सीएम मनोहर लाल ने लिया बाढ़ बचाव उपाय का जायजा

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– चंडीगढ़ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की सभी उपायुक्तों के साथ की बैठक
– गुरुग्राम में उपायुक्त अमित खत्री ने कहा कि जिला में 250 तालाबों का किया जाएगा जीर्णोद्धार

–  वर्षा पानी को 250 तालाबों में किया जाएगा पंप आउट

गुरुग्राम, 4 जनवरी। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों के साथ बाढ़ बचाव कार्यो की समीक्षा की और कहा कि लगातार 2 साल से फ्लड कंट्रोल की बैठक वे जनवरी माह में करते आ रहे हैं ताकि पहले से बाढ़ बचाव उपायों के तहत काम करने का समय मिले। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि वे समयबद्ध तरीके से इन उपायों पर काम करें ताकि बरसात के दिनों में लोगों को बाढ़ जैसी स्थिति का सामना ना करना पड़े।

इस बैठक में गुरुग्राम के उपायुक्त अमित खत्री ने बताया कि जिला में बादशाहपुर ड्रेन को नजफगढ़ ड्रेन से जोड़ दिया गया है जिससे अब बादशाहपुर ड्रेन ओवरफ्लो नहीं करेगी और इसका पानी सुचारु रुप से नजफगढ़ ड्रेन में चला जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष नरसिंहपुर गांव के निकट अस्थाई रूप से लगभग 3 घंटे जो जल भराव हुआ था, उसका समाधान भी गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण तथा नगर निगम गुरुग्राम द्वारा किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि जिला में 250 तालाबों की पहचान करके उनका जीर्णोद्धार किया जा रहा है ताकि बरसात का फालतू पानी पंप आउट करके उनमें डाला जा सके, जिससे अनावश्यक जलभराव नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इस से भूमिगत जल को रिचार्ज करने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने सभी मंडल आयुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे बाढ़ बचाव कार्यों का समय-समय पर सुपरविजन करें।

वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने बाढ बचाव उपायों के साथ-साथ बरसाती पानी के संचयन के प्रबंध करने के भी निर्देश दिए । उन्होंने कहा कि बाढ़ बचाव के अंतर्गत पहले जो योजनाएं लागू की गई है उनकी भी जियो टैगिंग करवा कर मॉनिटरिंग करें कि वे ठीक प्रकार से चल रही है अथवा नहीं।

आज की बैठक में बताया गया कि हरियाणा सरकार ने सीवरेज के शोधित पानी को री-यूज करने की पॉलिसी अधिसूचित की है जिसके तहत गैर सीवरेज प्रणाली वाले क्षेत्र के सीवरेज के पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित किए बिना सीधे किसी भी ड्रेन में नहीं डाला जाएगा। सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह ने बैठक में बताया कि सीवरेज के शोधित पानी का प्रयोग सिंचाई तथा अन्य गैर घरेलू कार्यों जैसे गार्डनिंग, पावर प्लांट में कूलिंग कार्यों, उद्योगों आदि में प्रयोग में लाया जाएगा। यही नहीं सरकार के सिंचाई विभाग द्वारा इस पानी का प्रयोग खेतों में सिंचाई हेतु करने के लिए नहरों के साथ साथ पाइप लाइन बिछाई जाएगी। जिन दिनों में नहर में पानी नहीं आता और सिंचाई की आवश्यकता होगी तो उसके स्थान पर यह पानी किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके लिए विभाग द्वारा 747 क्यूसेक पानी का प्रयोग सिंचाई हेतु करने को लगभग 1098 करोड रुपए की योजना पूरे प्रदेश के लिए बनाई है। मुख्यमंत्री ने इस पर कहा कि नहरी पानी को बचाकर पेयजल की कमी को पूरा करें और सिंचाई के लिए ज्यादा से ज्यादा सीवेज का शोधित पानी उपलब्ध करवाने का प्रयास करें। श्री मनोहर लाल ने यहां तक कहा कि बरसात के दिनों में फालतू बरसाती पानी के स्टोरेज की भी व्यवस्था करने की संभावनाओं पर काम किया जाए।

सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह ने बताया कि आज दोपहर 12:00 बजे से लगभग 2 घंटे तक राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह की अध्यक्षता में फ्लड कंट्रोल की हरियाणा राज्य टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की 51वी बैठक भी आयोजित की गई थी जिसमें सभी उपायुक्तों के साथ बाढ़ बचाव कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि इस 51 वीं बैठक में बाढ़ बचाव के अंतर्गत लगभग 198 करोड 31 लाख रुपए की 203 योजनाएं प्रदेश के सभी जिलों में क्रियान्वित की जाएंगी। इनमें 120 स्कीम शार्ट टर्म की हैं, 76 मीडियम टर्म की तथा 7 लॉन्ग टर्म की है। कार्यो की किस्म के अनुसार ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि इसमें बंद अथवा रेवरमेंट के लगभग एक सौ कार्यों पर 80.32 करोड़ रुपए, पंप तथा मशीनरी खरीदने के 32 कार्यों पर 55.88 करोड़ रुपए, ब्रिज अथवा पुल निर्माण के 19 कार्यों पर 25.17 करोड़ रूपए, पंप तथा मशीनरी खरीद के 31 कार्यों पर 23.79 करोड रूपए तथा डी-वाटरिंग पाइप लाइंस अर्थात पानी निकासी की पाइप लाइन बिछाने के 21 कार्यों पर 15.14 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी।

शिव धाम योजना के शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण करने के निर्देश

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिव धाम योजना के अंतर्गत हर जिला में करवाए गए कार्यो की भी समीक्षा करते हुए कहा कि इस योजना के तहत सभी कार्य शतप्रतिशत पूर्ण होने चाहिए। प्रदेश का कोई भी श्मशान घाट या कब्रिस्तान ऐसा ना रहे जहां पर चार प्रकार के कार्य ना हुए हो। इनमें श्मशान घाट या कब्रिस्तान का रास्ता पक्का करना, उसकी चारदीवारी, वहां शेड लगाना तथा पानी की व्यवस्था करना शामिल है।

 तालाब अथॉरिटी के साथ मिलकर करें तालाबों के विकास पर बल

मुख्यमंत्री ने आज भूमिगत जल संचयन को लेकर प्रदेश में उपलब्ध तालाबों तथा जोहड़ों का विकास करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि यह कार्य तालाब अथॉरिटी के माध्यम से किया जाएगा लेकिन जिला प्रशासन भी अपने जिला में 5 तालाबों की पहचान करके कम से कम एक तालाब को मॉडल तालाब के रूप में विकसित करें। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 14000 तालाब हैं जिनका जीर्णोद्धार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

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