सॉफ्ट हिंदुत्व का Narrative सेट करने वाले को जनता ने नकार दिया : रमन मलिक

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हरियाणा भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा  : 

हिंदुत्व पर राजनीति करने वाले ने पटखनी खाई

22 साल के शासन के बाद भी गुजरात में हमारी पार्टी की वोट शेयरिंग बढ़ी

ईवीएम पर प्रतिक्रिया देने वाले पहला व्यक्ति जीजा जी के जीजा जी थे 

अखिलेश यादव ने अपनी साइकिल पर कुछ अधिक भार उठा लिया

समाज को तोड़ने की राजनीति करने में कांग्रेस निपुण है

गुरुग्राम : सोमवार को देश के दो राज्यों गुजरात व हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित किए गए. दोनों ही राज्यों में भाजपा को बहुमत मिला. गुजरात में 22 साल सरकार में रहने के बाद सभी नकारात्मक प्रभाव को दरकिनार करते हुए भाजपा ने सता फिर हथिया ली जबकि हिमाचल में पार्टी को दो तिहाई बहुमत हासिल हो गया. कांग्रेस ने गुजरात में अपनी स्थिति में सुधार का संकेत दिया लेकिन हिमाचल में कुर्सी छिन गई. भविष्य में दोनों ही राज्यों के चुनावी परिणाम के हरियाणा सहित अन्य राज्यों पर पड़ने वाले राजनीतिक प्रभाव सहित तमाम मुद्दों पर thepublicworld.com वेब पोर्टल के मुख्य संपादक सुभाष चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी हरियाणा के तेज तर्रार व मुखर प्रदेश प्रवक्ता, रमण मलिक से लम्बी बातचीत की. “PUBLIC  TALK”  प्रोग्राम के तहत राष्ट्रीय मुद्दे हों या फिर हरियाणा के राजनीतिक व प्राशसनिक हालात सभी सवालों पर उन्होंने खुल कर अपने विचार व्यक्त किए. प्रस्तुत है उनसे बातचीत से प्रमुख अंश : (उनके साथ विस्तृत बातचीत की वीडियो भी आप खबर के नीचे देख सकते हैं )

प्रश्न : गुजरात एवं हिमाचल विधान सभा के चुनाव परिणामों के रुझान अब लगभग सामने हैं पहली बार लगा कि राजनीतिक दल गंभीरता के साथ चुनाव में आमने सामने हैं, हालांकि भाजपा बढ़त की स्थिति में है लेकिन पहले की अपेक्षा आकंड़ों में ह्रास क्यों ? क्या चूक रही ?

रमन मलिक : इस चुनाव परिणाम की स्टडी के दो तरीके हैं. एक तो इसमें प्राप्त मत प्रतिशत और दूसरा कुल कितनी सीटें मिलीं. इस बार भाजपा की सीटें 2012 की अपेक्षा जरूर कम हुईं हैं. इसका पार्टी आकलन करेगी. सभी परिणाम आ जाने के बाद पार्टी विवेचना करती है. इसका मंथन जरूर होगा. जहाँ तक मत प्रतिशत की बात है भाजपा ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि 22 साल के शासन के बाद भी हमारी वोट शेयरिंग बढ़ी है.

प्रश्न : आपका वोट प्रतिशत बढ़ा लेकिन उसे सीट में क्यों तब्दील नहीं कर पाए ?

रमन मलिक : अभी कहना जल्दी होगी रिजल्ट आने के बाद हर एक बूथ पर मंथन होगा. कहाँ क्या हुया पार्टी स्टडी करेगी तभी इसकी वास्तविकता के बारे में कह सकते हैं. यह एक विषय है जिस पर पूरा डाटा आने के बाद ही इसके कारण स्पष्ट हो संकेंगे.

प्रश्न : आपकी नजरों में दोनों राज्यों के चुनाव परिणामों के क्या राजनीतिक मायने हैं ?

रमन मलिक : मेरी दृष्टि से यह स्पष्ट है कि जो विकास गुम हो गया के नारे दे रहे थे, जो नया चोला पहन कर सॉफ्ट हिंदुत्व का narrative सेट कर रहे थे उन्हें जनता ने करारा जवाब दे दिया है. उस व्यक्ति ने  यू एस एम्बेसी में जा कर बोला कि हिन्दू आतंकवाद, लश्कर-ए-तोएबा  से भी खतरनाक है. उसने यह कहा कि लोग मंदिर लड़कियों को छेड़ने जाते हैं. लोगों को यह बात समझ में  आ गयी है कि यह एक विकृत सोच है . उनकी इन बातों  का जनता जवाब देगी. सभी आंकड़े आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि इनके क्या इफेक्ट्स हैं.

प्रश्न : गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान एक प्रेस वार्ता में देश के वित्त मंत्री ने कहा कि देश की जनता रियल हिन्दू और क्लोन हिन्दू में फर्क करेगी. जब भाजपा रियल हिन्दू है तो फिर क्लोन की ओर लोग क्यों जाए ? क्या इसका भी असर चुनाव पर पडा है ?

रमन मलिक : देखिये, यह एक ऐसा युद्ध है जिसमें हर तरीके से भाजपा द्वारा लड़ाई लड़ी जाती है. ओरिजिनल वर्सेज क्लोन का विषय भी बिलकुल ठीक रहा. जैसा की मैंने बोला की राहुल गाँधी की सोच हिंदुत्व पर राजनीति करने की थी उसमें उन्होंने पटखनी खाई है. मैं मानता हूँ कि समाज को तोड़ने की राजनीति करने में कांग्रेस निपुण है. और अगर आप इतिहास देखें तो 1947 का भारत विभाजन, एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए हुआ. 10 लाख लोगों की मौत से एक व्यक्ति पीएम बनता है. और 1975 में डेमोक्रेसी की हत्या कर संविधान की प्रस्तावना में 42 वें संशोधन के माध्यम से सेक्युलर शब्द जोड दिया गया केवल इंदिरा गांधी के पीएम बनने के लिए. 1984 में दंगे किस परिवार ने करवाए ? कौन पीएम बना ? उसी परिवार का व्यक्ति ! नलिनी राय किस परिवार के थे ? दंगे कौन करवाता है ? 2002 के दंगे का कल्मिनेशन पॉइंट कहाँ था ? गोधरा के अन्दर 59 कार सेवकों को जला दिए गए थे. इस घटना को अंजाम देने वाले इसी परिवार के कार्यकर्ता थे .

प्रश्न : एक बार फिर चुनाव प्रचार के दौरान जिस सोशल फैक्टर, जाति समीकरण को कांग्रेस ने हवा देने की कोशिश की, क्या उस कथित सोशल फैक्टर ने बीजेपी को कोई नुकसान पहुँचाया ?

रमन मलिक : देखिये , जो फर्स्ट टाइम वोटर बने हैं उन्होंने कांग्रेस की त्रासदी नहीं देखी. गुजरात के अंदर सरदार पटेल से लेकर 2002 के दौरान उन विषम परिसिथितियों को नहीं देखा है जो उनके बहकावे में आ रहे हैं . मैं आपके माध्यम से एक अहम् सवाल पूछना चाहता हूँ कि सीमांत गाँधी, खान अब्दुल गफ्फार खान तो हिन्दू नहीं थे. 60 के दशक में जिस तरह गुजरात जला था, उस व्यक्ति का कहीं से राईट विंग एप्रोच नहीं था. जिन्हें गाँधी जी अपना छोटा भाई कहते थे तब वे हालत देख कर रोये थे और धरने पर बैठे थे. यह तथ्य तो फिल्म डिवीज़न की रिकॉर्डिंग में मौजूद है कोई इसे देख सकता है. क्या आज कांग्रेस यह बोल सकती है की सीमांत गाँधी राईट विंग के एजेंट थे. तब किसने कराये थे ये दंगे ? तब किसका शासन था ? मैं मानता हूँ कि जो आज जनेऊ धारी ब्राह्मण औए शिव भक्त कहलाते हैं वे लोगों को भ्रमित कर रहे हैं . अगर ऐसा नहीं था तो केवल राहुल गाँधी और अहमद पटेल का नाम नॉन हिन्दू में क्यों दर्ज हुआ जबकि उनके साथ अशोक गहलोत भी मौजूद थे. ये लोगों को धोखा देना चाहते हैं लेकिन देश इन्हें बर्दाश्त नहीं करेगा.

प्रश्न : क्या कांग्रेस के सोशल फैक्टर को जनता ने नकार दिया ?

रमन मलिक : गुजरात विकास की ओर चल पडा है. विकास की ओर चलने वाले लोग काम में मशरूफ रहेंगे . और वह जातपात में विश्वास नहीं करेंगे . विकास चाहने वाला कोई समाज डिवाइड नहीं होता है. मैं पूछता हूँ कि गुजरात का मुसलमान पूरे देश में सबसे समृद्ध मुसलमान है, क्यों ?

मैं मानता हूँ ये पाकिस्तान के साथ मिल कर एजेंडा बनाने की कोशिश बुरी तरह फेल हुई. कांग्रेस ने रणनीतिक दृष्टि से यह चाल चली कि कांग्रेस का कोई आधिकारिक प्रवक्ता इधर उधर गालियाँ नहीं बकेगा लेकिन बाकी सारे लोगों को पार्टी ने जानबूझ कर खुली छूट दी थी. कई बार मेरे साथ नेशनल डिबेट में उनके प्रवक्ता कहते थे कि आधिकारिक प्रवक्ता ने तो कभी अपशब्द का प्रयोग नहीं किया लेकिन इसका क्या मतलब है ? इन्होने मणिशंकर अय्यर और कपिल सिब्बल को पूरी छुट दी थी . इसका मतलब है कि कांग्रेस की यह सुनियोजित चाल थी . कपिल सिब्बल तो कभी आर जे डी के साथ चांदनी चौक में चुनाव लड़ते थे तो दोनों चिल्लाते थे, गली गली में शोर है , राजीव गाँधी चोर है.  आज मैं पूछना चाहता हूँ कि कहाँ गए ये लोग ?

प्रश्न : दूसरा फैक्टर है पटेल कम्युनिटी का . कांग्रेस ने पटेल कम्युनिटी को हवा देने की कोशिश की , क्या वह कुछ हद तक कामयाब रहे ?  

रमन मलिक : आरक्षण का जो विषय है उसे आप दो तरीके से देख सकते हैं. अगर आरक्षण दिया जाये तो किसी जाती को समृद्ध बाने के बाद इसे हटाया जाना  चाहिए. यह अच्छी बात है. लेकिन आपके माध्यम से मैं यह सवाल पूछना चाहता हूँ कि संविधान सभा में डॉ अम्बेडकर और अन्य वक्ताओं ने भी इसे अस्थायी बनाने की वकालत की थी. अगर देखें तो 70 साल में 55 से 60 साल, कांग्रेस, शासन में रही और तब भी इस बात की पूर्ति नहीं कर पाई तो आज किस मुंह से आरक्षण की बात कर रहे हैं ? उन्हें यह मौलिक अधिकार ही नहीं है कि वे दलित, वंचित और शोषितों का हितैषी कहलायें . यह सोचनीय है कि उनके शासन काल में लोगों में असमानताए बनीं रहीं . उन्हें यह कहने में शर्म आनी चाहिए ? इसका मतलब है कि कांग्रेस की न तो दलित या मुस्लिम के उत्थान के लिए कभी भी कोई ऐसी सोच थी और न ही ओबीसी के लिए. जो इस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं जो एक दलित समाज को अपमानित करती है. उन्होंने पीएम को कहा गंगू तेली , तेली पिछड़े समाज से आते हैं और कांग्रेस ने इस भाषा का प्रयोग किया. उनके नेता ने कहा गंगू तेली जबकि कांग्रेस अध्यक्षा ने पीएम को मौत का सौदागर कहा. मणिशंकर के नीच कहने पर आपने उन्हें निष्कासित किया लेकिन कांग्रेस अध्यक्षा ने मौत का सौदागर कहा फिर उनके   खिलाफ आपने क्या कार्रवाई की ? और आपके औरंगजेबी , तुगलकी खानदान की वो मालकिन बनी हुई हैं .

प्रश्न : पटेल फैक्टर का कोई असर नहीं दिखा ?

रमन मलिक : मेरे को ये लगता है कि सूरत जो कि एपी सेण्टर मानना चाहिए वहां 12 सीटें हैं और उनमें सभी भाजपा ने जीती हैं. मुझे लगता है कि 15 से 20 प्रतिशत में यह फैक्टर चला लेकिन ब्रॉड स्पेक्ट्रम में उनका यह काम नहीं कर पाया.

प्रश्न : लेकिन पटेल ने प्रेस से बात की तो उन्होंने दावा किया कि पटेल फैक्टर तो चला लेकिन ईवीएम में हेक कर गड़बड़ी कर भाजपा जीती है ?

रमन मलिक : मैं सवाल करता हूँ कि 2004 में ईवीएम खारब थी तो कांग्रेस आई , 2009 में भी ईवीएम खराब थी तो कांग्रेस आई, 2014 में उनकी सरकार थी तब ईवीएम उनके अंदर थी , पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनी. उसके अलावा दिल्ली में केजरीवाल , बिहार में लालू व नितीश जीते इसका मतलब ईवीएम में गड़बड़ी थी . यहाँ तक कि पंजाब में उनके सीएम कैप्टेन अमरिंदर सिंह कह चुके हैं की अगर ईवीएम् में गड़बड़ी होती तो अकाली सरकार में होते, हम नहीं. अगर वे झूठ बोल रहे हैं तो कांग्रेस ये कहे .

प्रश्न : यानी के वे हार को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं या फिर कन्फ्यूज्ड हैं कि हार का कारण जनता के सामने क्या बताया जाए ?

रमन मलिक : देखिये कुछ समय तक यही लोग थे जो बार बार 130 सीटों की बात कर रहे थे . हार्दिक पटेल भी खुद बोला था. हम यह उम्मीद कर रहे थे कि किस समय ईवीएम पर प्रतिक्रिया आती है. तो डिबेट में सबसे पहले ईवीएम पर प्रतिक्रिया देने वाले थे जीजा जी के  जीजा जी तहशीम पूनावाला. मैं यह समझाना चाहता हूँ कि तहशीम जी कांग्रेस के प्रवक्ता थे या वे इस कम्पनी में हिस्सेदार हैं , वे क्या हैं जो इस पर प्रतिक्रिया दे रहे थे ? और उसके बाद कांग्रेस के बाकी सारे लीडर शुरू हो जाते हैं. मैं यह कहना चाहता हूँ कि कांग्रेस के नेताओं को यह आत्मचिंतन करना चाहिए कि उन्हें किस दिशा में जाना हैं. क्योंकि विपक्ष में आज कांग्रेस ही है और डेमोक्रेसी में विपक्ष भी जरूरी है. अगर कांग्रेस यह नहीं निभा सकती तो फिर और दलों को मिल कर अपने विवेक से इसका उपाय  ढूढना चाहिए. क्योंकि कम से कम इतना तो कर लें कि वे एक सेंसिबल, नेशनलिस्ट, प्रोग्रसिव विपक्ष दे दें.

प्रश्न : एक और सवाल आपसे, आज एक डिबेट में यू पी के सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि हमें झूठ फैलाना नहीं आता है , हम काम करते हैं , भाजपा के लोग झूठ फैलाने में माहिर हैं. वे एक पॉकेट में ओपियम ले कर चलते हैं ? क्या कहना है आपका ?

रमन मलिक :  ओपीएम या अफीम ! अगर तो वे ओ पी एम है तो वो समझाएं क्या अर्थ है ? लेकिन अगर उन्होने अफीम कहा तो मुझे लगता है अब यही धंधा उनके लिए बचा है बेच कर और खाने का. यह बेहद चिंताजनक बात है कि एक पूर्व सीएम को ऐसी ओछी बात नहीं करनी चाहिये. असल में उनकी दिक्कत है कि उन्होंने अपनी साइकिल पर कुछ अधिक भार उठा लिया राहुल गाँधी की सवारी उठाने का लेकिन उनसे संभल नहीं सका. देखिये जो व्यक्ति खुले में यह कहता हो कि उसे औरंगजेब की संस्कृति अच्छी लगती है वो भारतीय संस्कृति को क्या जाने और क्या पहचाने ? जो अपने बाप नहीं हो सका वो किसका सगा होगा ? तो उसके लिए तो यही ठीक है कि “ऐसा कोई सगा नहीं जिसको मैंने ठगा नहीं.”

प्रश्न : पूर्व सीएम के साथ आज मुस्लिम लीग के नेता असदुद्दीन ओबैशी सुर में सुर मिलाते देखे गए. क्या ये सभी एक प्लेटफोर्म पर आयेंगे मोदी जी के खिलाफ ?

रमन मलिक : देखिये मोदी जी के खिलाफ उनका लामबंद होना उनकी विवशता है. अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो वे खत्म हो जायेंगे . मैं ये मानता हूँ कि अच्छा विपक्ष होना जरूरी है लेकिन उस अच्छे की परिभाषा क्या हो यह देश को तय करना है. अच्छे विपक्ष की परिभाषा है कि जिसके लिये राष्ट्र हित सबसे बड़ा हो. जिसके लिए संविधान से बड़ा ग्रन्थ कोई नहीं हो और वो राजनीति करे विकास की और मुद्दों की.

 

रमन मलिक से विस्तृत बातचीत की वीडियो देखने के लिए यहं क्लिक करें : 

 

 

बातचीत का अगला अंक क्रमशः जारी रहेगा ………………………………

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