पीएफटीआई ने अनियमित औद्योगिक क्षेत्रों को नियमित करने की मुख्यमंत्री से की मांग

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– प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी ने लिखा पत्र
– प्रदेश सरकार से नियमित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की

– चेयरमैन दीपक मैनी ने कहा, प्रदेश के आर्थिक विकास को मिलेगा बल 

गुरुग्राम। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) के चेयरमैन दीपक मैनी ने प्रदेश के सभी अनियमित औद्योगिक क्षेत्रों को नियमित करने की मांग राज्य सरकार से की है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि प्रदेश में स्थित विभिन्न अनियमित औद्योगिक क्षेत्रों को नियमित करने की लंबे समय से मांग की जा रही है। वह पिछले पांच वर्ष से विभिन्न मंचों के माध्यम से इस मुद्दे को लगतार उठाते आ रहे हैं। इस मामले में सरकार को जल्द से जल्द ठोस कदम उठाना चाहिए। ऐसा होगा तो इससे प्रदेश के आर्थिक विकास को बल मिलेगा।

दीपक मैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अनियमित औद्योगिक क्षेत्रों को नियमित करने को लेकर चार वर्ष पहले एक योजना तैयार की थी। इसके अंतर्गत कहा गया था कि जिन अनियमित क्षेत्रों में 70 प्रतिशत तक औद्योगिकरण हो चुका होगा उन सभी को नियमित किया जाएगा। सरकार की ओर से अनियमित औद्योगिक क्षेत्रों के सर्वे का काम शुरू कराया गया था। सर्वे एजेंसी आरएसआई द्वारा फरीदाबाद, पानीपत, रोहतक और यमुनानगर जिले में सर्वे का काम पूरा कर रिपोर्ट प्रदेश सरकार को काफी पहले सौंप दिया गया है। इसके बाद भी इस दिशा में अभी तक आगे कोई प्रगति नहीं हुई है। गुरुग्राम में सर्वे का कार्य अभी तक नहीं हुआ है। यहां दौलताबाद, कादीपुर, बसई रोड, पटौदी रोड और बेगमपुर खटोला जैसे अनियमित औद्योगिक क्षेत्र में यहां पर बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाईयां हैं। इन औद्योगिक क्षेत्र में लाखों की संख्या में मजदूर कार्यरत हैं l इन औद्योगिक क्षेत्र के नियमित न होने के कारण इन क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है .

पीएफटीआई की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सर्वे का यह कार्य राज्य के दूसरे जिलों में भी जल्द से जल्द कराए जाने की मांग की है। साथ ही सर्वे का पूरा पूरा होने के बाद अनियमित औद्योगिक क्षेत्रों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए. इन क्षेत्रों के नियमित होने से जहां प्रदेश में औद्योगिक विकास और विस्तार को बल मिलेगा वहीं औद्योगिक निवेश और रोजगार के सृजन की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ सकेंगे। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी तेजी से वृद्धि होगी.

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