प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन लांच किया  

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सुभाष चौधरी 

नई दिल्ली : प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने आज आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन लांच किया. इस वृहत और महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत करते हुए उन्होंने लोगों को डिजिटल माध्यम से ही संबोधित किया.

प्रधानमन्त्री मोदी ने कहा कि बीते सात वर्षों में, देश की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का जो अभियान चल रहा है, वो आज से एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। यह असामान्य चरण है.

उन्होंने कहा कि आज एक ऐसे मिशन की शुरुआत हो रही है, जिसमें भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की ताकत है. 3 साल पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर पंडित जी को समर्पित आयुष्मान भारत योजना पूरे देश में शुरू हुई थी।

आज लांच की गई इस योजना पर ख़ुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि आज से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन भी पूरे देश में शुरू किया जा रहा है । आज आयुष्मान भारत को विस्तार मिला रहा है.

 

इतना बड़ा नेटवर्क दुनिया में कहीं नहीं :

 

पीएम ने कहा कि 130 करोड़ आधार नंबर, 118 करोड़ mobile subscribers, लगभग 80 करोड़ internet user, करीब 43 करोड़ जनधन बैंक खाते इतना बड़ा connected infrastructure दुनिया में कहीं नही है। ये digital infrastructure राशन से लेकर प्रशासन तक को तेज, पारदर्शी तरीके से सामान्य भारतीय तक पहुंचा रहा है:

 

उन्होंने कहा कि आरोग्य सेतु ऐप से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में बहुत मदद मिली। सबको वैक्सीन, मुफ्त वैक्सीन अभियान के तहत भारत आज करीब-करीब 90 करोड़ वैक्सीन डोज लगा पाया है तो इसमें Co-WIN का बहुत बड़ा रोल है. कोरोना काल में टेलिमेडिसिन का भी अभूतपूर्व विस्तार हुआ है।

 

उन्होंने दावा किया कि ई-संजीवनी के माध्यम से अब तक लगभग सवा करोड़ रिमोट कंसल्टेशन पूरे हो चुके हैं। ये सुविधा हर रोज़ देश के दूर-सुदूर में रहने वाले हजारों देशवासियों को घर बैठे ही शहरों के बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों से कनेक्ट कर रही है.

 

2 करोड़ से अधिक लोगों ने करवाए इलाज :

 

उनका कहना था कि आयुष्मान भारत- PM JAY ने गरीब के जीवन की बहुत बड़ी चिंता दूर की है। अभी तक 2 करोड़ से अधिक देशवासियों ने इस योजना के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा का लाभ उठाया है। इसमें भी आधी लाभार्थी, हमारी माताएं, बहनें, बेटियां हैं.

उनका कहना था कि जिन्होंने आयुष्मान भारत योजना के तहत अभी तक इलाज करवाया है, या जो अभी उपचार करा रहे हैं, उसमें से लाखों ऐसे साथी हैं, जो इस योजना से पहले अस्पताल जाने की हिम्मत नहीं कर पाते थे। वे दर्द सहकर जिंदगी की गाड़ी खींचते रहते थे। लेकिन पैसे की कमी की वजह से अस्पताल नहीं जा पाते थे।

 

प्रधानमन्त्री मोदी ने उम्मीद जताई कि आयुष्मान भारत- डिजिटल मिशन, अब पूरे देश के अस्पतालों के डिजिटल हेल्थ सोल्यूशंस को एक दूसरे से कनेक्ट करेगा। इसके तहत देशवासियों को अब एक डिजिटल हेल्थ आईडी मिलेगी। हर नागरिक का हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटली सुरक्षित रहेगा.

 

होलिस्टिक और समावेशी हेल्थ मॉडल :

 

उन्होंने ऐलान किया कि अब भारत में एक ऐसे हेल्थ मॉडल पर काम जारी है, जो होलिस्टिक हो, समावेशी हो। एक ऐसा मॉडल, जिसमें बीमारियों से बचाव पर बल हो,- यानि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, बीमारी की स्थिति में इलाज सुलभ हो, सस्ता हो और सबकी पहुंच में हो.

 

डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत के सामान्य मानवी को डिजिटल तकनीक से जोड़कर देश की ताकत अनेक गुना बढ़ा दी है।

हमारा देश गर्व से कह सकता है कि 130 करोड़ आधार नंबर, 118 करोड़ मोबाइल सब्सक्राबर, करीब 80 करोड़ इंटरनेट यूजर है. आरोग्य सेतु ऐप से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में बहुत मदद मिली।

कोविन पर रजिस्ट्रेशन से लेकर सर्टिफिकेशन तक का इतना बड़ा प्लेटफॉर्म दुनिया के कई बड़े-बड़े देशों के पास तक नहीं है।कोरोना काल में टेलिमेडिसिन का भी अभूतपूर्व विस्तार हुआ है।

 

अस्पतालों को कनेक्ट करेगा :

 

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, अब पूरे देश के अस्पतालों के डिजिटल हेल्थ सोल्यूशंस को एक दूसरे से कनेक्ट करेगा।

 

पीएम ने कहा कि डिजिटल हेल्थ आईडी के माध्यम से मरीज खुद भी और डॉक्टर भी पुराने रिकॉर्ड को जरूरत पड़ने पर चेक कर सकता है। इसमें डॉ, नर्स, पैरा मेडिक जैसे साथियों का भी रजिस्ट्रेशन होगा। देश के जो अस्पताल हैं, क्लीनिक हैं, लैब्स हैं, दवा की दुकानें हैं ये सभी भी रजिस्टर होंगी।

 

उन्होंने कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बहुत जरूरी है कि गांवों की चिकित्सा सेवाओं में सुधार हो। आज गांव और घर के निकट ही प्राइमरी हेल्थ केयर से जुड़े नेटवर्क को सशक्त किया जा रहा है। अभी तक ऐसे 80,000 सेंटर चालू हो चुके हैं.

 

गरीबी के कारण अस्पातल नहीं जा पाते थे :

 

प्रधानमन्त्री ने कहा की हमारे देश में ऐसे परिवारों कि संख्या काफी है जो अबतक अपना इलाज करने के लिए गरीबी के कारण अस्पातल नहीं जा पाते थे. खासकर महिलायें और लडकियां इस स्थिति का अधिक शिकार होती थीं. ऐसे बुजर्ग भी हैं जो अपना इलाज करने से बचते थे क्योंकि वे अपनी संतानों पर कर्ज छोड़कर नहीं जाना चाहते हैं.

पीएम ने आश्वस्त किया कि आयुष्मान भारत और अब डिजिटल मिशन के माध्यम से स्थिति बदलेगी. आम जन गावों में रहते हुए भी अपना इलाज करवा सकेंगे जबकि वे पाने हेल्थ रिकार्ड आवश्यकतानुसार स्वयं भी देख सकेंगे जबकि उनके डाक्टर भी इसका उपयोग कर सकेंगे.

उन्होंने कहा की आज आयुष्मान भारत ऐसे लोगों के लिए बहुत बड़ा संबल बन गया है. उन्हें कोरोना के दौरान और इससे पूर्व भी मदद मिली. पिछले दो वर्षों में लाखों परिवारों ने इसका लाभ लिए और वे गरीबी के कुचक्र से बचे हैं क्योंकि उन्हें उन्हें अपने इलाज पर खर्च नहीं करना पडा.

 

आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन का क्या है लाभ ?

 

प्रधानमन्त्री मोदी ने कहा की हेल्थ रिकॉर्ड के अभाव में लोगों को हर शहर में जाकर फिर उसी टेस्ट और अन्य स्वास्थ्य व्यवस्था से गुजरना पड़ता है. सालोंसाल पुराने रिकॉर्ड को ढोना पड़ता है. इससे मरीज और डॉक्टर दोनों का समय बर्बाद होता है. परेशानी के साथ ईलाज का खर्च भी अधिक बढ़ जाता है. उन्होंने आश्वस्त किया कि अब यह परेशानी दूर हो जायेगी क्योंकि सभी के हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल उपलब्ध होंगे. उन्हें हेल्थ कार्ड दिया जायेगा जिससे वे अपने रिकॉर्ड देख सकेंगे.

इस नई व्यवस्था से अब अच्छे अच्छे डाक्टरों के बारे में भी जानने में मदद मिलेगी. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से अब पूरे देश के अस्पतालों को एक दूसरे से कनेक्ट करने में मदद मिलेगी. इसमें डाकटर, नर्स, पारामेडिकल स्टाफ्स का भी रजिस्ट्रेशन होता है. अस्पताल, हेल्थ सेंटर्स और दवा कि दुकाने भी रजिस्टर्ड होंगी. यानी अब हेल्थ से जुड़े सभी पक्षों को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर लायेगा जिसका सीधा फायदा आम लोगों को होगा. इसका सबसे बड़ा लाभ देश के ग़रीबों और माध्यम वर्ग को होगा.

 

अब लोगों को ऐसा डॉक्टर ढूँढने में भी मदद मिलेगी जो उनकी भाषा जनता है, उस बीमारी का उत्तम इलाज करा सकता है और अनुभवी है. देश के किसी भी कोने में विशेषग्य से संपर्क कर सकते हैं जबकि टेस्ट लैब और दवाई कि दुकाने भी मिलेंगी.

 

उन्होंने कहा कि अब विशेषग्य डाकटर कहीं भी रहकर दूर दराज के इलाके में भी अपनी सेवा दे सकेंगे. देश में सहज और सुलभ स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाने का जो अभियान शुरू हुआ है वह पिछले 6 – 7 साल कि सतत प्रक्रिया का नतीजा है. बीते वर्षों में दशको पुरानी स्वास्थ्य व्यवस्था में लोगों के हित में बदलाव लाया गया है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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