उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् की बैठक में मनोहर लाल ने रखा हरियाणा का पक्ष

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कहा हरियाणा के हितों के लिए कानूनी रास्ता अपनाने से भी कभी नहीं हिचकेंगे

केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने  की बैठक अध्यक्षता

सदस्‍य राज्‍यों के समान हितों के 18 मुद्दों पर हुयी चर्चा

 
चंडीगढ़, 12 मई:  हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि राज्य सरकार हर मुद्दे के सौहार्दपूर्ण समाधान की पक्षधर है, लेकिन अतीत में किये गये समझौतों का हमें सदैव सम्मान करना चाहिए। हालांकि, देश के संविधान में हमारा पूर्ण विश्वास है परन्तु अपने हितों की सुरक्षा और प्रदेशवासियों के अधिकारों की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए हम कानूनी रास्ता अपनाने से भी कभी नहीं हिचकेंगे।
 
 मनोहर लाल आज यहां केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् (एनजेडसी) की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा पानी की कमी वाला राज्य है। प्रदेश में पानी की मांग 36 मिलियन एकड़ फीट है, जबकि यहां पानी की उपलब्धता 14.7 मिलियन एकड़ फीट है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में हमें यमुना नदी के अपने हिस्से में से दिल्ली को अतिरिक्त पानी देना पड़ रहा है, जबकि पंजाब रावी-ब्यास के पानी में से हरियाणा का पूरा हिस्सा नहीं दे रहा है।
 
उन्होंने केंद्र सरकार से यमुना नदी पर रेणुका, किसाऊ और लखवार-व्यासी बांधों के निर्माण कार्य में तेजी लाने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय सरोकार का भी मामला है क्योंकि वर्ष 1960 में सिन्धु-जल संधि होने के बाद से भी तीन मिलियन एकड़ फीट पानी पाकिस्तान में जा रहा है। 
 
मुख्यमंत्री  ने कहा कि पिछले कुछ  वर्षों से यमुना नदी में पानी निरन्तर घट रहा है और इस पर कोई बांध न होने कारण मानसून सीजन के दौरान बेशकीमती पानी व्यर्थ चला जाता है। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि हरियाणा के हजारों गांव और लाखों हैक्टेयर भूमि, पंजाब से हमें हमारे हिस्से का पानी न मिलने के कारण आज भी पानी से वंचित है। 
 
उन्होंने कहा कि हम पंजाब सरकार के इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हैं कि भाखड़ा मेन लाइन नहर पर निवेश केवल उनके द्वारा किया जाए और उससे पैदा होने वाली बिजली का उपयोग केवल पंजाब ही करे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के खतरनाक कचरे के निपटान के लिए ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोज़ल प्लांट की विस्तृत परियोजनाओं को अंतिम रूप देने से पूर्व कचरे के निपटान और भण्डारण के बारे में हरियाणा की चिंताओं और उस क्षेत्र के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता के मानदण्डों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। 
 
उन्होंने आशा व्यक्त की कि आज के आपसी विचार-मंथन से विभिन्न अंतरराज्यीय तथा केन्द्र-राज्यों के मध्य मुद्दों को सुलझाने में सहमति बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि हालांकि, हम एक आधुनिक, मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के कार्य में लगे हुए हैं, लेकिन फिर भीे मुझे विश्वास है कि हम कभी भी सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी नहीं करेंगे। उन्होंने दो वर्ष के अंदर उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक बुलाने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह का आभार भी जताया। 
 
 
हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू एवं कश्‍मीर, पंजाब व राजस्‍थान राज्‍यों, राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली और संघ शासित राज्‍य चंडीगढ़ की उत्‍तरी क्षेत्र परिषद की 28वीं बैठक केन्‍द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्‍यक्षता में 12 मई, 2017 को चंडीगढ़ में आयोजित की गई।

परिषद की बैठक में उप मदों सहित सदस्‍य राज्‍यों के समान हितों के 18 मुद्दों पर चर्चा तथा विचार-विमर्श किया गया। जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें उत्‍तरी राज्‍यों में वित्‍तीय और अवसंरचनात्‍मक सद्भाव की आवश्‍यकता; राज्‍यों से फल, पुष्‍प एवं सब्जियों के निर्यात के संयुक्‍त प्रयासों; इस क्षेत्र की विभिन्‍न नदियों के जल तथा पनबिजली का राज्‍यों के बीच बंटवारा; नुकसानदायक अपशिष्‍ट के निपटान के लिए सामान्‍य उत्‍प्रवाही उपचार संयत्रों और उपचार भंडारण एवं आपदा सुविधा (टीएसडीएफ), हरिके बैरेज से निकलने वाली राजस्‍थान की नहरों में प्रदूषण और पंजाब में भाखड़ा मुख्‍य लाइन नहर पर 27 स्‍थानों पर कुल 63.75 मेगावाट विद्युत वाली लघु पनबिजली परियोजनाओं की स्‍थापना आदि विषय शामिल थे। बैठक में आज जिन 18 विषयों पर चर्चा की गई, उनमें से 7 विषयों का निपटान कर लिया गया है।

औद्योगिक क्षेत्रों के उत्‍प्रवाहियों तथा कस्‍बों के सीवेज का यमुना नदी और घग्‍गर नदी तथा राजस्‍थान की नहरों में बहाया जाना एक अंत:राज्‍यीय समस्‍या है। एक बड़े कदम के रूप में सभी सदस्‍य राज्‍यों ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मार्गदर्शन में जल प्रदूषण की समस्‍या को संयक्‍त रूप से निपटारा करने के बारे में आम सहमति व्‍यक्‍त की। फलों, फूलों और सब्जियों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अपीडा ने जम्‍मू एवं कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्‍थान के लिए परियोजनाओं को स्‍वीकृति प्रदान की है। राज्‍यों से यह अनुरोध किया गया कि वे जल और पनबिजली के बंटवारे के विवादित मामलों को सम्‍बन्धित केन्‍द्रीय मंत्रालयों की मध्‍यस्‍थता से सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाएं।

राज्‍यों के बीच अत:राज्‍य सहयोग और समन्‍वय को बढ़ावा देने के लिए राज्‍य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत पांच क्षेत्रीय परिषदों का गठन किया गया था। इनको आर्थिक रूप से, राजनीतिक रूप से एवं सांस्‍कृतिक रूप से एक दूसरे से जुड़े राज्‍यों के लिए एक संयुक्‍त प्रयास के रूप में किसी मामले पर चर्चा और सिफारिश करने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई। उच्‍च स्‍तरीय सुसम्‍बद्ध निकाय होने के कारण ये राष्‍ट्रीय दृष्‍टिकोण के साथ-साथ क्षेत्रीय कारकों को ध्‍यान में रखते हुए विशिष्‍ट मुद्दों पर ध्‍यान केन्द्रित करने में समर्थ हैं।

वर्तमान केन्‍द्र सरकार ने इन क्षेत्रीय परिषदों को सशक्‍त बनाया है। वर्ष 2015 से विभिन्‍न क्षेत्रीय परिषदों की 09 बैठकें तथा इनकी स्‍थायी समितियों की 11 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में कुल 699 मुद्दों पर चर्चा की गई और 345 का निपटान किया गया है।

बैठक के अंत में केन्‍द्रीय गृह मंत्री ने बैठक में मौजूद सभी मुख्‍यमंत्रियों, मंत्रियो एवं मुख्‍य सचिवों को सलाह दी कि कश्‍मीरी विद्यार्थियों एवं नौजवानों को, चाहे वो देश में कहीं भी हों, के साथ सही बर्ताव किया जाना चाहिए और उन्‍हें आसान माहौल प्रदान किया जाए। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी तक पूरे भारत के सब नौजवान और युवतियां अपने बच्‍चे हैं और उनके साथ उसी प्रकार का व्‍यवहार किया जाना चाहिए।

आज की बैठक में हरियाणा और पंजाब के मुख्‍यमंत्रियों, संघ-राज्‍य क्षेत्र चंडीगढ़ के प्रशासक, राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली के उप-राज्‍यपाल, जम्‍मू एवं कश्‍मीर तथा राष्‍ट्रीय राष्‍ट्रीय क्षेत्र दिल्‍ली के उप मुख्‍यमंत्रियों, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू एवं कश्‍मीर, पंजाब, राजस्‍थान के मंत्रियों और केन्‍द्र तथा राज्‍य सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक में विभिन्‍न विषयों पर सहकारी संघ-वार की भावना के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से विचार-विमर्श किया गया और अगली बैठक राजस्‍थान में आयोजित करने के निर्णय के साथ बैठक समाप्‍त हुई।

Suvash Chandra Choudhary

Editor-in-Chief

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