गुरुग्राम में सौ कंपनियों ने खोलने की अनुमति मांगी : सीसीटीवी से होगी निगराणी

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एडिशनल चीफ सेक्रेटरी वी एस कुंडू बोले : श्रमिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा की देनी होगी गारंटी तभी मिलेगी अनुमति 

औद्योगिक परिसरों की निगराणी के लिए जिला प्रशासन करेगा कंट्रोल रूम की स्थापना  

सभी कंपनियों को सीसीटीवी की एक्सेस श्रम विभाग को देनी होगी अनिवार्य 

श्रमिकों को अपने परिसर में रखने वाली कंपनियों को ही मिलेगी अनुमति  

सुभाष चन्द्र चौधरी

गुरुग्राम। हरियाणा सरकार की एडीशनल चीफ सेक्रेट्री एवं गुरुग्राम में कोविड-19 रोकथाम के लिए नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त वीएस कुंडू ने बताया कि गुरुग्राम में औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियां पुनः शुरू करने के लिए अनुमति देने की प्रक्रिया शुरू है। इसके लिए विभिन्न स्तर पर अलग-अलग कमेटियां गठित कर दी गई हैं । अभी तक लगभग 100 कंपनियों ने अनुमति लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए हैं। उन पर विभिन्न स्तरों पर विचार किया जा रहा है। भारत सरकार एवं हरियाणा सरकार की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए अनुमति दी जाएगी। अनुमति लेने वाली सभी औद्योगिक इकाइयों के परिसर पर सीसीटीवी के माध्यम से कड़ी नजर रखी जाएगी जिसके लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह सही है कि गुरुग्राम साइबर सिटी के रूप में प्रदेश ही नहीं देश का ही एक बहुत बड़ा औद्योगिक हब है. अगर यहां आर्थिक और औद्योगिक गतिविधि को शुरू करने की बात की जाए तो इस बात का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होगा कि किसी भी गतिविधि को स्वास्थ्य की दृष्टि से पूरे सुरक्षात्मक उपायों के साथ करना होगा. औद्योगिक व व्यावसायिक इकाइयों में काम करने वाली सभी प्रकार के श्रमिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना हमारी पहली प्राथमिकता है. हमारी जिम्मेदारी है कि किसी भी श्रमिक को कोरोना वायरस के संक्रमण से किसी भी स्थिति में बताया जाए इसलिए हम इंडस्ट्री को पुणे खोलने की अनुमति देने के क्रम में बेहद सावधानी बरतना चाहते हैं. कार उद्योगों को खोलने की अनुमति देना चाहती है लेकिन आवश्यक गाइडलाइन का पालन कराते हुए. श्री कुंडू ने बताया कि अब तक अनुमति लेने के लिए लगभग सौ औद्योगिक प्रतिष्ठानों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं. उन सभी आवेदनों पर गहन अध्ययन करने और उनके द्वारा मुहैया कराई गई सूचनाओं का विश्लेषण करने के लिए अलग अलग समितियां गठित कर दी गई है.

उनका कहना है कि सभी समितियों ने उन सभी आवेदनों पर विचार करना शुरू कर दिया है. अनुमति देने के क्रम में संबंधित कमेटी इस बात पर पूरी तरह आश्वस्त हो जाना चाहेगी कि औद्योगिक प्रतिष्ठान अपने श्रमिकों को लाने ले जाने या फिर अपने परिसर में ही ठहरने एवं भोजन की सुरक्षित व्यवस्था करेंगे. कमेटी के सदस्य भारत सरकार एवं हरियाणा सरकार की गाइडलाइन का अक्षर से पालन कराने के लिए पूरी तहकीकात करेगी. अधिकृत कमिटी या भी सुनिश्चित करेगी की प्रबंधन काम करने के दौरान भी श्रमिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करें.

सरकार की प्राथमिकता के सवाल पर एडीशनल चीफ सेक्रेट्री वी एस कुंडू ने कहां कि हमारी पहली प्राथमिकता गुरुग्राम में कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से किसी भी कीमत पर रोकना है. इसके साथ ही गुरुग्राम में रहने वाले सभी प्रकार के श्रमिकों एवं मजदूरों की मुकम्मल देखभाल एवं स्वास्थ्य सुरक्षा की व्यवस्था करना भी हमारी प्राथमिकता की पहली सूची में शामिल है.

हमारी दूसरी प्राथमिकता है यहां रहने वाले सभी श्रमिकों व मजदूरों को उनकी आजीविका की दृष्टि से काम का अवसर प्रदान करना. कहां की लगभग 1 माह हो चले हैं और इस बात की आवश्यकता महसूस की जा रही है कि श्रमिकों व मजदूरों के लिए आर्थिक व व्यावसायिक गतिविधियों को सुरक्षात्मक उपायों के साथ एक निश्चित सीमा में शुरू की जाए. यह अलग बात है कि प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से उनका पूरा ख्याल अभी तक रखा गया है. हम चाहते हैं कि उन्हें काम का अवसर प्रदान करने के लिए चरणबद्ध तरीके से औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को शुरू किया जाए।उन्होंने स्पष्ट किया कि की ऐसी इंडस्ट्री को प्राथमिकता दी जाएगी जहां बहुत ज्यादा श्रमिक काम करते हैं जिससे कि उनमें से कुछ श्रमिकों की आजीविका चल सके।

अनुमति देने के क्रम में यह देखना आवश्यक होगा कि संबंधित औद्योगिक इकाइयों के परिसर में काम के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने की व्यवस्था है या नहीं जबकि दूसरी तरफ श्रमिकों को लाने ले जाने की व्यवस्था गाइडलाइन के अनुरूप प्रबंधन कर पाएंगे या नहीं। यह भी अनिवार्य होगा कि काम करने के दौरान भी आपस में दो श्रमिकों के बीच में अपेक्षित दूरी बनी रहे। जिन कंपनियों में शिफ्ट में काम होते हैं उनमें शिफ्टों के बीच में आवश्यक अंतराल बनाना पड़ेगा जिससे श्रमिकों के आने जाने में भी सोशल डिस्टेंसिंग के फार्मूले को कोई खतरा नहीं पहुंचे।

इसके अलावा परिसर में श्रमिक या फिर अधिकारी स्तर के व्यक्तियों के आने-जाने के समय सभी की थर्मल स्कैनिंग करना भी अनिवार्य होगा। श्रमिकों के भोजन की व्यवस्था में भी अंतराल बनाए जाने की अनिवार्यता होगी जिससे आपस में किसी भी प्रकार का सामाजिक या फिजिकल मेलजोल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि जिन इंडस्ट्रीज ने इस प्रकार की व्यवस्था कर ली है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।

एसीएस ने कहा की कंस्ट्रक्शन साइट्स को काम शुरू करने की इजाजत तभी दी जा सकेगी जब उनके परिसर में ही श्रमिकों के ठहरने और भोजन की नियमानुसार व्यवस्था होगी। बल देते हुए उन्होंने कहा कि कंस्ट्रक्शन साइट पर श्रमिकों की ट्रांसपोर्टेशन से आने जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अन्य प्रकार की औद्योगिक इकाइयों में भी प्राथमिकता उन्हें मिलेगी जिनके परिसर में श्रमिकों की ठहराने की व्यवस्था होगी या फिर उनके आसपास स्थापित श्रमिक कालोनियों में रहने की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि इंटर स्टेट श्रमिकों से काम कराने की किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं मिलेगी। दूसरे राज्यों से श्रमिकों के आने जाने से कोरोना संक्रमण के फैलने का खतरा रहेगा। हां तक की एक ही राज्य में इंटर डिस्ट्रिक्ट मूवमेंट को भी परमिट करना संभव नहीं होगा। दूसरे जिले से नियमित तौर पर श्रमिकों या मजदूरों की आवाजाही बिना देखरेख की परेशानी पैदा कर सकती है। इनके अलावा अगर गुरुग्राम जिले में भी लंबी दूरी से श्रमिकों या मजदूरों को लाकर काम कराने की स्थिति होगी तो भी संबंधित औद्योगिक इकाई को अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा बना रहेगा जो स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से वर्तमान परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

उनका मानना है कि पिछले काफी समय से जिस तरह सामान्य नागरिकों को उनके घरों तक सीमित रखने की कोशिश की गई है उसी तरह से औद्योगिक इकाइयों को आंशिक तौर पर खुलने की अनुमति देने पर भी उन श्रमिकों या मजदूरों को उन्हीं सीमाओं तक सीमित रखा जाए जिससे एक भी संक्रमित व्यक्ति पाए जाने पर संक्रमण की सीमा वहीं तक सीमित रहे।

अनुमति लेने वाली इंडस्ट्री गाइडलाइंस का पालन कर रही है या नहीं इसकी मॉनिटरिंग की व्यवस्था के सवाल पर उनका कहना था की इसके लिए विभिन्न स्तर पर व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अपने सीसीटीवी की एक्सेस श्रम विभाग के अधिकारियों को देनी अनिवार्य होगी। नोडल अधिकारी श्री कुंडू ने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से एक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा जहां से सभी औद्योगिक संस्थानों की सीसीटीवी पर नजर रखी जाएगी। इसके माध्यम से उन प्रतिष्ठानों के अंदर सभी शाखाओं में होने वाली गतिविधियों पर श्रम विभाग के अधिकारियों की पूरी नजर होगी जिससे फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाए।
इंडस्ट्री की मॉनिटरिंग के लिए श्रम विभाग एचएसआईआईडीसी और इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों को लगाया जाएगा। साथ ही वॉलिंटियर्स भी तैनात होंगे जो समय-समय पर उन उद्योग इकाइयों का औचक निरीक्षण कर गाइडलाइन के पालन की स्थिति का आकलन करेंगे। शिफ्ट मैनेजमेंट वर्कशॉप मैनेजमेंट या फिर ट्रैवल मैनेजमेंट की व्यवस्था की निगरानी की जाएगी। अगर किसी भी संस्थान द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया तो उनकी अनुमति रद्द कर दी जाएगी। या फिर संक्रमण कि किसी आशंका के मद्देनजर उस क्षेत्र को कंटेनमेंट एरिया घोषित करना पड़ा तो भी उनकी अनुमति रद्द होगी।

इंडस्ट्रियल सेक्टर्स को छूट देने की प्रक्रिया की तारीख के संबंध में उनका कहना था की यह समय सीमा में नहीं बांधा जा सकता क्योंकि इस संवेदनशील स्थिति में हम सभी औद्योगिक आवेदकों से उनकी व्यवस्था को लेकर खुलकर बात कर रहे हैं और हमारी कमेटी के सदस्य उनका गंभीरता से आकलन कर रहे हैं। या प्रक्रिया शीघ्र ही पूरी की जाएगी।

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