भारत में अपना ओटीटी स्थापित करने के लिए ब्रॉडकास्टरों और टेलीकॉम कंपनियों में लगी होड़

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नई दिल्ली। है प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं, भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं”, भारत की कथा को इस तरह आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने आज कान्स में विख्यात पलाइस डेस फेस्टिवल्स के भारतीय फोरम को संबोधित किया। 6 हजार साल पुरानी संस्कृति और 1.3 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करते हुए श्री ठाकुर ने विदेशी और भारतीय फिल्म निर्माताओं, पत्रकारों व प्रतिनिधियों के तौर पर उपस्थित दर्शकों के सम्मुख अपना मुख्य भाषण दिया।

इस सत्र की संचालक वाणी त्रिपाठी थीं और पैनल में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण सचिव अपूर्व चंद्र, लेखक, कवि तथा केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी, भारतीय अभिनेता, लेखक, निर्देशक एवं निर्माता आर. माधवन, भारतीय फिल्म निर्माता, अभिनेता, टेलीविजन प्रस्तोता, उद्यमी तथा फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के चेयरमैन शेखर कपूर, हॉलीवुड रिपोर्टर के संपादक स्कॉट रॉक्सबर्ग और निर्माता फिलिप एवरिल शामिल थे।

इस वर्ष कान फिल्म फेस्टिवल तथा भारत-फ्रांस के राजनयिक रिश्तों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है। कान्स की महत्ता के बारे में बताते हुए मंत्री श्री ठाकुर ने कहा कि पिछले कई वर्षों से ‘फेस्टिवल द कान्स’  ने भारत-फ्रांस रिश्तों को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। श्री ठाकुर ने भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक श्रेष्ठता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय विषयवस्तु (कंटेंट) दुनियाभर के दर्शकों के दिलोदिमाग पर छाई हुई है और यह मील का पत्थर उस समय रखा गया, जब प्रसिद्ध फिल्म निर्माता चेतन आनंद की 1946 में बनी फिल्म नीचा नगर और 1956 में बनी सत्यजीत रे की पाथेर पांचाली को प्रतिष्ठित पाल्म दि ओर पुरस्कार प्रदान किया गया। आज हमारी सिनेमाई उत्कृष्टता को मान्यता देते हुए पूरा विश्व भारत को ‘कंटेंट हब ऑफ द वर्ल्ड’ की संज्ञा देने को उत्सुक है।

कान्स में भारत की मौजूदा उपस्थिति के बारे में श्री ठाकुर ने कहा, “भारत विश्वभर के दर्शकों को अपने देश की सिनेमाई श्रेष्ठता, तकनीकी कौशल, समृद्ध संस्कृति और किस्सागोई की समृद्ध विरासत देने की मंशा रखता है।” उन्होंने कहा, “भारत की महत्वपूर्ण उपस्थिति, सिर्फ हमारी सिनेमाई श्रेष्ठता, जोकि विभिन्न क्षेत्रों और भाषाओं की फिल्मों के अभिनेताओं व फिल्म निर्माताओं के रूप में मौजूद नहीं है बल्कि ओटीटी मंचों के तौर पर भी है, जिसमें संगीतकारों और लोक कलाकारों की भी सशक्त उपस्थिति है, जो युवा और उम्रदराज सभी वर्ग के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।”

मंत्री श्री ठाकुर ने दर्शकों को कान्स में मौजूद भारतीय स्टार्ट अप्स के बारे में भी सूचित किया और कहा कि मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र के स्टार्ट अप्स अपनी तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन करेंगे तथा एवीजीसी विश्व के सर्वश्रेष्ठ उत्पाद के लिए अपना दावा पेश करेंगे। उनके साथ इस क्षेत्र के एनिमेशन पेशेवरों का एक सशक्त प्रतिनिधिमंडल भी होगा।

श्री ठाकुर ने दर्शकों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा किए गए विभिन्न उपायों के बारे में बताया और कहा कि जहां केंद्र ने सह-निर्माण, भारत में फिल्मों की शूटिंग और फिल्म निर्माण संबंधी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पिछले 8 साल में कई बड़ी पहल की हैं वहीं, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने अपनी खुद की फिल्म संबंधी सुविधाओं की नीतियां बनाई हैं और सह-निर्माण अवसर प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का लक्ष्य भारत के मीडिया और मनोरंजन इको-सिस्टम को बढ़ावा देना है। अपेक्षा की जाती है कि 2025 तक इससे 53 अरब अमेरिकी डॉलर सालाना की कमाई होगी।

ऐसे ही एक उपाय के तहत, “भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर ऑडियो विजुअल सेवा को 12 ‘चैंपियन्स सर्विस सेक्टर्स’ में से एक घोषित किया है और हाल ही में उद्योग के महत्वपूर्ण लोगों का एक एवीजीसी टास्क फोर्स गठित किया है जो इस क्षेत्र में भारत को सर्वोच्च ऊंचाई तक ले जाने का नीतिगत रोड मेप तैयार करेगा और यह भारत को एक वरीयता प्राप्त ‘पोस्ट प्रोडक्शन हब ऑफ द वर्ल्ड’ की स्थिति तक ले जाएगा।”

अनुराग ठाकुर ने कहा कि भारत में एक ओर जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आभासी वास्तविकता, मेटावर्स जैसी इमर्सिव प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह सूचना प्रौद्योगिकी के कुशल कार्यबल के लिए अपार संभावनाएं पेश कर रही है। दूसरी ओर, भारत में ओटीटी मार्केट के 21 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ते हुए 2024 तक 2 अरब डॉलर का हो जाने का अनुमान है।

श्री ठाकुर ने वादा किया कि सरकार भारत को ‘ग्लोबल कंटेंट सब-कॉन्टीनेंट’ का रूप देने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगी और अपनी युवा शक्ति की कुशलता का इस्तेमाल कर इसे एवीजीसी क्षेत्र की ‘वरीयता प्राप्त पोस्ट प्रोडक्शन हब’ बनाने की दिशा में काम करेगी। इसके साथ ही सरकार विश्वभर से सह-निर्माण साझेदारी को गति देगी और फिल्म शूट के लिए भारत में सर्वश्रेष्ठ लोकेशन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव करेगी। श्री ठाकुर ने कहा कि इन कदमों से अगले 5 साल में भारत विश्व के सर्वश्रेष्ठ गुणवत्तापूर्ण कंटेंट निर्माण करने वाले देशों की लीग में शामिल हो जाएगा।

श्री ठाकुर ने अपने संबोधन के अंत में विदेशी फिल्म निर्माताओं को भारत में अपनी फिल्मों की शूटिंग करने का आमंत्रण देते हुए कहा कि वे भारत की मेहमाननवाजी और यहां के लुभावने एवं मनोरम प्राकृतिक दृश्यों का आनंद उठाएं।

शेखर कपूर ने कम लागत वाले ब्रॉडबैंड और मोबाइल उपकरणों तक पहुंच के असर के बारे में बताते हुए कहा कि फिल्म उद्योग पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही विश्व में भारतीय अर्थव्यवस्था का दबदबा कायम होगा और युवा फिल्म निर्माता सिनेमा को जल्दी ही पुनः परिभाषित करेंगे।

प्रसून जोशी ने श्री शेखर कपूर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत बेचैन सपनों का देश है और बेचैन सपने ही कुछ बड़ा कर दिखाते हैं।

अपूर्व चंद्र ने लंच बॉक्स, मिस्टर एंड मिसेज अय्यर और रॉकेट्री जैसी फिल्मों का उल्लेख किया, जो कहानी के तौर पर पूरी तरह भारतीय हैं, लेकिन जिनका असर विश्वभर के दर्शकों पर पड़ा है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा विश्वभर के फिल्म निर्माताओं के लिए घोषित लाभों को एक बार फिर दोहराया।

आर. माधवन ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व को बताने के लिए भारत के पास बहुत कुछ है और सिनेमा जगत को इस विचार पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्यभट्ट से लेकर सुंदर पिचाई तक भारत के पास ऐसी अद्भुत कहानियां हैं, जो विश्वभर के युवाओं की महत्वाकांक्षाओं को आवाज दे सकती है।

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