क्या 2007-12 के बीच कमीशन खोरी का मुख्यालय दस जनपथ था ? भाजपा का दावा …..

Font Size

नई दिल्ली : देश की राजधानी में आज एक बार राफेल विमान खरीद का भूत राजनीतिक दलों के सिर चढ़ कर बोला. एक तरह कांग्रेस पार्टी ने फिर नरेंद्र मोदी सरकार पर कथित भ्रष्टाचार को छिपाने का आरोप लगाया जबकि भारतीय जतना पार्टी ने भी पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस पर पलटवार करते हुए गांधी परिवार पर तीहे हमले किये. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ संबित पात्रा ने कहा तीखे अनदाज में आरोप लगाया कि राफेल का विषय कमीशन की कहानी थी. उन्होंने दावा किया कि यह बहुत बड़े घोटाले की साजिश थी और ये पूरा मामला 2007 से 2012 के बीच हुआ। 2019 के चुनावों से पहले प्रमुख विपक्षी दलों ने, खासकर कांग्रेस ने राफेल को लेकर एक माहौल बनाने की कोशिश की थी।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि फ्रांस के एक मीडिया संस्थान ने कुछ वक्त पहले ये खुलासा किया कि राफेल में भ्रष्टाचार हुआ था। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि इटली से राहुल गांधी जी जवाब दें – राफेल को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश आपने और आपकी पार्टी ने इतने वर्षों तक क्यों किया ? उनका कहना था कि आज ये खुलासा हुआ है कि उन्हीं की सरकार के कालखंड में पार्टी ने 2007 से 2012 के बीच में राफेल में ये कमीशनखोरी हुई है, जिसमें बिचौलिए का नाम भी सामने आया है।

भाजपा  नेता ने इंडियन नेशनल कांग्रेस को आई नीड कमीशन की संज्ञा दी. उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, रॉबर्ट वाड्रा सब कहते हैं- I Need Commission. जीप घोटाला, जीप घोटाला, बोफोर्स घोटाला, टाट्रा ट्रक घोटाला, अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला, जहां कमीशन वहां कांग्रेस है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि इस कमीशन खोरी का मुख्यालय दस जनपथ यानी सोनिया गाँधी का निवास था.

बीजेपी ने उस बिचौलिए का नाम जनता के सामने रखा है कि जिसके माध्यम से हिंदुस्तान में कमीशन दिया गया था. बीजेपी का कहना है कि ये कमीशन कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान दिया गया था. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने जिस बिचौलिए का नाम लिया वो सुशेन मोहन गुप्ता है.

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जो भ्रम फैलाने की कोशिश राहुल गांधी और उनकी पार्टी ने इतने वर्षों तक की है आज खुलासा हुआ है कि उन्हीं के सरकार के कालखंड 2007 से 12 के बीच में ही कमीशन खोरी हुई है. इसमें बैंक का नाम भी सामने आया है.  10 वर्षों तक यह जो नेगोशिएशन हुआ है यकीन नहीं हो रहा था यह  केवल कमीशन के  लिए निगोशिएशन होने का मामला सामने आया है. उन्होंने कहा कि एक कागज  आपके सामने रखने वाला हूँ जो मीडिया पार्टनर में भी छापा है, एग्रीमेंट फॉर कमीशन है. उन्होंने कहा कि यह कोई एक-दो पर्सेंट कमीशन का मामला नहीं है बल्कि 40 पर्सेंट कमीशन खोरी का मामला है. सुनकर भी आश्चर्य होता है कि इस कदर कमीशन खोरी होती थी.

 

 

क्या है मामला ?

उल्लेखनीय है कि सुशेन मोहन गुप्ता के खिलाफ वीवीआईपी हेलीकाप्टर घोटाले के अलावा एम्ब्रायर जहाज घोटाले को लेकर भी जांच चल रही है और उसके खातों की जांच के दौरान दसाल्ट कंपनी के अलावा इजरायल की कंपनियों से भी पैसा आने का पता चला है. सुशेन अपना सारा राज दुबई के एक डिब्बे में छुपाकर रखता था और एक छापेमारी के दौरान यह डिब्बा पकड़ा गया था, जिसके बाद वह कानून के शिकंजे मे आ गया था. सुशेन मोहन गुप्ता का दिल्ली के कई इलाकों में ठिकाने बताए जाते हैं. जांच एजेंसियों के पास सुशेन की जो जन्मपत्री मौजूद है उसके मुताबिक उसके पिता की खासी जान पहचान थी. इस जान पहचान को भुनाकर सुशेन दलाली के धंधे मे आ गया और उसने अपने भाई सुशांत को भी अपनी अनेक कंपनियों मे सहयोगी बना लिया.

जांच एजेंसियों के मुताबिक सुशेन ने जहाज के इंजन बनाने वाली प्राएट एंड विटनी की एजेंसी भी ली और धीरे-धीरे वो डिफेंस दलाली के धंधे में एक बड़ा नाम बन गया. साथ ही उसने विदेशों में भी कुछ कंपनियां और बैंक खाते खोल लिए. इन्हीं बैंक खातों के जरिए वो दलाली की रकम इधर से उधर करता था.

भारतीय एजेंसियों की निगाहों में धूल झोंकने के लिए सुशेन ने दुबई में एक शख्स के घर वाल्ट सिस्टम खोला हुआ था यानि उसके जो भी विदेशी पत्राचार होते थे वो उस डिब्बे के पते पर दुबई मे आते थे. सुशेन महीने में एक बार दुबई जाता था और अपने उस डिब्बे को खोलकर विदेशों से आई सारी जानकारियां हासिल करता था. लेकिन एक दिन उस डिब्बे पर जांच एजेंसियों का छापा पड़ गया और खुल गया बहुत सी डिफेंस डील्स का राज.

इस डिब्बे की तलाशी के दौरान सुशेन की दो डायरियां भी मिलीं जिसमें डिफेंस से संबंधित अनेक गोपनीय जानकारियां भी लिखी हुई थीं. उसमें यह भी लिखा हुआ था कि उसके जरिए किन-किन लोगों तक पैसा पहुंचा और कौन लोग उसके राजदार थे. इसी तलाशी के दौरान पता चला कि नौसेना के एक पूर्व एडमिरल का बेटा भी उसकी कंपनी मे पार्टनर था और जब उसकी कंपनी को भारत में ब्लैक लिस्ट कर दिया गया तो उसने अपनी कंपनी सुशेन को दे दी.

 

You cannot copy content of this page