कमिश्नरों के शहर गुरुग्राम में कूड़े के ढेर पर जीने को मजबूर है शहर की जनता !

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सुभाष चौधरी 

गुरुग्राम : “ प्लाट की कीमत लाख रुपये स्क्वायर गज से भी अधिक लेकिन सुविधाएं गाँव से भी बदतर ” जी हाँ अगर इस स्थिति का साक्षात दर्शन करना हो तो देश की राजधानी दिल्ली से कुछ ही किलोमीटर सटे अंतर्राष्ट्रीय शहर गुरुग्राम के किसी भी सेक्टर में चले आइये. जहाँ सरकारी तंत्र चरमराया हुआ और लोगों की जिंदगी असुविधाओं से घिरी हुई दिखेगी. हालात देख कर आपको सबकुछ अच्छी तरह समझ में आ जायेगा कि अखबारों में निजी एजेंसी द्वारा जिस शहर को रहने की दृष्टि से देश का सबसे अनुकूल सुरक्षित शहर घोषित किया गया है वहाँ के लोगों को आखिर किन परिस्थितियों का सामना करना पद रहा है. सरकार अखबारों में विज्ञापन देकर ढोल पीटते थकती नहीं है लेकिन यहाँ जनता की गाढ़ी कमाई पर चांदी कूट रहे नगर निगम गुरुग्राम के अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यशैली कितनी संवेदनशून्य है इसका नायाब नमूना हैं गुरुग्राम शहर के सेक्टर.

वैसे तो इस शहर को कमिश्नरों का शहर कहा जाता है. यहाँ एक दर्जन से अधिक कमिश्नर रैंक के अधिकारी तैनात हैं जिनमें डिविजनल कमिशनर, डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर से लेकर एम् सी जी कमिश्नर तक शामिल हैं. इनकी कार्यशैली को जवाबदेह बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने राईट तो सर्विस का नियम भी लागू कर दिया है. लेकिन इसका असर यहाँ होता नहीं दिखता है. जनता समस्याओं कि शिकायत लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटती रहती है और अधिकारी बैठकों में  व्यस्त रहते हैं.

देश के प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान 2.0 का कुछ ही दिन पूर्व आगाज किया है लेकिन इससे गुरुग्राम नगर निगम के अधिकारियों और इसके लिए अधिकृत एजेंसी पर इसका कोई असर होता नहीं दिखता है.जिसको लेकर एमसीजी को स्वयं संवेदनशील होना चाहिए उस समस्या की शिकायत करने के बावजूद उसका निराकरण नहीं होता है.

हालत यह है कि शहर के किसी भी दिशा में चले जाइए हर सड़क के किनारे कूड़े के ढेर पड़े हुए मिलेंगे. बावजूद इसके कि कूड़े की ढुलाई और निस्तारण के लिए यहाँ प्रतिवर्ष करोड़ों का ठेका जारी होता है.

शहर के पॉश सेक्टर 5 निवासी 90 साल के वरिष्ठ नागरिक रतन लाल यादव एक्स प्रिंसिपल अपने सेक्टर की सफाई की शिकायत नीचे से कमिशनर तक कर चुके हैं लेकिन अमल नहीं हुआ. कई बार एम॰सी॰जी॰ कमिश्नर कार्यलय पहुंचे फिर भी सेक्टर 5 और ग्रीन बेल्ट की सफाई नहीं हुई. इस सेक्टर को घेरने वाली सभी सड़कों के किनारे कूड़े का अम्बार लगा हुआ है जो यहाँ के निवासियों को इस बात का एहसास कराते हैं कि वे अंतर्राष्ट्रीय शहर गुरुग्राम के सेक्टर में रह रहे हैं.

स्वच्छ भारत अभियान में एमसीजी की ओर से लोगों से अपने सुझाव और शहर की सफाई व्यवस्था के बारे में अपना ओपिनियन देने को कहा जाता है. यह शहर पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में आखिर क्यों पिछड़ता है इसका कारण आसानी से समझा जा सकता है.

आर॰डबल्यू॰ए॰ सेक्टर 3,5&6 के प्रेसिडेंट दिनेश वशिष्ठ का कहना है कि  सेक्टर 3,5&6 के अन्दर ग्रीन बेल्ट की सफाई का बुरा हाल है। सफाई कर्मचारियों के पास कूड़ा उठाने के लिए न तो रिक्शा है ना ही कस्सी पंजी है. काफ़ी दिन से कूड़े उठाने के लिए ट्रैक्टर भी नहीं है। इसके कारण सफाई कर्मचारी सफाई कर कूडा वहीँ गली में ही इकट्ठा कर देते हैं। इसके कारण आस पास कि कालोनियों में रहने वाले और यहाँ से गुजरने वाले लोग भी यहाँ कूड़े डालने लगे ।उन्होंने बताया कि कई बार एस॰एस॰आई॰ बिजेन्दर शर्मा को भी शिकायत दी लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

सेक्टर 5 निवासी पवन सपरा कहते हैं कि अभी कुछ दिन पहले ही हुडा द्वारा आयोजित ऑनलाइन बोली में सेक्टर 3 ,5 और 6 के प्लॉट्स के लिए एक लाख रुपए से ऊपर की बोली लगाईं गई. जमीनों के रेट यहाँ सरकार ने जनता की जेब पर डाका डालने के लिए आसमान में पहुचा दिए. इन सेक्टरों में जिन लोगों ने प्लॉट लिए उन्हें स्वर्ग के बराबर सुविधाएँ और स्वच्छ वातावरण मुहैया करवाने के वायदे किये जाते हैं लेकिन यहाँ तो निम्न स्तर की मूलभूत सुविधाएँ भी बमुश्किल ही मिलती हैं. अगर मिलती हैं तो उसके लिए आर डब्ल्यू ए को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है. मूलभूत सुविधाओं में से एक सफाई कि व्यवस्था ही बदहाल है जिसको लेकर देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी सबसे ज्यादा मुखर हैं. पवन सपरा के अनुसार गन्दगी के ढेर से घिरे  सेक्टर 3,5&6 में रहने वाले लोग अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहें हैं।

आर॰डबल्यू॰ए॰ सेक्टर 3,5&6 के प्रेसिडेंट दिनेश वशिष्ठ ने कहा कि वार्ड लोगों को तब उम्मीद कि किरण दिखी थी जब वार्ड  9 की पार्षद प्रमिला गजे कबलाना सीनियर डिप्टी मेयर बनी थी . वार्ड में विकास कार्यों को गति मिलने की आशा भी थी. लेकिन अब स्थिति यह है कि  हमारे सेक्टर की सफाई भी नहीं हो पा रही है. अब सेक्टर की जनता स्थानीय पार्षद व सीनियर डिप्टी मेयर से विकास की उम्मीदछोड़ चुकी है ।

इन तीनों सेक्टरों में रहने वाले अधिकतर लोगों कि शिकायत है कि डिप्टी मेयर के पति गजे कबलाना जो पूर्व पार्षद भी उनका कार्य देखते हैं . डिप्टी मेयर और गजे सिंह कबलाना अब सेक्टर 3,5&6 की जनता का फोन भी नहीं उठाते हैं. सेक्टर की जनता अपने फैसले पर पछताने लगी है.

आर॰डबल्यू॰ए॰ के पदाधिकारियों ने अभी कुछ दिन पहले गुरुग्रं के विधायक  सुधीर सिंगला से भी मुलाकात कर समस्याओं के बारे में बताया था.  शहर की सभी आर॰डबल्यू॰ए॰ ने अपनी समस्या उनके सामने रखी थी. सभी ने एम॰सी॰जी॰ में आर॰डबल्यू॰ए॰ की बातों पर अमल करवाने कि मांग की थी.  यही बात कमिश्नर एम॰सी॰जी॰ व अन्य अधिकारियों के समक्ष राखी गई थी लेकिन अभी तक गुरुग्राम की आर॰डबल्यू॰ए॰ की उपेक्षा जारी है। नतीजतन शहर कि जनता बेचारगी भरे माहौल में जीने को मजबूर है.

आज कमिश्नर एम॰सी॰जी॰ व पार्षदों की हाउस मीटिंग भी हुई जिसमे पार्षद और अधिकारी एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते दिखे. विकास धीमा होने के लिए आपस में बहस करते दिखाई दिए. पार्षदों ने अधिकारीयों पर वही पुराना आरोप लगाया कि अधिकारी उनके कहने से काम नहीं करते जो पिछले चार साल से हाउस में यही सुनने को मिलता है.

सभी पार्षदों का कार्यकाल केवल एक साल बचा है. दिनेश वशिष्ठ का कहना है की गुड़गाँव के पार्षद शाहर का विकास कार्य करवाने में तो फेल रहे, कम से कम गुड़गाँव शहर की सफाई ही करवा दें.

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