकरी के लिए भी 72 घंटे पहले टेस्टिंग करवाने वालों के लिए अलग-अलग कलैक्शन सेंटरों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि होम आइसोलेशन वाले मरीजों की स्थिति पर भी नजर रखी जानी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें तुरंत स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकें। उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन मृत्यु, होम क्वारंटीन, मरीजों की संख्या, ट्रेसिंग इत्यादि से संबंधित अपनी दैनिक रिपोर्ट मुख्यालय में भेजें।


श्रीमती अरोड़ा ने कहा कि सभी जिलों में एंबुलेंस सेवा को चुस्त-दुरुस्त रखा जाए। सभी जिलों की मल्टी डिसीप्लीनरी टीमें प्रतिदिन कोरोना के गंभीर मामलों से निपटने के लिए रणनीति पर चर्चा करें। इसके अलावा, सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी मैडिकल कालेज अपने अपने संस्थान में कंट्रोल रूम स्थापित करें ताकि मरीजों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो। इसके अलावा कोविड-19 के प्रबंधन के लिए टेस्टिंग सुविधा बढ़ाने, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग, क्लिनिकल मैनेजमेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ जन-जागरुकता गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए।


बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा नेे कहा कि सक्रिय संपर्क ट्रेसिंग को यदि 72 घंटे की अवधि के भीतर पूरा किया जाए तो कोरोना के फैलने की प्रतिशतता को 6 प्रतिशत से कम एवं मृत्यु दर को 1 प्रतिशत से कम किया जा सकता है। उन्होंने चरखी दादरी, कैथल, जींद, फतेहाबाद, एवं पलवल जिलों के अधिकारियों को परीक्षण संग्रहण केंद्र बढाने एवं आरटी-पीसीआर परीक्षण पर अधिक ध्यान देने के निर्देश दिए । उन्होंने कहा कि आरटी-पीसीआर परीक्षण की पूरी क्षमता का उपयोग करने के बाद, रैपिड एंटीजन परीक्षण किट द्वारा परीक्षण को पूरक बनाया जा सकता है।


बैठक में, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक निगम एवं महानिदेशक अमनीत पी.कुमार, हरियाणा स्वास्थ्य प्रोटेक्शन ऑथोरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अशोक कुमार मीणा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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