गुरुग्राम में 10 लाइसेंसी कॉलोनियों को निगम में टेक ओवर करने की प्रक्रिया हुई तेज

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–    निगमायुक्त यशपाल यादव की अध्यक्षता में कॉलोनाईजर प्रबंधन के साथ हुई बैठक
–    शनिवार को गुरूग्राम में टाऊन एवं कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक की  अध्यक्षता में आयोजित होगी विशेष बैठक 

–     कालोनियों की रिवाइज डीपीआर जारी 

गुरुग्राम, 12 जुलाई। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्देशानुसार लाइसेंस कॉलोनियों को नगर निगम में शामिल करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसको लेकर नगर निगम आयुक्त यशपाल यादव की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। नगर निगम कार्यालय में आयोजित इस बैठक में रिवाइज डीपीआर पर चर्चा की गई। 

निगमायुक्त ने कॉलोनाईजर प्रतिनिधियों से कहा कि शनिवार को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के महानिदेशक कॉलोनी ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर बैठक करेंगे। इससे पूर्व सभी कालोनाइजर रिवाईज डीपीआर को अच्छी तरह से देख लें। उन्होंने कहा कि नगर निगम इन कॉलोनियों को टेकओवर करने के लिए तैयार है, ताकि कॉलोनी वासियों को बेहतरीन सुविधाएं मुहैया करवाई जा सकें। कॉलोनाईजर जल्द से जल्द हैंडओवर की प्रक्रिया करे। उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल द्वारा लाईसैंस कॉलोनियों  को नगर निगम में शामिल करने के आदेश के बाद नगर निगम ने 8 कालोनियों की डीपीआर तैयार की थी। इस डीपीआर में इन्फ्रास्ट्रक्चर में बुनियादी ढांचे की कमी, अतिरिक्त बुनियादी ढांचा, विशेष मरम्मत, आपरेशॅन एंड रख-रखाव (5 साल), अतिरिक्त निर्माण पर आंकलन कर इसकी राशि निकाली गई थी। लेकिन डीपीआर के संबंध में कालोनाइजरों ने टाउन प्लानिंग और अर्बन लोकल बॉडी में आपत्ति दर्ज कराई थी। सरकार ने सभी आपत्तियों का समाधान कर दिया है, जिसके तहत रिवाईज डीपीआर तैयार की गई है।

गौरतलब है कि डीएलएफ फेज 1, 2, 3, सुशांत लोक-1, पालम विहार, सनसिटी, साउथ सिटी-1, 2 समेत कुल 8 कालोनियों को निगम में शामिल करने के लिए प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। पहली मई 2018 को चंडीगढ़ में हुई उच्च स्तरीय बैठक में ट्रांस्फर प्रक्रिया को सिरे चढ़ाने के लिए विभिन्न निर्णय लिए गए। जिसमें डीपीआर को रिवाइज करने का भी निर्णय भी शामिल था। इस निर्णय के बाद सरकार द्वारा डीपीआर से संबंधित कालोनाइजर की सभी आपत्तियों का समाधान कर डीपीआर रिवाइज कर दी है और अब केवल लाइसेंस के समय विकसित कालोनी के सर्विस एस्टीमेट के आधार पर बुनियादी ढांचे में सुधार की राशि को ही वसूलने के हिसाब से डीपीआर को तैयार किया गया है।

उल्लेखनीय है कि आज से तीन दशक पहले उक्त लाइसेंस कालोनियां विकसित हुई थी और इन कालोनियों में सडक़, सीवर लाइन, वाटर सप्लाई और बरसाती नाले इत्यादि को टाउन प्लानिंग विभाग के लाइसेंस पर आधारित सर्विस एस्टीमेट और उस समय की मौजूदा आबादी के हिसाब से विकसित किया गया था और तब से इन सुविधाओं का रख-रखाव बिल्डर प्रबंधन द्वारा स्थानीय निवासियों से रख-रखाव शुल्क वसूलकर किया जा रहा था। इस बारे में निवासियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि इन सुविधाओं के रख-रखाव के लिए शुल्क वसूला जा सकता है। 

बैठक में एडीशनल म्यूनिसिपल कमिशनर वाईएस गुप्ता, चीफ इंजीनियर एनडी वशिष्ठ, चीफ टाऊन प्लानर आरके सिंह सहित अंसल, यूनिटैक, सनसिटी और डीएलएफ प्रबंधन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

कालोनियों की रिवाइज डीपीआर:-


कालोनी का नाम    रिवाइज डीपीआर (राशि करोड़ में)

डीएलएफ फेज-1         14.12
डीएलएफ फेज-2          9.43
डीएलएफ फेज-3         11.89
सुशांत लोक-1            41.28
पालम विहार              19.32
सनसिटी                   04.25
साउथ सिटी-1            17.95
साउथ सिटी-2            11.76
साउथ सिटी-2 फेज दो   9.80
निरवाना कंट्री    

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