-जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक गंभीर भ्रष्टाचार का मामला : अशोक बुवानीवाला
भिवानी, 3 अप्रैल। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस उद्योग सैल के चेयरमैन अशोक बुवानीवाला द्वारा शहर के जल टैंकों की बदहाल स्थिति उजागर किए जाने के बाद अब सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले जवाब ने जनस्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी से साफ हो गया है कि टैंकों की सफाई का काम कागजों में तो दिखाया जा रहा है, लेकिन धरातल पर इसकी स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंडल नंबर-2, भिवानी द्वारा दिए गए जवाब में बताया गया है कि शहर में जलापूर्ति तीन जलघरों के माध्यम से की जाती है, जिनसे जुड़े करीब 25 टैंक कार्यरत हैं। हैरानी की बात यह है कि इन टैंकों की नियमित सफाई के लिए कोई अलग से वार्षिक बजट निर्धारित नहीं किया गया है और न ही सफाई के लिए कोई तय शेड्यूल बनाया गया है। विभाग ने यह जरूर कहा है कि टैंकों की सफाई आवश्यकता अनुसार करवाई जाती है, लेकिन इसके समर्थन में न तो कोई लिखित योजना उपलब्ध है और न ही कोई ठोस प्रमाण।
आरटीआई के जवाब में यह भी सामने आया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान जलघर नंबर-2 के टैंकों की डिसिल्टिंग कराए जाने का दावा किया गया है, लेकिन इस कार्य से संबंधित न तो कोई फोटोग्राफ विभाग के पास मौजूद है और न ही कोई निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध करवाई गई है। इसके अलावा रिकॉर्ड में टैंकों की सफाई को लेकर किसी प्रकार की शिकायत दर्ज न होने की बात भी कही गई है, अपने आप में कई सवाल खड़े करती है।
विभाग ने यह जरूर स्वीकार किया है कि सफाई कार्य ठेकेदारों के माध्यम से कराया गया, लेकिन इस प्रक्रिया में पारदर्शिता के ठोस प्रमाण सामने नहीं रखे गए। सफाई संबंधित इस कार्यवाही से सबसे बड़ा सवालिया निशान खुद स्थानीय लोगों ने लगाया है, जिनके अनुसार उन्होंने संबंधित टैंकों की सफाई का कार्य आज तक नहीं होते देखा है।

विभाग के पास सफाई से संबंधित कोई ठोस रिकॉर्ड और फोटो नहीं : अशोक बुवानीवाला
गौरतलब है कि हाल ही में अशोक बुवानीवाला ने डाबर क्षेत्र में स्थित जल टैंकों का निरीक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति को उजागर किया था, जहां टैंकों के अंदर गंदगी, कीचड़ और सड़ांध जैसी गंभीर स्थितियां देखने को मिली थीं। आरटीआई से मिले तथ्यों ने उनके इन आरोपों को और मजबूती प्रदान की है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बुवानीवाला ने कहा कि जब विभाग के पास सफाई से संबंधित कोई ठोस रिकॉर्ड, फोटो या निरीक्षण रिपोर्ट ही उपलब्ध नहीं है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि वर्षों से सफाई केवल कागजों में दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने इसे आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक गंभीर भ्रष्टाचार का मामला है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि शहर के सभी जल टैंकों की तत्काल प्रभाव से वास्तविक सफाई सुनिश्चित की जाए, पिछले दस वर्षों में सफाई के नाम पर हुए खर्च की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए और दोषी अधिकारियों व संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए पारदर्शी व्यवस्था और जनभागीदारी आधारित निगरानी तंत्र लागू किया जाए।

