गृह मंत्रालय ने 31 मई तक लॉक डाउन के दौरान किन क्षेत्रों में छूट दी है ?

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सुभाष चंद्र चौधरी

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से लॉक डाउन के चौथे चरण 31 मई तक जिन गतिविधियों मैं छूट दी गई है उसका जिक्र भी विस्तार से किया गया है। गाइडलाइन में कहा गया है कि तीन प्रकार की गतिविधियां कंटेनमेंट जॉन को छोड़कर कुछ प्रतिबंधों के साथ संचालित की जाएंगी। इनमें यात्रियों की निजी वाहन एवं सरकारी बसें इंटरस्टेट मूवमेंट के लिए चलाने की अनुमति होगी लेकिन इसमें दो राज्यों के बीच में आपसी सहमति होना आवश्यक है। इसके अलावा यात्रियों के वाहन और सरकारी बसों को इंटरस्टेट मूवमेंट के लिए राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सहमति पर चलाने की अनुमति होगी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि लॉक डाउन के दौरान किसी भी प्रकार की आवाजाही में एस ओ पी यानी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों एवं शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा।

गाइडलाइन के पॉइंट नंबर चार में कोविड-19 मैनेजमेंट के लिए नेशनल डायरेक्टिव्स का भी जिक्र किया गया है जो की गाइडलाइन के एनेक्सचर 2 में बताया गया है जिसका अनुपालन पूरे देश में करने का निर्देश दिया गया है।

गाइडलाइन के पॉइंट नंबर 5 में कंटेनमेंट, बफर, रेड, ग्रीन और ऑरेंज जॉन की परिभाषा भी दी गई है।
इस बार प्रधानमंत्री के साथ देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक के दौरान राज्य सरकारों ने इस मामले में पूरा अधिकार राज्यों को देने की मांग की थी। मुख्यमंत्रियों की मांगों पर विचार करते हुए इस बार केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गाइडलाइन में यह स्पष्ट कर दिया है कि कंटेनमेंट जोन बफर जोन रेड जोन ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें व प्रशासक निर्धारित करेंगे। लेकिन इसके निर्धारण में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशिका को ध्यान में रखना होगा।
पूर्व की भांति ही सभी प्रकार के जोन संक्रमण को लेकर जिला कलेक्टर को ही एरिया को चिन्हित करने का अधिकार दिया गया है।

यहां यह भी स्पष्ट किया गया है कि कंटेनमेंट जॉन्स में केबल एसेंशियल एक्टिविटीज ही संचालित करने की अनुमति होगी जबकि इस जोन में लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित होगी और दूसरी जॉन के लोग भी इस रेड जोन में या कंटेनमेंट जॉन में नहीं आ पाएंगे। यहां केवल मेडिकल इमरजेंसी और खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति तथा अन्य आवश्यक सेवा ही संचालित करने की अनुमति होगी।

कंटेनमेंट जॉन के मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की गाइडलाइन का अनुपालन करना आवश्यक होगा। कंटेनमेंट जॉन में इंटर्नशिप कांटेक्ट रेसिंग हाउस टो हाउस सविलियन और अन्य क्लिनिकल इंटरवेंशन की व्यवस्था होगी।

गाइडलाइन में रात्रि में कर्फ्यू लागू करने को लेकर भी खासतौर से निर्देश दिया गया है। डाउन के चौथे चरण में भी अगले 2 सप्ताह तक शाम 7:00 बजे से सुबह 7:00 बजे तक आम लोगों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रहेगा और इसके लिए स्थानीय प्रशासन आवश्यकतानुसार अपने क्षेत्राधिकार में आदेश जारी करेंगे जिन में धारा 144 और सीआरपीसी के तहत भी इसके अनुपालन कराने की व्यवस्था की जाएगी। केंद्र सरकार ने इस बार भी 65 वर्ष या इससे अधिक उम्र के व्यक्ति गर्भवती महिलाएं 10 वर्ष से छोटे बच्चे को घर से निकलने पर प्रतिबंध लगाया है। उन्हें केवल मेडिकल इमरजेंसी जैसी आवश्यकता ओं के लिए ही घर से बाहर निकलने की अनुमति होगी।

किसी भी जिले के कंटेनमेंट जॉन में केवल आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने की अनुमति होगी जबकि राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक अपने आकलन के आधार पर वहां परिस्थिति को देखते हुए अन्य प्रकार के प्रतिबंध भी लगाने के लिए अधिकृत किए गए हैं।

गाइडलाइन में आरोग्य सेतु के उपयोग को लेकर भी राज्य सरकारों एवं जिले के कलेक्टरों को खास निर्देश दिया गया है। आरोग्य सेतु एप को जन सामान्य में प्रचारित कराने और इसका अधिकतम उपयोग करने की सलाह दी गई है।
गाइडलाइन में कुछ विशेष प्रकार की विशेषज्ञों एवं सेवा देने वाले लोगों वह वाहनों की आवाजाही को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं।


इसमें कहा गया है कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश मेडिकल प्रोफेशनल डॉक्टर नर्सेस पारा मेडिकल स्टाफ सफाई कर्मी एंबुलेंस सेवा और अन्य आवश्यक संबंधित व्यक्तियों की आने जाने को सुनिश्चित करेंगे। इन्हें इंटरस्टेट मूवमेंट में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होने देने का निर्देश दिया गया है।

सभी प्रकार की गुड्स और कार्गो के मूवमेंट को लेकर भी राज्य सरकारों को इनकी निर्बाध आवाजाही की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।

साथ ही पड़ोसी देशों के साथ व्यावसायिक एग्रीमेंट के तहत आने वाले गुड्स और कार्गो की आवाजाही को भी सुचारू रूप से सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।
गाइडलाइन के पॉइंट नंबर 11 में केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया गया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि कोई भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक किसी भी परिस्थिति में केंद्र सरकार की गाइडलाइन में किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं करेंगे। इसमें किसी भी प्रकार के बदलाव की अनुमति नहीं होगी जबकि सभी जिला मजिस्ट्रेट इसे सख्ती से लागू करेंगे। सभी जिला मजिस्ट्रेट उसे इन नियमों का पालन कराने की दृष्टि से अलग-अलग जोन के लिए एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट तैनात करने का आदेश दिया गया है। जिले में इंसिडेंट कमांडर्स भी नियुक्त करने को कहा गया है।

गाइडलाइन में नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में दंडित करने का भी प्रावधान शामिल किया गया है। इन नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 की धारा 151 से लेकर 7 के तहत कार्यवाही की जाएगी जबकि आईपीसी की धारा 188 के तहत भी मामले दर्ज किए जाएंगे और जहां अन्य प्रावधान लागू होंगे उनके तहत भी कार्यवाही करने का अधिकार दिया गया है।

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