भैराणा धाम को बचाने की मांग तेज, औद्योगिक गतिविधियों पर रोक लगाने की उठी आवाज

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-प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ 15 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरना: अशोक बुवानीवाला

-भैराणा धाम की पवित्रता के साथ पर्यावरण संतुलन को भी बिगाड़ रही औद्योगिक गतिविधियां

जयपुर, 13 अप्रैल। भैराणा धाम क्षेत्र में बढ़ती खनन एवं औद्योगिक गतिविधियों को लेकर संत समाज और श्रद्धालुओं में रोष गहराता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय श्री दादू सेवक समाज ने प्रेस क्लब जयपुर में पत्रकारवार्ता आयोजित कर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर क्षेत्र को विनाश से बचाने की मांग उठाई गई। प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय श्री दादू सेवक समाज के अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि संत शिरोमणि दादूदयाल जी महाराज की पावन समाधि स्थली भैराणा धाम (दादू खोला) न केवल दादू पंथ का प्रमुख तीर्थ स्थल है, बल्कि इसे “हरिद्वार” के समान आस्था का केंद्र माना जाता है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र सदियों से संत परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता का प्रतीक रहा है, जहां प्रकृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की गई थी परन्तु अभी तक इस मुद्दें पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। उल्ट इसके क्षेत्र में रीको द्वारा भूमि आवंटन के बाद औद्योगिक विकास की गतिविधियां ओर अधिक तेजी से बढ़ती जा रही हैं। समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पहाड़ों की कटाई, जल स्रोतों पर प्रभाव और खनन के कारण क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। इसके चलते न केवल भैराणा धाम की पवित्रता प्रभावित हो रही है, बल्कि यहां का पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है।

प्रेसवार्ता में यह भी बताया गया कि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोर, अन्य वन्य जीव और दुर्लभ वनस्पतियां पाई जाती हैं, जो अब औद्योगिक गतिविधियों के कारण संकट में हैं। संत समाज ने चिंता जताई कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह क्षेत्र अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान खो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ अब निर्णय लेने का समय आ गया है, जिसके चलते टांका के पास समतल की गई उसी विवादित जमीन पर 15 अप्रैल से क्षेत्र की जनता अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने जा रही है।

अशोक बुवानीवाला ने कहा कि संत समाज और स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा इस मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण जनआंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा ताकि भैराणा धाम क्षेत्र में चल रही खनन और औद्योगिक गतिविधियों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए तथा इसे संरक्षित धार्मिक और पर्यावरणीय धरोहर घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए भैराणा धाम की पवित्रता और पर्यावरण की रक्षा के लिए जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लें। उन्होंने बताया कि इस संबंध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित अन्य विपक्षी पार्टीयों एवं नेताओं को भी पत्र लिखकर भैराणा धाम को बचाने के लिए समर्थन मांगा गया है। इस मौके पर संत प्रकाश दास जी महाराज, रामरत्न दास, देवादास स्वामी अन्य संत-महात्मा सहित स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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