कश्मीर में आतंकियों के शिकार हुए शिक्षकों की अंतिम यात्रा में शामिल हुए हजारों लोग : सिखों , हिंदुओं व मुस्लिम समुदाय के लोगों में जबरदस्त आक्रोश

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-सड़कों पर निकले हजारों लोग “खून का बदला खून” जैसे नारे लगाते देखे गए

-लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज कुमार सिन्हा बोले, आतंकियों को पाताल से भी ढूँढ़ कर ठिकाना लगायेंगे 

श्रीनगर :  कश्मीर में  आतंकवादियों  की बर्बरता की शिकार हुई महिला स्कूल प्रिंसिपल और एक शिक्षक  का आज अंतिम संस्कार कर दिया गया.  आतंकियों के इस अमानवीय कृत्य को लेकर कश्मीर में रह रहे अल्पसंख्यकों में जबरदस्त रोष और आक्रोश देखने को मिला.  महिला प्रिंसिपल की अंतिम यात्रा में सड़कों पर निकले हजारों सिखों , हिंदुओं  एवं मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ जबरदस्त रोष  का प्रदर्शन किया.  लोग खून का बदला खून जैसे नारे लगाते देखे गए.  पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए जबरदस्त जुनून देखने को मिला. 

 गुरुवार को श्रीनगर के सरकारी स्कूल की महिला प्रिंसिपल सतिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद्र की आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी.  बताया जाता है कि हथियारबंद तीन आतंकी दिनदहाड़े स्कूल में घुस आए थे और वहां मौजूद सभी शिक्षकों एवं  स्टाफ्स के आईडी कार्ड की जांच करते हुए इन दो लोगों को अलग कर इन्हें गोलियों से भून डाला.   स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि आतंकियों ने इन्हें सिख और हिंदू समझते हुए अलग कर जानबूझकर सामाजिक वैमनस्य पैदा करने की दृष्टि से गोलियों से भून डाला. 

 

महिला प्रिंसिपल सतिंदर कौर के बारे में जग जाहिर है कि वह  सदा मुस्लिम समुदाय के गरीब परिवारों के बच्चों व  बेसहारा बच्चों  की आर्थिक मदद भी करती थी और उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित करती रहती थी.  बावजूद इसके आतंकियों ने मानवता को कलंकित करने वाले कुकृत्य को शिक्षा के मंदिर में जाकर अंजाम दिया.  इस घटना से आहत श्रीनगर सहित कश्मीर के सभी जिले में अल्पसंख्यक वर्ग में ही नहीं बल्कि मुस्लिम बहुल इलाके में भी तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.

इसी का नतीजा आज महिला स्कूल प्रिंसिपल सतिंदर कौर की अंतिम यात्रा में तब देखने को मिला जब हजारों की संख्या में सिख , हिंदू  यहां तक कि मुस्लिम समुदाय के भी पुरुष और महिलाओं ने आतंकवाद एवं पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.  लोग आतंकियों को ठिकाने लगाने की मांग करते देखे गए.  कश्मीर में स्थापित सभी समुदायों के बीच भाईचारे के प्रति लोगों में आज भी संवेदनशीलता देखी गई जबकि आतंकियों के खिलाफ लोग न्याय की मांग कर रहे थे. 

कश्मीर में यह पहला मौका है जब अल्पसंख्यक समुदाय के साथ हुए जघन्य अन्याय के विरोध में मुस्लिम समुदाय के लोग भी सड़कों पर निकले और एक स्वर में आतंकवाद का प्रबल विरोध किया.  लोग इस बात से बेहद आहत थे कि 1 दिन पहले मेडिकल स्टोर चलाने वाले और कश्मीर के लोगों की लगातार कई दशकों से स्वास्थ्य के क्षेत्र में सेवा करने वाले मक्खन लाल बिंदरू की भी  नृशंस हत्या कर दी गई थी जबकि अब  श्रीनगर में शिक्षा का दीप जलाने वाले 2  निर्दोष शिक्षकों को  मौत के घाट उतार दिया गया. इससे पूर्व बिहार के एक प्रवासी मजदूर की हत्गोया कर दी गई थी जो गोल गप्पे बेच कर अपनी जिंदगी चलाते थे. 

 

इस घटना के विरोध में केवल कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरे देश में आक्रोश देखने को मिल रहा है.  सभी वर्गों के लोग शिक्षकों की नृशंस हत्या की निंदा ही नहीं कर रहे हैं बल्कि आतंकियों को तत्काल सबक सिखाने की मांग कर रहे हैं.  इस घटना ने कश्मीर में सीमित संख्या में  बस रहे अल्पसंख्यक हिंदू, सिक्ख और इसाईयों को अपनी सुरक्षा के प्रति एक बार फिर भयभीत कर दिया है, जबकि केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर सरकार की उस कोशिश को भी  झटका लगा है जिसके तहत वहां से विस्थापित पंडित समुदाय को दोबारा कश्मीर वापस स्थापित करने  की मुहिम चलाई जा रही थी.

 

 कश्मीरी पंडितों की आशंका एक बार फिर इन आतंकियों ने प्रबल कर दी है जिसके तहत उन्हें कश्मीर अपने घरों में वापस जाने से जान माल का खतरा महसूस होता है.  हालांकि कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज कुमार सिन्हा ने मीडिया को दिए बयान में आश्वस्त किया है कि अगले 48 घंटों के अंदर इस कुकृत्य को अंजाम देने वाले आतंकियों को पाताल से भी निकालकर उसे ठिकाना लगाएंगे.  उन्होंने साफ कर दिया है कि सुरक्षाबलों को पूरी स्वतंत्रता दी गई है कि वह मानवता के दुश्मनों  के खिलाफ किसी भी हद तक जाकर कार्रवाई करें और ऐसी नसीहत दें कि कोई आतंकी सदस्य इस प्रकार की घटना को अंजाम देने की जुर्रत न कर सके.

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