भूपेंद्र हुड्डा ने राज्यपाल से मनोहर लाल सरकार को बर्खास्त करने की मांग की

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पीएलपीए कानून संशोधन के विरध में कांग्रेस विधायकों का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला 

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से अरावली क्षेत्र को बचाने की गुहार लगाईं, मामले की जांच की मांग की 

सत्र के अंतिम दिन विपक्ष के तर्क को दरकिनार करते हुए इस बिल को आनन फानन में पारित कराने का आरोप लगाया 

सुभाष चौधरी 

चण्डीगढ़ : हरियाणा के पूर्व मुख्य मन्त्री, भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में प्रदेश के कांग्रेसी विधायकों के शिष्टमण्डल ने हरियाणा विधान सभा में पारित किये गये पंजाब भूमि संरक्षण (हरियाणा संशोधित) अधिनियम 2019 को लेकर हरियाणा के राज्यपाल से आज मुलाकात की। कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने उक्त संशोधन का विरोध करते हुए ज्ञापन सौंपा. राज्यपाल से अरावली क्षेत्र को बचाने की गुहार लगाईं . श्री हुड्डा ने विधानसभा से पारित इस बिल को राज्यपाल से वापस करने व इस कथित गैरजिम्मेदार कदम के लिए वर्तमान भाजपा सरकार को बर्खास्त करने की मांग की. 

मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने मीडिया को बताया कि राज्यपाल  ने उनकी बातों को बहुत ही ध्यान से सुना और उचित कारवाई का आश्वासन दिया। बातचीत में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने राज्यपाल को बताया कि अरावली क्षेत्र में पड़ने वाला शहर गुरूग्राम आज दुनिया के सबसे प्रदुषित 10 शहरों में शुमार है। हालात की गम्भीरता इस बात से आँकी जा सकती है कि इस संशोधन के खिलाफ तीन किलोमीटर लम्बी मानव श्रृंखला ने अपना विरोध जताया है। अगर पीएलपीए संशोधन कानून लागू हो जाता है तो स्थिति और भी भयावह हो जायेगी। अतः प्रदेश के संवैधानिक मुखिया होने के कारण आप इस मामले में तुरन्त दखल दें तथा इस आशय में हरियाणा विधान सभा में पारित बिल जो आपके पास आया है वो तुरन्त लौटा दें।

कांग्रेस शिष्टमण्डल ने राज्यपाल से यह भी मांग की कि आप इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दें ताकि निहित स्वार्थों का पर्दाफाश हो सके और एक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए हरियाणा की गैर जिम्मेवार सरकार को बर्खास्त करें, जिसे न जन भावना की परवाह है, न पर्यावरण की परवाह है और न न्याय व्यवस्था का सम्मान है। शिष्टमण्डल ने एक लिखित ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया है कि 27फ़रवरी को हरियाणा विधानसभा के सत्र का अंतिम दिन था और जल्दबाजी में इस बिल को आनन फानन में पारित कराया गया. समूचे विपक्ष ने इस बिल का विरोध किया और इसे विचार के लिए सदस्यों की एक समिति को भेजने की मांग की लेकिन इस मांग को मनोहर लाल सरकार ने नकार दिया. यह जनविरोधी बिल है. इसमें यह कहा गया कि सरकार ने इस बिल के पारित होने से उत्पन्न होने वाली स्थिति पर भी विचार करने से इनकार कर दिया .सरकार ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को भी नकार दिया.

कांग्रेस पार्टी का मानना है कि संशोधित पीएलपीए कानून से पर्यवरण, वन्यप्राणी और पेड़ पौधे को बड़ा नुक्सान होगा.कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस कानून  के माध्यम से भाजपा सरकार के चहेते लोग करोड़ों की कमाई करेंगे. ज्ञापन में बताया गया कि 24 घंटे के अन्दर सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि उनके निर्देश का उल्लंघन करने के लिए अवमानना का मामला चलाया जाएगा.   

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