देश की पहली ग्रीन फिल्ड स्मार्ट सिटी होगी ” रांची स्मार्ट सिटी ” ! क्या है ख़ास ?

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रांची स्मार्ट सिटी

सुभाष चौधरी/संपादक

नई दिल्ली :  इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर 2021 में रांची स्मार्ट सिटी के मॉडल का प्रदर्शन दील्ली एन सी आर के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. ऐसा हो भी क्यों नहीं क्योंकि रांची स्मार्ट सिटी देश के सौ स्मार्ट शहरों में से उन दो ख़ास शहरों में शामिल है जो ग्रीन फिल्ड स्मार्ट सिटी होगी.

लगभग 650 एकड़ के क्षेत्रफल में फैली खाली जमीन पर विकसित किये जाने वाले इस शहर की तुलना दुनिया के किसी भी विकसित शहर से की जा सकती है जहाँ आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया गया है. सड़कें अधिकतम 45 मीटर चौड़ी तो वर्ल्ड क्लास अंडरग्राउंड सर्विसेस जबकि एडाप्टिव ट्रेफिक कंट्रोल सिस्टम वाला संभवतः देश का यह पहला आधुनिक और पूरी तरह नया बसाया गया शहर होगा.

यही कारण है कि निर्माणाधीन रांची स्मार्ट सिटी में कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट के ढेरों प्रस्ताव आने लगे हैं. वैसे तो ट्रेड फेयर 2021  में झारखण्ड पवेलियन में और भी बहुत कुछ देखने और खरीदने को है लेकिन रांची स्मार्ट सिटी के मॉडल का यहाँ आने वाला हर दर्शक एक बार अवश्य अवलोकन करना चाहता है. झारखंड की राजधानी रांची का मौसम भी बेहद आकर्षक है जिसके कारण भी लोग इसमें रूचि दिखा रहे हैं.

दो शहर ही ग्रीन फिल्ड स्मार्ट शहर :

 

उल्लेखनीय है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रथम चरण में देश में जिन सौ शहरों को स्मार्ट शहर की सूची में दर्ज किया था उनमें से केवल दो शहर ही ग्रीन फिल्ड स्मार्ट शहर विकसित किया जाना प्रस्तावित है. इनमें से एक अमरावती स्मार्ट सिटी तो दूसरी रांची स्मार्ट सिटी है.

अन्य सभी ब्राउन फिल्ड स्मार्ट सिटी की श्रेणी में हैं क्योंकि उन सभी पुराने शहरों को ही स्मार्ट बनाने की योजना पर काम चल रह है जबकि रांची स्मार्ट सिटी को खाली जमीन पर नई प्लानिंग के साथ विकसित करने के प्रस्ताव पर काम किया रहा है.

जाहिर है रांची स्मार्ट सिटी, केंद्र और झारखंड राज्य सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. इस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए झारखण्ड की वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है.

इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर 2021 में लगी प्रदर्शनी में भी यह पहला स्टाल है जहाँ इस मॉडल को बखूबी डिस्प्ले किया गया है. ट्रेड फेयर में आने वाले निवेशकों को इस प्रोजेक्ट की खूबियों को समझाने के लिए रांची स्मार्ट सिटी कारपोरेशन लि. के पीआरओ अमित कुमार को तैनात किया गया है.

 

झारखण्ड राज्य में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम :

 

Thepublicworld.com से ख़ास बातचीत में अमित कुमार बताते हैं कि झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद संवेदनशील हैं. उनके नेतृत्व में झारखण्ड राज्य में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गए हैं. ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस पर अधिकतम फोकस है. सिंगल विंडो सिस्टम की स्थापना से लेकर वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर प्राथमिकता दी जा रही है.

रांची स्मार्ट सिटी कारपोरेशन लि. के पीआरओ के अनुसार यह  स्मार्ट सिटी लगभग  650 एकड़ क्षेत्रफल में डेवलप करने के प्लान पर काम युद्ध स्तर पर जारी है. रांची स्मार्ट सिटी में केंद्र व झारखंड राज्य सरकार दोनों भागीदार हैं. उनका कहना है कि देश के दो ग्रीन फील्ड स्मार्ट सिटी में से एक है रांची स्मार्ट सिटी. इसकी खासियत बयां करते हुए उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत नए क्षेत्र में नए स्मार्ट शहर का विकास हो रहा है. खाली जमीन पर नई प्लानिंग के तहत नए शहर की स्थापना के कारण यह शहर देश के अन्य शहरों से बिलकुल अलग और आधुनिकता लिए हुए होगा.

 

अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी एल एंड टी को जिम्मेदारी : रांची स्मार्ट सिटी

 

इसे विकसित करने का काम इतनी तेजी से किया जा रहा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट में 80% से अधिक काम पूरे हो चुके हैं. अमित कुमार ने दावा किया कि अगले 4 से 5 माह में स्मार्ट सिटी प्लानिंग के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर का काम पूरा होने की संभावना है. इसकी जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी एल एंड टी  को दी गई है. इसे अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जा रहा है.

 

रांची स्मार्ट सिटीनिवेश की संभावनाओं के सवाल पर उन्होंने बताया कि रांची स्मार्ट सिटी प्लैनिंग में कमर्शियल, इंस्टीट्यूशनल, हॉस्पिटल और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में निवेश का प्रावधान है जब कि योजना के अनुसार रांची स्मार्ट सिटी में लगभग डेढ़ लाख लोगों के रहने की व्यवस्था होगी.

आकलन बताता है कि लगभग एक लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार की भी संभावनाएं पैदा होने के आसार हैं क्योंकि यहाँ व्यावसायिक गतिविधियाँ भी चरम पर होंगी.

यहां सड़कों की चौड़ाई 9 से 45 मीटर होगी जबकि रांची स्मार्ट सिटी की सड़कों पर पैदल यात्री लेन, साइकिल लेन और वाहनों के लिए अलग लेन की व्यवस्था होगी. यहाँ एक तरफ आधुनिक सुविधाओं से लैस बिजली आपूर्ति व्यवस्था तो दूसरी तरफ शहर में कमांड कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधा भी होगी.

 

एडाप्टिव ट्रेफिक कंट्रोल सिस्टम से ट्रैफिक व्यवस्था मैनेज होगी

 

देश के किसी भी शहर में ट्रैफिक की व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल खड़े होते हैं लेकिन इस ग्रीन फिल्ड सिटी में एडाप्टिव ट्रेफिक कंट्रोल सिस्टम से ट्रैफिक व्यवस्था मैनेज होगी. अगर बात की जाय स्ट्रीट लाइट की तो शहर की सुरक्षा के लिए स्मार्ट लाइटिंग वीडियो सर्विलेंस सिस्टम की स्थापना भी इस शहर की  योजना में शामिल है.

शहर की लाइफ लाइन पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के नाम पर बीआरटीएस और सिटी बस सर्विस की कंपोजिट सुविधा मुहैया कराये जाने के प्रस्ताव पर काम चल रहा है.  स्मार्ट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम और आईटी कनेक्टिविटी और डिजिटाइजेशन पर भी प्राथमिकता से फोकस किया जा रहा है.

वैसे तो झारखंड सरकार ने पुराने रांची शहर में कई बड़े बदलाव किये हैं लेकिन इस नए प्रोजेक्ट से साथ लगते लगभग तीन हजार एकड़ के अन्य क्षेत्रों पर भी बड़ा असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

 

झारखंड सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की :

 

निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में इन्वेस्टमेंट प्लान के क्लीयरेंस के लिए झारखंड सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की है . हाल में रांची स्मार्ट सिटी में कई बड़े औद्योगिक घरानों ने निवेश का प्रस्ताव दिया है.

खास कर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के लिए बड़े एजुकेशनल समूह सामने रहे हैं क्योंकि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के लिए भारी सब्सिडी दी जा रही है. केबल सवा दो करोड़ रुपए प्रति एकड़ में ही जमीन उपलब्ध कराया जाना निवेशकों के लिए आकर्षक पहलू है. झारखंड सरकार रांची को एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने को तत्पर है. कॉरपोरेट सेक्टर अपना व्यावसायिक ऑफिस काम्प्लेक्स बनाने के लिए इस क्षेत्र को बेहद अनुकूल मान रहे हैं.

 

खबर है कि रांची स्मार्ट सिटी में अब झारखण्ड सरकार का नया सचिवालय भी बनेगा जबकि विधानसभा भवन तो इसके बेहद करीब है. इससे लगते इलाके में ही जेएससीए इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम भी है जिसका प्राकृतिक फायदा रांची स्मार्ट सिटी में रहने वाले लोगों को मिलना लाजिमी है.

 

सड़कों पर बिजली के तार और अन्य सर्विसेज के खम्भे नहीं दिखेंगे

 

अगर शहर के सुन्दर स्वरूप की बात की जाय तो स्मार्ट शहर की सड़कों पर बिजली के तार और अन्य सर्विसेज के खम्भे नहीं दिखेंगे. यातायात सुगम होगा क्योंकि शहर में यातायात के लिए 300 मीटर पर ही उपलब्ध होगी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा. एयरपोर्ट और रेलवे कनेक्टिविटी तो पहले से बेहतर है ही स्थानीय ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी आधुनिक स्वरूप देने की योजना है.

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