दुकानदार नये नोट को नकली बता कर सामान नहीं देते

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धर्मेन्द्र यादव 

फरीदाबाद : घंटो लम्बी-लम्बी लाइन में लगकर दो हजार रूपए का नया नोट प्राप्त करने के बावजूद लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है। दुकानदार नये नोट को या नकली बता कर सामान नहीं दे रहे या फिर खुले पैसे न होने के कारण बताकर ग्राहकों को वापिस भेजने पर मजबूर है।

मार्किट में खुले पैसे और नई करंसी की कमी के चलते, बाजार सूने पड़े है और लोग जरूरत का सामान खरीदने के लिए भी भटक रहे है। बिना कोई प्रबंध किए एकाएक 500 और एक हजार का नोट बंद कर देने से लोगों को बैंकों से पैसे बदलवाने व जमा कराने से लेकर निकालने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शादी वाले घरों के लोग तो और भी परेशान है कि करें तो क्या करें। दुकानदारी प्रभावित होने के चलते दुकानदारों ने मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ दुकाने ही बंद कर दी।

 

बाजार बंद रहने का यह द्रश्य बल्लभगढ और फरीदाबाद का है। जहां ग्राहक तो इसलिए परेशान है कि पैसा लेकर घूमने के बाद भी उन्हे सामान नहीं मिल रहा है और दुकानदार खुले पैसे न होने के कारण लोगों का सामान नहीं दे पा रहे है। दुकानदारी पूरी तरह चौपट होने से नाराज दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद करके मोदी सरकार के फैसले के प्रति नाराजगी प्रकट की और कहा कि इससे पहले नई करंसी का पूरा प्रबंध होना चाहिए था और दोनो नोट एक साथ बंद नहीं होने चाहिए थे। इससे आम लोगों की परेशानी बढ़ रही है।

 

 काम-धंधे छोडकर बैंकों के सामने लम्बी-लम्बी लाइन लगाकर अपने पुराने नोट बदलवाने वाले लोग अब इस बात से परेशान है कि नए नोट को कोई नकली बता रहा है तो कोई खुले पैसे न होने कारण उन्हे सामान नहीं दे रहा है। अब न तो पुराने नोटों से बाजार में सामान मिल रहा है और न ही नये नोट से।

 

महिलाओं का कहना है कि उन्हे रोज मर्रा की वस्तुएं खरीदने में भी भारी परेशानी हो रही है। दुकानदार दो हजार के नए नोट को भी लेने को तैयार नहीं है। क्योंकि उसके पास सामान देने के बाद ग्राहक को खुले पैसे देने को ही नहीं है। शादी को लेकर परेशान एक महिला का कहना है कि पुराने नोट कोई ले नहीं रहा है और नए इतने नोट मिल नहीं रहे कि वे शादी का खर्चा कर सकें। उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। वे सरकार को कोस रहे है कि बिना उचित प्रबंध के पांच सौ और एक हजार का नोट बंद कर दिया गया।

 

वहीं दुकानदार का कहना है कि दुकानों से ग्राहक बिलकुल गायब हो चुके है। जो आ रहे या तो उनके पास पुराने नोट है या फिर दो हजार का नया नोट है। ऐसे में वे सामान देने के बाद उन्हे खुले पैसे कहां से दें। जबकि उनके पास ही नए नोट नहीं है। सरकार ने बिना किसी प्रबंध के नोट बंद करके सभी को रास्ते पर खड़ा कर दिया है। बुजुर्ग घंटो लाइन में लगे रहते है। जबकि उनके बस में इतने समय तक खड़ा होना नहीं है। कई तो चक्कर आकर गिर गए और इलाज पर पैसे और खर्च हो गए।
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