हरियाणा की सरकारी भर्तियों में भ्रष्टाचार ‘ढूंढते रह जाओगे’ : जवाहर यादव

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2 बार डॉक्टर की भर्ती कर चुकी मनोहर सरकार

चंडीगढ़ ।। राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक संस्कृति बदल रही है। पिछली सरकारों के उलट इस सरकार में प्राथमिकता पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रक्रिया रही है। यूं कहें कि किसी भी तरह की गड़बड़ी तो बर्दाश्त ही नहीं की जा रही है। भर्ती संस्थाओं और इसकी प्रक्रिया में इस मंथन से काफी सुधार हो रहा है।यह कहना है हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन जवाहर यादव का। 

श्री यादव का दावा है कि प्रदेश के अस्पताल पिछले कई वर्षों से डॉक्टरों की भारी कमी झेल रहे हैं और नए डॉक्टर निजी क्षेत्र के मुकाबले सरकारी सेवा में आने से बचते रहे हैं। लेकिन बीते 2 वर्षों में मनोहर लाल की ईमानदार सरकार के प्रयासों से हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों की संख्या ऐतिहासिक रूप से बढ़ गई है। 2015 में जहां 389 डॉक्टर भर्ती किए गए थे वहीं 2017 में हमारी सरकार ने 554 डॉक्टरों की भर्ती की है। यह राज्य सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है।

उनके अनुसार आज राज्य में छोटे-बड़े हर सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती पहले से बेहतर है और लोगों को भरोसा सरकारी अस्पतालों पर लगातार बढ़ रहा है। इस बात की पुष्टि ओपीडी में हर जगह होने वाले पंजीकरण की संख्या बढ़ने से ही रही है । साथ ही जटिल बिमारियों का ईलाज, ऑपरेशन भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के हाथों पहले से कहीं ज्यादा हो रहे हैं। हर साल डॉक्टरों की संख्या कम होने का चलन राज्य में भाजपा सरकार आते ही थम गया था और अब हर साल सरकारी डॉक्टरों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीते महीनों में पुलिस भर्ती( फ़िज़िकल और दौड़ ) और क्लर्क भर्ती पर कुछ ऐसे तत्वों ने सवाल उठाए जिन्हें पारदर्शिता की यह रफ्तार पसंद नहीं आ रही। यह रिकॉर्ड की बात है कि हमारी सरकार में हुई पुलिस भर्ती आज तक की सबसे पारदर्शी भर्ती रही है और क्लर्क भर्ती में पेपर लीक होने के आरोप भी पूरी तरह गलत पाए गए हैं। उनका कहना है हमारी सरकार ने तो पिछली सरकार के दौरान चयनित जेबीटी अध्यापकों की ज्वाइनिंग के लिए भी हर चयनित अध्यापक की दस्तावेजी जांच वैज्ञानिक तरीके से और तय नियमों के अनुसार करवाई और ज्वायनिग दी ।

हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन ने विपक्ष पर यह कहते हुए कटाक्ष किया कि असल में विपक्षी नेताओं को यह विश्वास ही नहीं हो रहा कि सरकारी भर्ती बिना किसी राजनीतिक दबाव और पैसों के लेनदेन के हो सकती है। वे हर भर्ती को अपने नजरिए से देखते हैं और भ्रष्टाचार, सिफारिश के अपने इतिहास को ढूंढने की कोशिश करते हैं। लेकिन यह चुनौती है मनोहर सरकार की कि किसी भी सरकारी काम में भ्रष्टाचार को तो आप ‘ढूंढते रह जाओगे’। भाजपा की मनोहर सरकार में शत प्रतिशत ईमानदारी और निष्पक्षता की गारंटी है और इसी प्रयास में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर होने वाली नई भर्तियों से इन्टरव्यू खत्म कर दिया गया है। ऐसे साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय वही सरकार ले सकती है जिसकी नीयत साफ हो और इरादे नेक हों।

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