आईकैट के इंटरनेशनल सिंपोजियम ऑन आटोमोटिव टायर टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञों ने एयर लेस टायर को भविष्य की जरूरत बताया

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सुभाष चौधरी

गुरुग्राम :  इंटरनेशनल सेंटर फॉर आटोमोटिव टेक्नोलॉजी ऑफ इंडिया (आईकैट) की ओर से आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल सिंपोजियम ऑन आटोमोटिव टायर टेक्नोलॉजी में देश और विदेश के दर्जनों विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किये। 14 व 15 जनवरी को आयोजित यह चौथा संस्करण था. इस समारोह का उद्घाटन करते हुए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के डिप्टी डायरेक्टर जनरल, जयंत राय चौधरी ने आने वाले समय में वाहनों के लिए किफायती फ्यूल और सुरक्षित टायर की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि वाहनों की दुनिया में हो रहे तेज तकनीकि विकास और उपभोक्ताओं की आवश्यकता को देखते हुए टायर तकनीक में भी बदलाव की जरूरत है. यह पर्यावरण की दृष्टि से भी प्रासंगिक है क्योंकि इससे ध्वनि प्रदूष्ण का विषय भी जुड़ा हुआ है जबकि वाहन चालकों की सुरक्षा को भी प्रभावित करता है.

सेमीनार को संबोधित करते हुए ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिसेंसी (बी ई ई ) के निदेश, सौरभ दिड्डी ने एनर्जी एफिसेंसी टायर्स के लिए स्टार रेटिंग प्रोग्राम की विस्तार से जानकारी दी. उनका कहना था कि टायर स्टार रेटिंग से कार्बन डाई ऑक्साइड के बढ़ते खतरे को भी कम करने में मदद करेगा जबकि फ्यूल की खपत को भी कम कर इसके होने वाले खर्चे को भी कम करेगा. यह उपभोक्ताओं के लिए टायर रिप्लेसमेंट के चयन में भी मददगार साबित होगा.  

इंटरनेशनल सिंपोजियम ऑन आटोमोटिव टायर टेक्नोलॉजी के उद्घाटन सत्र में अपने संबोधन में इंटरनेशनल सेंटर फॉर आटोमोटिव टेक्नोलॉजी ऑफ इंडिया (आईकैट) के निदेशक दिनेश त्यागी ने एयर लेस टायर टेक्नोलॉजी की संभावनाओं पर बल दिया. केंद्र सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा के मद्देनजर नियमों में किये गए परिवर्तन की विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि भविष्य में एयर लेस टायर टेक्नोलॉजी ही उपभोक्ताओं की सुरक्षा व अन्य आवश्यक पहलुओं की पूर्ति करेगा. श्री त्यागी ने आईकैट मानेसर में उपलब्ध अंतर्राष्ट्रीय स्तर AIS:142. की टायर टेस्टिंग सुविधा की भी जानकारी दी.    

इस अवसर पर आईकैट के सेंटर -2 के सीबीओ एस के कालिया ने टायर टेस्टिंग सुविधाओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत का उत्तम उदाहरण बताया. उनका कहना था कि इसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर विकसित किया है जिसे सर्टिफिकेशन एन ए बी एल (ISO:17025) से और बी आई एस से मान्यता मिली हुई है. उनके अनुसार आईकैट में रोलिंग रेसिस्टेंस और वेट ग्रिप टेस्ट की भी सुविधा है जो टायर की बी ई ई की स्टार रेटिंग के लिए अति आवश्यक है. टायर उप्तादकों की आवश्यकता के अनुसार यहाँ रोलिंग साउंड एमिशन टेस्ट, एन वी एच टेस्ट (इनडोर) और आई एस ओ ट्रैक्स की भी व्यवस्था है.

इससे पूर्व एचएएसएटीआरआई  के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी डॉ आर मुखोपाध्याय जो जे के टायर एंड इंडस्ट्री के भी निदेशक ( आर एंड डी ) है ने टेक्नीकल सत्र के आरम्भ में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार टायर टेक्नोलॉजी में हो रहे बदलाव की व्याख्या की. उन्होंने इस कर्म में कई ख़ास रिसर्च की चर्चा करते हुए इस क्षेत्र में उनकी कंपनी की ओर से किये जा रहे प्रयास की जानकारी भी दी.

समारोह के टेक्नीकल सत्र में भारत, स्वीडन और ओमान के विशेषज्ञों की ओर से भी अपने अनुभव साझा किये गये. उन्होंने अपने अपने टेक्नीकल पेपर्स भी प्रस्तुत किये. विदेशी विशेषज्ञों ने वैश्विक रेगुलेशन और बाहर के देशों में टायर टेक्नोलॉजी पर चल रहे काम की भी जानकारी दी.  

इस कार्यक्रम का केंद्र बिंदु एयरलेस टायर रहा. क्या यह क्रांतिकारी कदम इसे भविष्य का टायर बना पायेगा ? यह टायर पर्यावरण के अनुकूल होगा? कम जटिल उत्पादन,  ग्रूव पैटर्न, ब्रेक के लिए अधिक स्थान की संभावना टटोलने , कम रोलिंग ध्वनि, रोलिंग प्रतिरोध, कोई पंचर जोखिम नहीं , अनियमित टायर उपयोग पर नियंत्रण, और इसे और अधिक स्पोर्टी बनाने के लिए नए वाहन डिजाइन में सुधार की संभावनाओं पर गहन विचार किया गया. सेमीनार को मैसेलिन इंडिया टेक्नीकल सेंटर के मेनेजिंग डायरेक्टर डॉ अरुण जौरा एवं सी ई ए टी के कार्यकारी निदेशक टॉम के थॉमस ने भी संबोधित किया एवं अपने अनुभव साझा किये.

सेमीनार के दूसरे दिन विशेषज्ञों द्वारा “New Policies of Tyre Trade under the vision of Atmanirbhar Bharat” विषय पर दिलचस्प पैनल चर्चा हुई. इसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, यातायात विभाग के अधिकारी, टायर इंडस्ट्री के प्रतिनिधि, ओ ई एम्, ए टी एम् ए /आई टी टी ए सी, डी पी आई ई टी, रिसर्च इंस्टिट्यूट, शिक्ष्ण संस्थानों और ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिसेंसी के दर्जनों प्रतिनिधियों व विशेषज्ञों ने भाग लिया. कार्यक्रम का समापन आईकैट के एजीएम अमित करवाल जो iSATT’21 के संयोजक भी थे की ओर से प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव से किया गया.  

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