IFFI 2024 : अभिनेता विक्रांत मैसी को मिला ‘इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर’ पुरस्कार

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नई दिल्ली /पणजी : अभिनेता विक्रांत मैसी को गोवा में आयोजित 55वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के भव्य समापन समारोह में प्रतिष्ठित ‘इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारतीय सिनेमा में मैसी के असाधारण योगदान को मान्यता प्रदान करने वाला यह सम्मान गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत तथा सूचना और प्रसारण सचिव संजय जाजू द्वारा प्रदान किया गया।

 

इस सम्मान को स्वीकार करने के मौके पर दिए गए एक भावनात्मक संबोधन में, विक्रांत मैसी ने अपनी यात्रा के बारे में बताया और कहा, “यह मेरे लिए वास्तव में एक विशेष क्षण है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा सम्मान मिलेगा। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन फिल्म 12वीं फेल में मेरे किरदार की तरह ही हमें दोबारा शुरुआत करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं दिल से एक कहानीकार हूं। मैं ऐसी पटकथा चुनता हूं, जो मुझे आम लोगों की आवाज बनने का मौका दे। आप चाहे जहां से भी आते हों, अपने आप को, अपनी कहानियों को और अपनी जड़ों को अपनाएं। भारतीय फिल्म उद्योग सबसे शानदार उद्योगों में से एक है जिसका हिस्सा बनना चाहिए।”

विक्रांत मैसी की यात्रा इस बात का एक उल्लेखनीय प्रमाण है कि सपने और संघर्ष किसी को भी अविश्वसनीय ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। भविष्य के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा, “मेरे अभिनय कौशल के कई अनछुए पक्ष हैं, जिनमें से बहुत कुछ अभी भी सामने आना बाकी है। कृपया प्रतीक्षा करें और देखें।”

विक्रांत मैसी की प्रभावशाली फिल्मोग्राफी में दिल धड़कने दो (2015), ए डेथ इन द गंज (2016), लिपस्टिक अंडर माई बुरखा (2016), हाफ गर्लफ्रेंड (2017), डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे (2019), गिन्नी वेड्स सनी (2020) तथा साइंस फिक्शन रत्न कार्गो (2020) जैसी उल्लेखनीय फिल्में शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक फिल्म ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा और कला के प्रति उनके समर्पण को प्रदर्शित किया है, जिसके कारण उन्हें आलोचकों एवं दर्शकों की ओर से अपार प्रशंसा मिली है।

प्रामाणिक चित्रण और संबद्ध किरदारों के जरिए दर्शकों के साथ जुड़ने की इस अभिनेता की क्षमता ने उन्हें सिनेमा में आम आदमी की आवाज का सच्चा प्रतिनिधि बना दिया है। अब जबकि विक्रांत मैसी अभिनय के नए आयाम की तलाश रहे हैं, उनका योगदान भारतीय फिल्म उद्योग पर एक अमिट छाप छोड़ेगा।

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