जोधपुर में सम्पन्न हुआ ‘सावन महोत्सव’ , श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव की उपस्थिति में उमड़ा श्रद्धा का महासागर

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— जीवन को प्रकाशित करते हैं ईश्वर का दर्शन और गुरु का मार्गदर्शन : सिद्धगुरुवर ब्रह्मर्षि गुरुदेव
— जीवन में सेवा, साधना और माता-पिता का सम्मान ही सच्चा धर्म : श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मऋषि गुरुदेव
—  माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा यज्ञ, तप और धर्म है : श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मऋषि गुरुदेव

जोधपुर, 21 जुलाई। सावन की पुण्य बेला में जब संपूर्ण वातावरण भक्ति, शुद्धता और श्रद्धा से ओत-प्रोत होता है, उसी पावन अवसर पर आज जोधपुर में ‘सावन महोत्सव’ का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। यह आयोजन विश्व धर्म चेतना मंच जोधपुर केंद्र एवं श्री सिद्धेश्वर तीर्थ ब्रह्मऋषि आश्रम, तिरुपति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सिद्धगुरुवर श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव की दिव्य उपस्थिति एवं उनका आत्मजागृति से परिपूर्ण प्रवचन हुए। कार्यक्रम में गुरुदेव के दर्शनों और दिव्य वचनों को सुनने के लिए राजस्थान ही नहीं, देश व विदेश से भक्तगण यहाँ पहुँचे। आचार्य पंडित श्रीनिवास श्रीमाली ने पूरे कार्यक्रम को मंत्र उच्चारण के साथ और आध्यात्मिक बनाया।

श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि सावन केवल ऋतु नहीं है, यह भावनाओं का एक आत्मिक उत्सव है। ईश्वर का दर्शन और गुरु का मार्गदर्शन ये दोनों ही जीवन के तम को समाप्त कर दिव्य ज्योति प्रकट करते हैं। जैसे वर्षा धरती को हरियाली से भर देती है, वैसे ही गुरुकृपा हृदय को आंतरिक ज्ञान और प्रेम से भर देती है।

सावन हमें स्मरण कराता है कि जैसे आकाश से वर्षा धरती को तृप्त करती है, वैसे ही गुरु की वाणी आत्मा को तृप्त करती है। गुरुदेव ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे इस सावन में केवल पूजा-पाठ ही नहीं, स्वयं के भीतर झांकने और आत्मानुभूति करने का प्रयास करें।
कार्यक्रम में अनेक भक्त कलाकारों ने भजन, कीर्तन और नृत्य के माध्यम से वातावरण को भावविभोर कर दिया। ‘भोलेनाथ की महिमा’, ‘गुरु महिमा’ तथा ‘धर्म चेतना’ पर आधारित प्रस्तुतियों ने जनमानस के हृदयों को छू लिया।

उन्होंने बताया कि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं होता, वह चेतना है। वह तुम्हारे भीतर के परम सत्य का दर्पण है। जब तुम गुरु से जुड़ते हो, तो ईश्वर की ओर तुम्हारी यात्रा स्वतः शुरू हो जाती है।

गुरुदेव ने अपने प्रवचन में गुरु-तत्त्व की व्याख्या करते हुए कहा कि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं होता, वह चेतना होता है जो तुम्हारे भीतर के परम सत्य का दर्पण। जब तुम गुरु से जुड़ते हो, तो ईश्वर की ओर तुम्हारी यात्रा स्वतः आरंभ हो जाती है। उन्होंने आगे कहा कि जीवन केवल सांस लेने, खाने और कमाने तक सीमित नहीं है। सच्चा जीवन वही है जो सेवा, साधना और सत्य की खोज में बीते।

श्री सिद्धेश्वर गुरुदेव ने युवाओं को एक अत्यंत मार्मिक और यथार्थपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि माता-पिता के जीते जी उनकी सेवा कर लो, क्योंकि उनके जाने के बाद केवल स्मृतियाँ ही

विश्व धर्म चेतना मंच तिरुपति के विभिन्न पदाधिकारी में ग्लोबल महिला चेयरपर्सन श्रीमती सरला बोथरा ने बताया कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि समाज में मानवता, सेवा और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि श्री सिद्धेश्वर तीर्थ ब्रह्मऋषि आश्रम, तिरुपति के तत्वावधान में देशभर में इस प्रकार के कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन हो रहे है।

इस अवसर पर हजारों की संख्या में भक्तों ने गुरुचरणों में शीश नवाया, रुद्राभिषेक एवं गुरु अर्चना की। अनेकों श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम के पश्चात गुरुदेव से व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी प्राप्त किया।

इस अवसर पर विश्व धर्म चेतना मंच के विभिन्न पदाधिकारी में ग्लोबल महिला चेयरपर्सन सरला बोथरा, विनोद बोथरा, राष्ट्रीय चेयरपर्स धनश्याम मोदी, गणपत आंचलिया जोधपुर अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय विंग अध्यक्षा प्रभा भंडारी, प्रेमलता गोलेच्छा, राष्ट्रीय कन्वीनर प्रमोद पालीवाल, अंतरराष्ट्रीय संयोजक अशोक संचेती, अशोक सिंघवी, युवा अध्यक्ष शुभम गोलेच्छा व अरविन्द भंडारी सहित अन्य पदाधिकारी, मंत्री, नेतागण व विदेश से आए भक्त भी उपस्थित थे।

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